भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम बुलेटिन के अनुसार 17 जून 2026 को देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे। दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति के साथ जहां एक तरफ पूर्वी, पूर्वोत्तर और प्रायद्वीपीय भारत में झमाझम बारिश की गतिविधियां बढ़ रही हैं वहीं दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में तापमान में मामूली बढ़ोतरी और उमस का प्रभाव बना हुआ है। चक्रवाती परिसंचरण और स्थानीय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से देश के अधिकांश राज्यों में तीव्र मौसमी बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं।
क्षेत्रीय मौसम का विस्तृत विश्लेषण
- पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत- असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। इन राज्यों में काफी व्यापक पैमाने पर वर्षा होने की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश (Heavy to Very Heavy Rainfall) की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान है जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा में भी बिखरी हुई वर्षा होने की संभावना है।
- दक्षिण और प्रायद्वीपीय भारत- केरल, तटीय कर्नाटक और आंतरिक दक्षिण कर्नाटक में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता के कारण भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलासीमा में गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। तेलंगाना के कुछ हिस्सों में 17 जून को गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है जो वहां के शुष्क मौसम से राहत प्रदान करेगी।
- उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय हवाओं के चलते हल्की से मध्यम वर्षा होने के आसार हैं। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में छिटपुट वर्षा या धूलभरी आंधी चलने की संभावना बनी हुई है। पूर्वी राजस्थान में कुछ स्थानों पर 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से ‘थंडरस्क्वाल’ (तीव्र आंधी) आने की आशंका है। उत्तर प्रदेश (विशेषकर पूर्वी उत्तर प्रदेश) में भी इस दिन हल्की बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में आंशिक रूप से बादल छाए रहने और हल्की वर्षा की संभावना है जबकि विदर्भ क्षेत्र में उमस भरा मौसम बना रहेगा।
- पश्चिम भारत (कोंकण, गोवा और गुजरात)- कोंकण और गोवा के तटीय क्षेत्रों सहित मुंबई और आसपास के इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। गुजरात क्षेत्र और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में गर्म और अत्यधिक उमस भरा (Hot and Humid) मौसम रहेगा जिससे लोगों को बेचैनी महसूस हो सकती है। हालांकि शाम के समय स्थानीय स्तर पर बादलों की आवाजाही से हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
तापमान और उमस की स्थिति
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस की क्रमिक वृद्धि देखी जा रही है जो 18 जून तक जारी रहेगी। देश के बाकी हिस्सों में अधिकतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ और ओडिशा के कुछ हिस्सों में अत्यधिक उमस के कारण ‘सटीक तापमान’ वास्तविक तापमान से अधिक महसूस होगा जिससे हीट स्ट्रेस की स्थिति बन सकती है।
read also
आम जनता के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सुझाव
भारी बारिश वाले क्षेत्रों के लिए (पूर्व और पूर्वोत्तर भारत)
- अनावश्यक यात्रा से बचें विशेषकर पहाड़ी रास्तों और जलभराव वाले क्षेत्रों में।
- बिजली कड़कने के दौरान ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या धातु के ढांचों के नीचे शरण न लें। अपने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को प्लग से निकाल दें।
- स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी बाढ़ या भूस्खलन की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें।
उमस और अत्यधिक तापमान वाले क्षेत्रों के लिए (मध्य और पश्चिम भारत)
- शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस (ORS), नींबू पानी, छाछ या लस्सी का सेवन करें।
- दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच सीधी धूप में निकलने से बचें। यदि बाहर जाना आवश्यक हो तो हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, सिर को ढककर रखें और छाते का प्रयोग करें।
- बुजुर्गों, बच्चों और पालतू जानवरों का विशेष ध्यान रखें क्योंकि वे हीट स्ट्रेस के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
किसानों के लिए कृषि मौसम संबंधी सलाह
- पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के किसान जहां भारी बारिश की संभावना है वे अपने खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि फसलों की जड़ें न सड़ें।
- उत्तर-पश्चिम भारत के किसान जहां आंधी और छिटपुट बारिश की संभावना है वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखें और कीटनाशकों का छिड़काव कुछ समय के लिए टाल दें।
नोट- यह मौसम पूर्वानुमान भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आधिकारिक दैनिक बुलेटिनों पर आधारित है। स्थानीय स्तर पर मौसम में त्वरित बदलाव संभव हैं अतः किसी भी यात्रा या बाहरी गतिविधि से पहले अपने क्षेत्रीय मौसम केंद्र की ताजा गाइडलाइंस अवश्य चेक करें।







