भारतीय फुटबॉल लीग का यह सीजन अब अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पूरे सीजन में कई उतार-चढ़ाव देखने के बाद अब खिताब की अंतिम तस्वीर बिल्कुल साफ होने वाली है। खेल प्रेमियों के बीच इस समय सबसे ज्यादा चर्चा कोलकाता की दो पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी टीमों, ईस्ट बंगाल और मोहन बागान को लेकर हो रही है। ये दोनों ही दिग्गज टीमें इस समय खिताब की दौड़ में सबसे आगे चल रही हैं, जिसके कारण फुटबॉल प्रेमियों की नजरें अब सीजन के आखिरी मुकाबलों पर टिक गई हैं।
ईस्ट बंगाल: दो दशक का सूखा खत्म करने की ठान ली है
ईस्ट बंगाल के समर्थक लंबे समय से इस पल का इंतजार कर रहे थे। पिछले करीब 20 साल से कोई बड़ा खिताब न मिलने के बाद इस बार टीम वाकई अलग नज़र आ रही है। पूरे सीजन में उन्होंने संतुलित फुटबॉल खेला है — न तो ज्यादा आक्रामक, न ही रक्षात्मक। डिफेंस में मजबूती, मिडफील्ड में नियंत्रण और अटैक में तेजी, तीनों विभागों में टीम ने अच्छा संतुलन बनाए रखा।अब स्थिति यह है कि अगर ईस्ट बंगाल अपना आखिरी मैच जीत लेती है तो ट्रॉफी लगभग उनके हाथ में आ जाएगी।खिलाड़ियों का आत्मविश्वास चरम पर है। कोच और मैनेजमेंट भी टीम को किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतने दे रहे हैं। फैंस का मानना है कि इस बार उनका क्लब इतिहास बदल सकता है। रेड एंड गोल्ड ब्रिगेड के समर्थक तो पहले से ही जश्न की तैयारी में लगे हुए हैं, लेकिन वे जानते हैं कि अभी कुछ भी पक्का नहीं है। एक छोटी सी चूक पूरे सीजन की मेहनत पर पानी फेर सकती है।
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मोहन बागान: विरोधी की एक चूक और पासा पलटने को तैयार
दूसरी तरफ, मौजूदा चैंपियन मोहन बागान की चुनौती को कम आंकना किसी बड़ी भूल से कम नहीं होगा। ग्रीन एंड मरून आर्मी इस बार भी खिताब को अपने पास ही बरकरार रखने के इरादे से मैदान पर उतरी है और उसने आसानी से हार मानने का मन नहीं बनाया है। मोहन बागान के लिए अब आगे की राह थोड़ी पेचीदा जरूर है, लेकिन नामुमकिन बिल्कुल नहीं। खिताब की रेस में बने रहने के लिए उन्हें न सिर्फ अपना आखिरी मैच हर हाल में बड़े गोल अंतर से जीतना होगा, बल्कि दिल से यह दुआ भी करनी होगी कि ईस्ट बंगाल अपने आखिरी मुकाबले में कहीं न कहीं अंक गंवा दे।मोहन बागान के पक्ष में जो सबसे बड़ी बात जाती है, वह है बड़े और दबाव वाले मैचों को खेलने का उनका पुराना तजुर्बा। जब भी इस टीम की पीठ दीवार से लगी है, इसने उतनी ही तेजी से पलटवार किया है। टीम के सीनियर खिलाड़ी अच्छी तरह जानते हैं कि जब मैदान पर तनाव चरम पर हो, तो दिमाग को शांत रखकर खेल का रुख अपनी तरफ कैसे मोड़ा जाता है। क्लब के दीवाने फैंस पूरी शिद्दत के साथ टीम की हौसलाअफजाई में जुटे हैं। कोलकाता के फुटबॉल गलियारों में यह माना जाता है कि अगर कोई टीम आखिरी मिनटों में बाजी पलटने का माद्दा रखती है, तो वह मोहन बागान ही है।
फैंस में उत्साह
फुटबॉल पंडितों की मानें तो यह सीजन भारतीय फुटबॉल के बदलते स्तर की गवाही दे रहा है। खिलाड़ियों का कॉन्फिडेंस बढ़ा है और मैदान पर दिखने वाली स्पीड इसका सबूत है।लेकिन सबसे खूबसूरत नजारा कोलकाता का है। वहाँ फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक मजहब है। ईस्ट बंगाल और मोहन बागान के फैंस के लिए यह हफ्ता किसी त्योहार से कम नहीं है, जहाँ दांव पर सिर्फ ट्रॉफी नहीं बल्कि शहर की बादशाहत लगी है।

अंतिम सीटी का इंतजार
अब सबकी निगाहें पूरी तरह से मैदान पर होने वाले अंतिम मुकाबलों पर टिकी हुई हैं। एक तरफ जहाँ ईस्ट बंगाल अपनी जीत के साथ दो दशक पुराने सूखे को खत्म कर नया इतिहास रचना चाहेगी, वहीं दूसरी तरफ मोहन बागान आखिरी समय में पासा पलटकर खिताब अपने नाम करने की उम्मीद लगाए बैठी है लेकिन जब तक मैदान पर रेफरी की आखिरी सीटी न बज जाए, तब तक किसी को भी विजेता नहीं माना जा सकता। यही अनिश्चितता इस खेल की सबसे बड़ी खूबसूरती है और यही बात इस बार के लीग सीजन को भारतीय फुटबॉल के इतिहास का सबसे रोमांचक सीजन बना रही है। अब आने वाले कुछ ही घंटे यह तय कर देंगे कि इस बार की चमचमाती ट्रॉफी किस टीम के हाथों में सजेगी और कौन सा क्लब इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराएगा।







