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रेड रोड ट्रैफिक ब्लॉक विवाद- सवा घंटे के योग कार्यक्रम के लिए 7 दिन की पाबंदी पर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई

रेड रोड ट्रैफिक ब्लॉक विवाद- सवा घंटे के योग कार्यक्रम के लिए 7 दिन की पाबंदी पर हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 17, 2026 3:22 अपराह्न
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​कोलकाता का ऐतिहासिक और व्यस्ततम मार्ग ‘रेड रोड’ इस समय एक बड़े कानूनी और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया है। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के भव्य कार्यक्रम की तैयारियों के मद्देनजर कोलकाता पुलिस द्वारा इस मार्ग को पूरे सात दिनों के लिए बंद करने का सरकारी आदेश जारी किया गया है। आम जनता, राहगीरों और कामकाजी वर्ग को होने वाली भारी असुविधा को देखते हुए इस फैसले को कलकत्ता हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए इस पर तत्काल सुनवाई की अनुमति दे दी है जिसने इस विषय को राज्य में एक बड़ी बहस का रूप दे दिया है।

​विवाद की मुख्य वजह- क्यों आमने-सामने हैं प्रशासन और नागरिक?

​कोलकाता पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आधिकारिक ट्रैफिक नोटिफिकेशन के अनुसार रेड रोड में योग कार्यक्रम के समापन तक सभी प्रकार के वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

​अदालत में दायर याचिका में इस बात को मुख्य आधार बनाया गया है कि 21 जून (रविवार) को मुख्य कार्यक्रम महज 1 घंटे 15 मिनट (सवा घंटे) का होना है। ऐसे में इतने संक्षिप्त कार्यक्रम के मंच निर्माण और तैयारी के नाम पर एक प्रमुख लाइफलाइन मार्ग को 7 दिनों तक ठप कर देना तर्कसंगत नहीं है। ‘एडवोकेट्स एसोसिएशन’ (वकील संघ) द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि अदालत प्रशासन को ‘परमादेश’ (Writ of Mandamus) जारी करे ताकि आम जनता और वाहनों के लिए सड़कों पर बिना किसी रुकावट के आवाजाही (Reasonable Uninterrupted Access) सुनिश्चित की जा सके।

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​कोलकाता में योग दिवस का भव्य खाका और वीआईपी मूवमेंट

​इस वर्ष कोलकाता में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को बेहद बड़े स्तर पर मनाने की योजना है। इस वीआईपी और व्यापक आयोजन से जुड़े प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं

  • प्रधानमंत्री की उपस्थिति- इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं और उनके साथ राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मंच साझा करेंगे।
  • विशाल जनभागीदारी- रेड रोड पर होने वाले इस मुख्य आयोजन में लगभग 30,000 से 35,000 लोगों के एक साथ योग करने की संभावना है।
  • इस वर्ष की थीम- वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ आयु के लिए योग’ (Yoga for Healthy Ageing) रखी गई है।
  • गंगा नदी में अनोखा रिकॉर्ड- तैयारियों के हिस्से के रूप में केवल रेड रोड ही नहीं बल्कि 20 जून को हुगली (गंगा) नदी की लहरों पर 500 नौकाओं (नावों) पर हजारों लोगों द्वारा एक साथ योग करने का एक अनूठा कार्यक्रम भी निर्धारित किया गया है।

​ट्रैफिक डायवर्जन और आम जनता की परेशानी

​रेड रोड के पूरी तरह बंद होने के कारण सेंट्रल कोलकाता और उसके आस-पास की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। पुलिस ने यातायात को संभालने के लिए कई वैकल्पिक मार्गों (डायवर्जन) की घोषणा की है

  • उत्तर की ओर जाने वाला ट्रैफिक- आउटराम रोड, जेएल नेहरू रोड, डफरिन रोड और मेयो रोड के रास्ते डायवर्ट किया जा रहा है। हावड़ा जाने वाली बसों को एजेसी बोस रोड और स्ट्रैंड रोड की तरफ मोड़ा गया है।
  • दक्षिण की ओर जाने वाला ट्रैफिक- मेयो रोड, डफरिन रोड और एस्प्लेनेड के रास्ते निकाला जा रहा है।
  • अन्य पाबंदियां- 21 जून को गुरु नानक सरानी (मेयो रोड), हॉस्पिटल रोड, लवर्स लेन, कैसुरीना एवेन्यू और क्वींसवे जैसी प्रमुख सड़कें भी सामान्य यातायात के लिए पूरी तरह बंद रहेंगी।

​याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस व्यापक डायवर्जन के कारण कोलकाता की मुख्य सड़कों पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों, एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

​क्या है कानूनी पक्ष?

​कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि सुरक्षा और व्यवस्था के नाम पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सुचारू आवाजाही को इस तरह लंबे समय तक बाधित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले की तात्कालिकता को देखते हुए याचिकाकर्ता को सभी संबंधित पक्षों (राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन) को नोटिस तामील करने की अनुमति दी है जिसके बाद कोर्ट इस पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी करेगा।

​अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और प्रधानमंत्री का आगमन निश्चित रूप से कोलकाता के लिए एक बड़ा और गौरवपूर्ण अवसर है जो स्वास्थ्य के प्रति वैश्विक चेतना को बढ़ावा देता है। हालांकि महज सवा घंटे के कार्यक्रम के लिए किसी महानगर की मुख्य सड़क को एक सप्ताह तक बंद रखना प्रशासनिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं के बीच संतुलन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजरें कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं कि क्या अदालत इस पाबंदी में ढील देने का आदेश देती है या सुरक्षा कारणों से प्रशासनिक फैसले को बरकरार रखती है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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