मध्यप्रदेश में डॉ.मोहन यादव की सरकार ने सरकारी नौकरी में बड़ा बदलाव किया है। सालों से चली आ रही 2 बच्चों वाली नीति पर रोक लगाते हुए मोहन यादव की सरकार ने नए नियमों से सरकारी नौकरी की तैयारी करने वालों को राहत दी है। साल 2001 में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2 बच्चों की नीति लागू की गई थी। जिसके अनुसार कोई भी सरकारी कर्मचारी 2 बच्चों से ज्यादा नहीं पैदा कर सकता था। समय के साथ-साथ कई नियमों में बदलाव हुआ, लेकिन 2 बच्चों वाली नीति में बदलाव नहीं हुआ। बदलते परिवेश को देखते हुए कई सामाजिक संगठनों ने इस नियम का विरोध किया।
मोहन यादव की सरकार ने सामाजिक संगठनों की बात भी सुनी। अब मोहन यादव की सरकार ने 2 बच्चों वाली नीति पर रोक लगाते हुए सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत पहुंचाई है। कई सामाजिक संगठनों का कहना था कि सरकारी नौकरी का आधार अभ्यर्थी के हुनर को देख कर लिया जाना चाहिए न कि उसके परिवार के बच्चों को संख्या को देख कर।
जनसंख्या नियंत्रण है जरूरी
मध्यप्रदेश में मोहन यादव की सरकार ने भले ही 2 बच्चों वाली नीति पर रोक लगा दी हो लेकिन इस फैसले के बाद राष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है। जहां बढ़ती जनसंख्या के कारण बेहतर शिक्षा, रोजगार, अनाज, स्वास्थ्य उपकरणों में दिक्कत का सामना करना पड़ता है तो वही बढ़ती जनसंख्या से लिंगानुपात में भी वृद्धि होती है। मध्यप्रदेश के अलावा भी ऐसे कई राज्य है जहां पहले से ही 2 बच्चों वाली नीति लागू है। राष्ट्रीय परिवार सुरक्षा आयोग के एक आंकड़े के अनुसार वर्तमान में लिंगानुपात भारत में तेजी से घट रहा है। तेलांगना के मुख्यमंत्री ने पहले ही आबादी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन राशि की घोषणा की है।
ज्ञात हो कि भारत चीन जैसे बड़े देश को पछाड़कर आबादी के मामले में विश्व का पहला नंबर का देश है। इतनी आबादी के बाद भी अगर भारत में लिंगानुपात में कमी आ रही है तो यह चिंता का विषय जरूर है। सरकार को लिंगानुपात में वृद्धि की योजना बनानी चाहिए लेकिन जनसंख्या नियंत्रण वर्तमान समय के बदलते परिवेश को देखते हुए बेहद आवश्यक है। कई मुस्लिम संगठनों ने जनसंख्या नियंत्रण के कानून को अपने ऊपर ले लिया है और वह लगातार सरकार को घेरते रहते है। यह कानून किसी भी धार्मिक विवाद को नहीं जन्म देता है बल्कि मानवता के लिए एक अच्छा संदेश है।
क्या पूरे देश में लागू होगी यह नीति
मध्यप्रदेश में 2 बच्चों वाली नीति पर रोक लगाने से यह चर्चा का विषय बन गया है कि यह नीति पूरे देश में लागू होने जा रही है कि नहीं। फिलहाल केंद्र सरकार ने ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लिया है। अगर केंद्र सरकार ऐसा कोई निर्णय लेती है तो इस निर्णय का कई सामाजिक संगठन स्वागत करेंगे।
बढ़ते जनसंख्या से भारत में रोजगार की लगातार कमी हो रही है। युवा नौकरी के लिए इधर-उधर भाग रहा है। जब चुनाव आता है तब कई राजनीतिक संगठनों और दलों के बीच इस विषयों को लेकर विवाद होते है और कहा जाता है कि चुनाव जीतने के बाद सभी युवाओं को रोजगार दिया जाएगा लेकिन युवाओं को चुनाव परिणाम के बाद कुछ नहीं मिलता। चाहे राज्य सरकार हो चाहे केंद्र सरकार युवाओं को खुश करने के लिए वह बेरोजगारी भत्ता थमा देती है।
सरकारी नौकरी के लिए 2 बच्चों वाली पॉलिसी बिल्कुल गलत हो सकती है लेकिन देश में अधिक बच्चे पैदा करने से बेरोजगरी में वृद्धि जरूर होती है। एक बात यह भी है कि जनसंख्या वृद्धि से किसी भी देश को कोई पुरस्कार नहीं मिलता है इसलिए सभी देश जनसंख्या नियंत्रण के इस मुहिम को सभी देशों को साथ आकर काम करना चाहिए।







