डेलीबार्ता,राज्य। मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। लंबे समय से प्रतीक्षित जबलपुर–रायपुर फोरलेन सड़क परियोजना अब साकार होने की दिशा में बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद दोनों राज्यों के बीच सड़क संपर्क न केवल तेज होगा, बल्कि ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक भी बनेगा।
करीब 5 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह फोरलेन सड़क लगभग 150 किलोमीटर लंबी होगी। इसके निर्माण से जबलपुर, मंडला और चिल्पी जैसे क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा और अभी जिस सफर में तीन घंटे का समय लगता है, वह घटकर महज डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा।
डीपीआर तैयार,जल्द शुरू हो सकती है निर्माण प्रक्रिया
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की ओर से इस परियोजना को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृतलाल साहू के अनुसार, जबलपुर–मंडला–चिल्पी तक फोरलेन सड़क का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है और इसकी डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है।
डीपीआर के अंतिम रूप लेने के बाद भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाएं शुरू होंगी। अधिकारियों के मुताबिक, परियोजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बराबर महत्व दिया जा सके।
टू-लेन सड़क बना रही है सफर मुश्किल
फिलहाल जबलपुर से रायपुर को जोड़ने वाला यह मार्ग टू-लेन है, जो वर्तमान यातायात दबाव के हिसाब से बेहद अपर्याप्त साबित हो रहा है। सड़क संकरी होने के कारण आए दिन ट्रैफिक जाम और सड़क हादसे होते रहते हैं।
इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही ज्यादा रहती है। इसके साथ ही कई जगह तीखे मोड़ और सीमित दृश्यता यात्रियों के लिए खतरा बढ़ा देती है। खासकर रात के समय और बारिश के मौसम में यह सड़क और भी जोखिमभरी हो जाती है।
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फोरलेन बनने से हादसों पर लगेगा अंकुश
फोरलेन सड़क बनने के बाद इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। सड़क के बीच डिवाइडर, आधुनिक साइन बोर्ड, बेहतर रोड मार्किंग और जरूरत के अनुसार सर्विस रोड भी बनाई जाएंगी।
फिलहाल जहां वाहनों की औसत रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटा रहती है, वहीं फोरलेन सड़क पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक की गति से चल सकेंगे। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ओवरटेकिंग के दौरान होने वाले हादसों में भी कमी आएगी।
जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा होगी प्राथमिकता
यह मार्ग कई घने जंगलों और संवेदनशील वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। ऐसे में परियोजना के दौरान पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है। एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि सड़क निर्माण में वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
जहां-जहां जानवरों की आवाजाही अधिक है, वहां अंडरपास और ओवरब्रिज बनाए जाएंगे। इससे हिरण, तेंदुआ और अन्य वन्यजीव बिना सड़क पार करने के खतरे के सुरक्षित रूप से एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आ-जा सकेंगे।
मानव–वन्यजीव संघर्ष में आएगी कमी
विशेषज्ञों का मानना है कि अंडरपास और ओवरब्रिज बनने से मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में भी कमी आएगी। अभी सड़क पार करते समय कई बार जानवर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं, जिससे न केवल वन्यजीवों को नुकसान होता है, बल्कि यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ जाती है।
फोरलेन सड़क के साथ वैज्ञानिक तरीके से बनाए गए वाइल्डलाइफ कॉरिडोर इस समस्या को काफी हद तक कम करेंगे।
समय की बचत, ईंधन की खपत भी होगी कम
नई सड़क से यात्रियों का करीब डेढ़ घंटे का समय बचेगा। लगातार रुकने और जाम में फंसने की परेशानी कम होने से ईंधन की खपत भी घटेगी, जिससे यात्रियों की जेब पर बोझ कम पड़ेगा।
लंबी दूरी के ट्रांसपोर्टरों और बस ऑपरेटरों के लिए यह सड़क बेहद फायदेमंद साबित होगी। कम समय में दूरी तय होने से लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और परिवहन व्यवस्था ज्यादा प्रभावी होगी।
व्यापार और उद्योग को मिलेगा नया बल
फोरलेन सड़क केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इससे आर्थिक गतिविधियों को भी जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। जबलपुर, मंडला और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और लघु उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच मजबूत सड़क संपर्क से दोनों राज्यों के बाजार और उद्योग एक-दूसरे से और करीब आएंगे। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पर्यटन के लिए खुलेगा नया रास्ता
यह क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है। फोरलेन सड़क बनने से पर्यटकों की आवाजाही आसान होगी, जिससे पर्यटन उद्योग को भी फायदा मिलेगा।
मंडला, कान्हा नेशनल पार्क और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंच सरल होने से स्थानीय लोगों को होटल, ट्रैवल और गाइड सेवाओं के रूप में अतिरिक्त रोजगार मिलने की उम्मीद है।
विकास और पर्यावरण का संतुलन बना रही परियोजना
यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि किस तरह विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन के जरिए सड़क को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि प्रकृति पर न्यूनतम असर पड़े।
सरकार और एनएचएआई का उद्देश्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि एक ऐसी संरचना तैयार करना है जो आने वाले वर्षों तक सुरक्षित, टिकाऊ और लाभकारी साबित हो।
दोनों राज्यों के लिए मील का पत्थर साबित होगी सड़क
कुल मिलाकर, जबलपुर से रायपुर को जोड़ने वाली यह फोरलेन सड़क परियोजना मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। बेहतर कनेक्टिविटी, सुरक्षित सफर, समय और ईंधन की बचत, साथ ही आर्थिक विकास ये सभी फायदे इस परियोजना को बेहद खास बनाते हैं।
आने वाले समय में जब यह सड़क पूरी तरह से बनकर तैयार होगी, तब संस्कारधानी से छत्तीसगढ़ की राजधानी तक का सफर न सिर्फ आसान होगा, बल्कि विकास की नई राह भी खोलेगा।







