पर्थ (ऑस्ट्रेलिया)। भारतीय महिला हॉकी टीम का ऑस्ट्रेलिया दौरा उतार-चढ़ाव से भरा तो रहा, लेकिन भविष्य की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए कई सकारात्मक संकेत दे गया। चार मैचों की इस रोमांचक मैत्रीपूर्ण श्रृंखला के आखिरी और निर्णायक मुकाबले में भारत को मेजबान ऑस्ट्रेलिया के हाथों 2-3 से करीबी हार का सामना जरूर करना पड़ा, लेकिन इस नतीजे के बावजूद भारतीय टीम सीरीज को 2-2 की सम्मानजनक बराबरी पर रोकने में सफल रही। दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में शुमार ऑस्ट्रेलिया के घर में घुसकर भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे दौरे में जिस जुझारूपन और गजब के आत्मविश्वास का नजारा पेश किया, उसने यह साफ कर दिया है कि भारतीय महिला हॉकी का ग्राफ अब वैश्विक पटल पर काफी तेजी से ऊपर की ओर बढ़ रहा है।
नवनीत और दीपिका का डबल अटैक: पहले हाफ में भारत का दबदबा
मैच का आगाज भारतीय टीम के लिए किसी सपने जैसा रहा। रेफरी की सीटी बजते ही भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने कंगारू डिफेंस पर धावा बोल दिया। खेल के दूसरे ही मिनट में भारत ने एक बेहतरीन मूव बनाते हुए पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर लिया। इस सुनहरे मौके को भुनाने की जिम्मेदारी अनुभवी फारवर्ड नवनीत कौर पर थी, और उन्होंने कोई गलती नहीं की। नवनीत ने एक बेहद सटीक शॉट के जरिए गेंद को सीधे ऑस्ट्रेलियाई गोलपोस्ट के जाल में उलझाकर भारत को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी। इस धमाकेदार शुरुआत से ऑस्ट्रेलियाई टीम अभी पूरी तरह संभल भी नहीं पाई थी कि भारतीय टीम ने अपनी आक्रामकता और बढ़ा दी।,दूसरे क्वार्टर में भी भारतीय टीम का यही जलवा देखने को मिला। मैच के 23वें मिनट में मैदान पर मौजूद दर्शकों को एक और शानदार गोल देखने को मिला। भारतीय फॉरवर्ड्स के बेहतरीन तालमेल और एक सामूहिक प्रयास के दम पर युवा सनसनी दीपिका ने गेंद को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त को 2-0 कर दिया। दो गोल की मजबूत बढ़त मिलते ही पर्थ के मैदान पर भारतीय खेमे में उत्साह की लहर दौड़ गई। शुरुआती 30 मिनट के इस खेल में मिडफील्ड ने जहाँ गेंद पर अपना पूरा नियंत्रण बनाए रखा, वहीं हमारी रक्षापंक्ति ने भी अभेद्य दीवार की तरह काम किया और मेजबान टीम को गोलपोस्ट के आस-पास फटकने तक नहीं दिया। भारत इसी 2-0 के मजबूत स्कोर के साथ ब्रेक पर गया।
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दूसरे हाफ में कंगारुओं का पलटवार और आखिरी मिनटों का ड्रामा
दो गोल से पिछड़ने के बाद तीसरे क्वार्टर में ऑस्ट्रेलियाई टीम बिल्कुल नए तेवरों और बदली हुई रणनीति के साथ मैदान पर उतरी। मेजबान टीम ने अपने घरेलू मैदान और दर्शकों के समर्थन का फायदा उठाते हुए भारतीय सर्कल पर लगातार दबाव बनाना शुरू किया, जिसने भारतीय डिफेंस को बैकफुट पर धकेल दिया। ऑस्ट्रेलिया की यह आक्रामक रणनीति आखिरकार मैच के 42वें मिनट में रंग लाई, जब एबी विल्सन ने एक बेहतरीन गोल दागकर अपनी टीम का खाता खोल दिया।इस गोल ने कंगारू टीम में जैसे नए प्राण फूंक दिए। भारतीय टीम अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि महज दो मिनट बाद, यानी 44वें मिनट में ओलिविया डाउन्स ने एक और मैदानी गोल दागकर स्कोर 2-2 से बराबर कर दिया। कुछ ही मिनटों के भीतर दो गोल गंवाने के बाद भारतीय टीम अचानक दबाव में आ गई और मुकाबला पूरी तरह से रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया।चौथे और अंतिम क्वार्टर में दोनों टीमों ने जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी। जब यह मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा था, ठीक तभी 58वें मिनट में खेल का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आया ऑस्ट्रेलिया की कोर्टनी शोनल ने भारतीय डिफेंस की एक छोटी सी चूक का फायदा उठाया और निर्णायक गोल दागकर अपनी टीम को 3-2 से आगे कर दिया। आखिरी दो मिनट में भारत ने बराबरी हासिल करने के लिए कई काउंटर अटैक किए, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई रक्षापंक्ति ने उन्हें कामयाबी नहीं मिलने दी।
युवाओं ने दिखाई चमक, अब नेशन्स कप पर नजर
भले ही आखिरी मुकाबला भारत के हाथ से फिसल गया हो, लेकिन अगर पूरी श्रृंखला के ग्राफ को देखें तो भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन वाकई काबिलेतारीफ रहा। पहले मैच में मिली 1-2 की हार के बाद टीम ने शानदार वापसी करते हुए दूसरे मुकाबले को शूटआउट के जरिए जीता था। इसके बाद तीसरे मैच में भी भारतीय टीम ने बाजी मारकर श्रृंखला में 2-1 की बढ़त बना ली थी।इस पूरे दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धि दीपिका सहित कई युवा खिलाड़ियों का निखरकर सामने आना रहा, जिन्होंने दबाव के क्षणों में बेहतरीन खेल दिखाया। अब भारतीय महिला हॉकी टीम की नजर आगामी एफआईएच नेशंस कप पर होगी। ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मिली सीख और अनुभव आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में भारतीय टीम के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे। भले ही सीरीज का अंत मनमुताबिक न हुआ हो, पर इस टक्कर ने साबित कर दिया है कि यह टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है।







