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Haryana Congress के नए प्रभारी बने Sanjay Dutt, जानिए कौन हैं AICC Secretary जिन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी

Haryana Congress के नए प्रभारी बने Sanjay Dutt, जानिए कौन हैं AICC Secretary जिन्हें मिली बड़ी जिम्मेदारी
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 27, 2026 12:53 अपराह्न
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कांग्रेस ने अपने संगठन में अहम बदलाव करते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव और सह-प्रभारी संजय दत्त को हरियाणा का नया प्रभारी नियुक्त किया है। वह बीके हरिप्रसाद का स्थान लेंगे, जिन्हें कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में संजय दत्त के राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है।

कौन हैं संजय दत्त?

संजय दत्त कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव हैं। उन्होंने महाराष्ट्र में एनएसयूआई के माध्यम से छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की।

इसके बाद वह महाराष्ट्र विधान परिषद (एमएलसी) के सदस्य रहे और कई कार्यकाल पूरे किए। उन्होंने विधान परिषद में कांग्रेस के मुख्य सचेतक (व्हिप) की जिम्मेदारी भी निभाई।

साल 2011 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण को विधान परिषद का सदस्य बनाने के लिए उन्होंने अपनी एमएलसी सीट छोड़ दी थी। इसे पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा का उदाहरण माना जाता है।

उन्हें वर्ष 2008-09 और 2017-18 में महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ विधायक’ सम्मान से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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हरियाणा की जिम्मेदारी क्यों मानी जा रही है अहम?

कांग्रेस ने संजय दत्त को ऐसे समय हरियाणा की जिम्मेदारी सौंपी है, जब राज्य में संगठन को मजबूत करने और विभिन्न नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की चुनौती सामने है।

यदि वह भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी सैलजा, रणदीप सिंह सुरजेवाला और अन्य नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में सफल रहते हैं, तो इसे उनकी बड़ी उपलब्धि माना जाएगा।

Haryana Congress के नए प्रभारी बने Sanjay Dutt

संजय दत्त की प्रमुख राजनीतिक ताकत

मजबूत संगठनकर्ता

संजय दत्त को संगठन तैयार करने और बूथ स्तर तक नेटवर्क विकसित करने में दक्ष माना जाता है।

लो-प्रोफाइल लेकिन प्रभावी नेता

उनकी पहचान ऐसे नेता की रही है जो पर्दे के पीछे रहकर संगठनात्मक रणनीति तैयार करते हैं।

गुटबाजी सुलझाने का अनुभव

विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने के कारण उन्हें आंतरिक विवादों और गुटबाजी को संभालने का अनुभव है।

आलाकमान के भरोसेमंद

कठिन राजनीतिक परिस्थितियों वाले राज्यों में प्रभारी और सह-प्रभारी की जिम्मेदारी मिलना कांग्रेस नेतृत्व के उन पर भरोसे को दर्शाता है।

विधानमंडलीय अनुभव

संगठन और विधान परिषद दोनों स्तरों पर लंबे समय तक काम करने का अनुभव उनके राजनीतिक करियर की महत्वपूर्ण विशेषता है।

अनुशासित नेता

उन्हें ऐसा नेता माना जाता है जो व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से अधिक संगठन और पार्टी लाइन को प्राथमिकता देते हैं।

किन चुनौतियों का करना होगा सामना?

संजय दत्त की पहचान मुख्य रूप से संगठनात्मक नेता की रही है। बड़े जनआंदोलनों या चुनावी चेहरे के रूप में उनकी पहचान सीमित रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर उनकी मीडिया उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम रही है और उन्हें करिश्माई वक्ता के रूप में नहीं देखा जाता। इसके अलावा चुनावी जीत का उनका प्रत्यक्ष रिकॉर्ड भी सीमित रहा है क्योंकि उनका अधिकांश कार्य संगठन और विधान परिषद तक केंद्रित रहा।

हरियाणा जैसे राज्य में अलग-अलग गुटों के बीच संतुलन बनाए रखना उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

कई राज्यों में निभा चुके हैं संगठनात्मक जिम्मेदारी

संजय सतीशचंद्र दत्त महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं में गिने जाते हैं। वह लंबे समय तक संगठन और विधान परिषद दोनों में सक्रिय रहे हैं।

AICC में राष्ट्रीय सचिव रहने के साथ-साथ वह तमिलनाडु, पुडुचेरी, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के सह-प्रभारी की जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं।

Conclusion

हरियाणा कांग्रेस के नए प्रभारी के रूप में संजय दत्त की नियुक्ति संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उनका लंबा राजनीतिक और संगठनात्मक अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि हरियाणा में विभिन्न नेताओं के बीच समन्वय स्थापित करना उनकी सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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