लेबनान के आसमान पर एक बार फिर युद्ध के काले बादल गहरा गए हैं। इज़राइली वायुसेना ने अचानक अपने हमलों की रफ्तार और तीव्रता को इस कदर बढ़ा दिया है कि पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। बीती रात पूर्वी लेबनान की बेका घाटी और दक्षिणी इलाकों पर हुई अंधाधुंध बमबारी में दर्जनों बेगुनाह लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय और स्थानीय रेस्क्यू टीमों के लिए स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं; मलबे से शवों और घायलों को निकालने का काम जारी तो है, लेकिन लगातार गिरते बमों के कारण राहत और बचाव कार्य बार-बार रोकना पड़ रहा है।
मशघरा गांव में बरसी मौत: एक ही पल में उजड़ गए कई हंसते-खेलते परिवार
स्थानीय प्रशासन और लेबनान की ऑफिशियल नेशनल न्यूज एजेंसी के मुताबिक, पूर्वी हिस्से में स्थित बेका घाटी का ‘मशघरा’ गांव इस बार इज़राइली फाइटर जेट्स के निशाने पर सबसे ऊपर था। चश्मदीदों ने बताया कि इज़राइली विमानों ने मशघरा पर एक के बाद एक लगातार 8 मिसाइलें दागीं। धमाके इतने भीषण थे कि देखते ही देखते पूरा इलाका आग के शोलों में तब्दील हो गया। इस कयामत की रात में कम से कम 12 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जिनमें मासूम बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं।फिलहाल, ग्राउंड पर बचाव दल बुलडोजर और क्रेन की मदद से ढही हुई इमारतों के भारी-भरकम कंक्रीट को हटाने में जुटे हैं, ताकि मलबे में दबे जिंदा लोगों को सांसें वापस मिल सकें।
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दक्षिणी लेबनान में बढ़ा ‘सैनिक ऑपरेशन’, 70 से ज्यादा गांवों पर भीषण गोलाबारी
तबाही का यह मंजर सिर्फ बेका घाटी तक सीमित नहीं है। दक्षिणी लेबनान के नाबातिह, टायर और सिडोन के रिहायशी इलाके भी इस वक्त बारूद की गंध से महक रहे हैं। इज़राइली डिफेंस फोर्सेज ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने दक्षिणी लेबनान में अपने जमीनी और हवाई हमलों का दायरा बढ़ा दिया है। जमीनी इनपुट की मानें तो इज़राइली सेना अब अपनी ही तय की हुई ‘येलो लाइन’ को लांघकर आगे बढ़ चुकी है।अकेले नाबातिह जिले में सिर्फ एक घंटे के भीतर 33 से ज्यादा हवाई हमले दर्ज किए गए। इसके अलावा हब्बौश, कफ़र रौमने और अरब सालिम जैसे शांत रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया। हब्बौश में हुए एक रॉकेट अटैक में एक बदनसीब पिता और उसके दो बेटों की दर्दनाक मौत हो गई। लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस नए सैन्य अभियान के बाद से अब तक लेबनान में मरने वालों का आंकड़ा 3,213 को पार कर चुका है, जबकि 9,700 से ज्यादा लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।
नेतन्याहू के तेवर कड़े: ‘जब तक हिज़बुल्लाह खत्म नहीं होता, हमले नहीं रुकेंगे’
लेबनान पर यह नया और सबसे घातक हमला इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस वीडियो संदेश के ठीक बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने अपनी सेना को हिज़बुल्लाह के खिलाफ ‘फुल स्केल’ ऑपरेशन चलाने और उसे पूरी तरह कुचलने का हुक्म दिया था। दूसरी तरफ, इज़राइली सेना का दावा है कि उन्होंने रातभर में हिज़बुल्लाह के 100 से ज्यादा ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है, जिनमें उनके बड़े हथियार डिपो, कमांड सेंटर और रॉकेट लॉन्चिंग पैड शामिल हैं। इज़राइल का आरोप है कि हिज़बुल्लाह लगातार सीजफायर की शर्तों को तोड़कर उत्तरी इज़राइल पर रॉकेट और सुसाइड ड्रोन दाग रहा था, जिसका जवाब देना उनके लिए बेहद जरूरी हो गया था।
लाखों लोगों का पलायन: बेरुत पर मंडराया महायुद्ध का खतरा
इज़राइल की तरफ से दक्षिणी और पूर्वी लेबनान के करीब 47 गांवों को तुरंत खाली करने का अल्टीमेटम मिलने के बाद देश में अब तक का सबसे बड़ा विस्थापन शुरू हो गया है। हिज़बुल्लाह का गढ़ माने जाने वाले बेरुत के दक्षिणी उपनगरों से हजारों की तादाद में नागरिक अपनी गाड़ियां लेकर या पैदल ही सुरक्षित ठिकानों की तरफ भाग रहे हैं।सड़कों पर मीलों लंबा ट्रैफिक जाम लगा है। लोग अपने घरों को छोड़कर सिर पर जरूरी सामान रखे बदहवास दौड़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस पर गहरी फिक्र जताते हुए कहा है कि लेबनान में मानवीय संकट अब नियंत्रण से बाहर हो चुका है। अस्पतालों में न तो दवाइयां बची हैं और न ही घायलों को रखने के लिए बेड।
शांति की कोशिशें अधर में लटकीं
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि यह भीषण गोलाबारी ऐसे वक्त में हो रही है, जब ठीक तीन दिन बाद वाशिंगटन में लेबनानी और इज़राइली सैन्य अधिकारियों के बीच सीधी शांति वार्ता होनी थी। लेकिन इस नए हमले ने आगामी बातचीत और सीजफायर की बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है।दुनियाभर के भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो यह सीमित जंग एक बड़े क्षेत्रीय महायुद्ध का रूप ले लेगी। फिलहाल, बेका घाटी के मलबे से उठती चीखें और आसमान में तैरता काला धुआं लेबनान के एक बेहद खौफनाक वर्तमान की गवाही दे रहे हैं।







