भारत के वित्तीय इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने आखिरकार भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना बहुप्रतीक्षित ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर दिया है। करीब एक दशक के लंबे इंतजार कानूनी बाधाओं और तकनीकी विवादों को पार करने के बाद आया यह कदम भारतीय पूंजी बाजार के लिए सबसे बड़ी घटनाओं में से एक है।
यह आईपीओ न केवल आकार के मामले में भारतीय बाजार के पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ सकता है बल्कि यह निवेशकों को भारत की आर्थिक संवृद्धि की रीढ़ माने जाने वाले एक्सचेंज में सीधे हिस्सेदारी का अवसर भी देगा। आइए इस ऐतिहासिक पब्लिक इश्यू से जुड़ी हर छोटी-बड़ी और महत्वपूर्ण जानकारी पर विस्तार से नज़र डालते हैं।
NSE IPO की संरचना और मुख्य विशेषताएं
प्रारंभिक दस्तावेजों (DRHP) के अनुसार इस सार्वजनिक निर्गम (Public Issue) का ढांचा पूरी तरह से संस्थागत और मौजूदा शेयरधारकों के इर्द-गिर्द बुना गया है
- पूर्णतः ऑफर फॉर सेल (OFS)- यह आईपीओ पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ (OFS) पर आधारित है। इसका मतलब है कि NSE कोई भी नया शेयर (Fresh Issue) जारी नहीं कर रहा है। इसके तहत मौजूदा शेयरधारक अपने पास मौजूद हिस्सेदारी को जनता के लिए पेश करेंगे।
- कुल शेयरों की संख्या- DRHP के मुताबिक मौजूदा शेयरधारकों द्वारा कुल 14,89,05,525 (लगभग 14.89 करोड़) इक्विटी शेयर बेचे जाएंगे। यह संख्या NSE की कुल चुकता पूंजी (Paid-up Capital) का लगभग 6 प्रतिशत है।
- फेस वैल्यू (अंकित मूल्य)- इस आईपीओ के शेयरों का अंकित मूल्य ₹1 प्रति इक्विटी शेयर रखा गया है।
- फंड का उपयोग- चूंकि यह एक OFS है इसलिए आईपीओ से मिलने वाली पूरी राशि सीधे उन शेयरधारकों के पास जाएगी जो अपने शेयर बेच रहे हैं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को अपने व्यावसायिक संचालन या विस्तार के लिए इस आईपीओ से कोई राशि प्राप्त नहीं होगी।
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कौन से बड़े निवेशक बेच रहे हैं अपनी हिस्सेदारी?
NSE के इस मेगा आईपीओ में देश-विदेश के कई बड़े वित्तीय संस्थान अपनी आंशिक हिस्सेदारी बाजार में उतार रहे हैं। प्रमुख बिकवाल शेयरधारकों में शामिल हैं-
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)- देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक इस आईपीओ में सबसे बड़ा बिकवाल है जो अपने 2.47 करोड़ से अधिक शेयर बेचने की योजना बना रहा है।
- विदेशी और वैश्विक निवेशक- मॉर्गन स्टेनली की ‘एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) लिमिटेड’ (1.6 करोड़ शेयर) और ‘कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड’ (CPPIB) लगभग 1.18 करोड़ शेयर बेच रहे हैं।
- अन्य भारतीय संस्थान- बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re), द न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी और नेशनल इंश्योरेंस लिमिटेड जैसी दिग्गज कंपनियां भी अपनी हिस्सेदारी कम कर रही हैं।
- नोट- भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी LIC (लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया) जो NSE में करीब 10.72% की बड़ी हिस्सेदारी रखती है इस आईपीओ के माध्यम से अपने शेयर नहीं बेच रही है।
अनुमानित आकार और बाजार मूल्यांकन (Valuation)
बैंकिंग और बाजार विश्लेषकों के अनुसार अनलिस्टेड (गैर-सूचीबद्ध) बाजार में NSE के शेयरों के हालिया कारोबार और मांग को देखते हुए इस आईपीओ का कुल आकार ₹30,000 करोड़ के आसपास होने का अनुमान है।
यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो यह भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा जो वर्ष 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,000 करोड़ के आईपीओ रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा। इसके साथ ही लिस्टिंग के समय NSE का कुल बाजार मूल्यांकन ₹5 लाख करोड़ (₹5 ट्रिलियन) से अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है।

कोटा आवंटन- किस श्रेणी को कितना मिलेगा
सेबी के नियमों और बुक-बिल्डिंग प्रक्रिया के तहत विभिन्न श्रेणियों के निवेशकों के लिए शेयरों का आरक्षण इस प्रकार तय किया गया है
| निवेशक श्रेणी | आरक्षित कोटा (न्यूनतम/अधिकतम) |
| क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) | नेट ऑफर का अधिकतम 50 प्रतिशत |
| नॉन-इन्स्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII / HNI) | नेट ऑफर का न्यूनतम 15 प्रतिशत |
| रिटेल (खुदरा) निवेशक | नेट ऑफर का न्यूनतम 35 प्रतिशत |
| कर्मचारी कोटा | पोस्ट-ऑफर पेड-अप कैपिटल का अधिकतम 5% तक |
एक अनोखी शर्त- NSE खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट क्यों नहीं हो सकता?
इस आईपीओ से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण नियम यह है कि NSE के शेयर खुद नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर ट्रेड नहीं हो सकेंगे। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के कड़े नियमों के अनुसार हितों के टकराव (Conflict of Interest) से बचने के लिए किसी भी स्टॉक एक्सचेंज को अपने ही प्लेटफॉर्म पर खुद को लिस्ट (Self-listing) करने की अनुमति नहीं है।
यही कारण है कि NSE के शेयरों की लिस्टिंग प्रतिद्वंद्वी एक्सचेंज ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ (BSE) पर होगी। इससे पहले जब 2017 में BSE का आईपीओ आया था तब उसके शेयरों को NSE पर लिस्ट किया गया था।
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एक दशक लंबा इंतजार और कानूनी विवादों का अंत
NSE की लिस्टिंग का सफर कोई आसान रास्ता नहीं रहा है। एक्सचेंज ने सबसे पहले अक्टूबर 2016 में आईपीओ के लिए आवेदन किया था। लेकिन इसके तुरंत बाद एक्सचेंज ‘को-लोकेशन विवाद’ (Co-location Scam) और ‘डार्क फाइबर मामले’ में फंस गया जहां कुछ चुनिंदा दलालों को एक्सचेंज के सर्वर तक अनुचित और त्वरित पहुंच देने के आरोप लगे थे।
इसके बाद सेबी की जांच नेतृत्व में बड़े बदलाव और लंबी कानूनी लड़ाइयों के कारण इस योजना को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। लंबी जद्दोजहद के बाद हाल ही में NSE ने सेबी के साथ करीब ₹1,388 करोड़ से अधिक का भुगतान कर इन पुराने मामलों का निपटारा (Settlement) किया जिसके बाद नियामक ने अंततः एक्सचेंज को नए सिरे से आईपीओ दस्तावेज दाखिल करने की हरी झंडी दी।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा DRHP दाखिल किया जाना न केवल इस वित्तीय संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है बल्कि यह भारतीय रिटेल निवेशकों के भरोसे की भी जीत है। कैश मार्केट और इक्विटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में एकाधिकार जैसी मजबूत स्थिति रखने के कारण वैश्विक निवेशक भी इस आईपीओ को लेकर बेहद उत्साहित हैं। सेबी द्वारा इस ड्राफ्ट की समीक्षा करने और अंतिम मंजूरी देने में आमतौर पर 30 से 90 दिनों का समय लगता है जिसके बाद साल की अंतिम तिमाहियों में यह आईपीओ आम जनता के लिए खुल सकता है। निश्चित रूप से डी-स्ट्रीट (D-Street) पर यह लिस्टिंग भारतीय वित्तीय बाजार के बुनियादी ढांचे को एक नई ऊंचाई और पारदर्शिता प्रदान करेगी।







