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Controversy over Sam Pitroda’s ‘Mobile OS’ statement- Congress के ‘आत्मचिंतन’ Vs BJP के ‘आत्मनिर्भर भारत’ की जंग

Controversy over Sam Pitroda's 'Mobile OS' statement- Congress के 'आत्मचिंतन' Vs BJP के 'आत्मनिर्भर भारत' की जंग
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 23, 2026 7:41 अपराह्न
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डेलीबार्ता,नई दिल्ली। इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष सैम पित्रोदा एक बार फिर अपने बयानों के चलते भारतीय राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। तकनीकी जगत में ‘भारत की टेलीकॉम क्रांति के जनक’ (Father of India’s telecom revolution) माने जाने वाले पित्रोदा ने इस बार देश के तकनीकी विकास और प्रतिभा पलायन (Brain Drain) पर सवाल उठाकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक हालिया साक्षात्कार में उन्होंने भारत के पास अपना खुद का ‘मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम’ (OS) न होने को “शर्म की बात” (“Matter of great shame”)  बताया।

इस बयान ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि भारत की डिजिटल संप्रभुता (India’s digital sovereignty) और तकनीकी क्षमताओं पर एक राष्ट्रव्यापी बहस छेड़ दी है। जहाँ भाजपा इसे भारत के अपमान के रूप में देख रही है, वहीं पित्रोदा के समर्थक इसे तकनीकी क्षेत्र में एक आवश्यक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up call) मान रहे हैं।

पित्रोदा का तर्क – प्रतिभा का ‘Sector services’ में फँसना और नवाचार का अभाव

सैम पित्रोदा (Sam Pitroda) ने एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में भारतीय युवाओं (Indian youth) और तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सबसे अधिक इंजीनियर और तकनीकी विशेषज्ञ प्रदान करता है, लेकिन विडंबना यह है कि ये विशेषज्ञ भारत के लिए उत्पाद (Products) बनाने के बजाय विदेशी बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के लिए काम कर रहे हैं।

पित्रोदा के बयान के मुख्य बिंदु-खुद का प्लेटफॉर्म क्यों नहीं? उन्होंने सवाल उठाया कि 150 करोड़ की आबादी वाला देश माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft), फेसबुक या एक्स (ट्विटर) जैसा कोई वैश्विक स्तर का प्लेटफॉर्म (Global platform) क्यों नहीं बना पाया।

Mobile OS की कमी- पित्रोदा ने जोर देकर कहा कि आज के डिजिटल युग (Digital Era) में, जब डेटा ही नई शक्ति है, भारत का गूगल (Android) या एप्पल (iOS) पर निर्भर रहना उसकी तकनीकी कमजोरी को दर्शाता है।

प्रतिभा का दोहन-  उनका मानना है कि भारतीय मेधा केवल ‘सेवा प्रदाता’ (Service Providers) बनकर रह गई है, जबकि वैश्विक शक्ति बनने के लिए ‘उत्पाद निर्माता’ (Product Creators) बनना अनिवार्य है।

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पित्रोदा के इस बयान के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने उन पर चौतरफा हमला बोल दिया। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला (Shahzad Poonawala) ने पित्रोदा को ‘अंकल सैम’ संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता केवल विदेशों में जाकर भारत को नीचा दिखाने का काम करते हैं।

BJP ने पित्रोदा के दावों को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताते हुए Bharat में विकसित स्वदेशी

  • ऑपरेटिंग सिस्टमों की सूची जारी की- BharOS (भारओएस)- आईआईटी मद्रास (IIT Madras) द्वारा विकसित यह स्वदेशी मोबाइल ओएस सुरक्षा और गोपनीयता के लिहाज से एक मील का पत्थर माना जाता है।
  • Maya OS (माया ओएस)- भारतीय रक्षा मंत्रालय ने विंडोज की निर्भरता खत्म करने के लिए इस सुरक्षित ऑपरेटिंग सिस्टम को अपनाया है।
  • Indus OS (इंडस ओएस)- यह दुनिया का पहला क्षेत्रीय भाषा आधारित स्मार्टफोन ओएस है, जिसे भारतीयों ने ही बनाया है।
  • BOSS और शक्ति- भाजपा ने ‘बास लीनक्स’ और स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर ‘शक्ति’ का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत अब केवल सेवा नहीं, बल्कि ‘डीप टेक’ में भी निवेश कर रहा है।

भाजपा का तर्क है कि पित्रोदा जैसे नेता ‘डिजिटल इंडिया’ (Digital India) की सफलताओं को पचा नहीं पा रहे हैं और यूपीआई (UPI) जैसे वैश्विक बेंचमार्क (Global benchmarks) की अनदेखी कर रहे हैं।

तकनीकी संप्रभुता बनाम वैश्विक निर्भरता- क्या है हकीकत?

पित्रोदा और भाजपा के बीच चल रही इस जुबानी जंग ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है: क्या भारत वास्तव में तकनीक के मामले में आत्मनिर्भर है? विशेषज्ञ मानते हैं कि सत्य इन दोनों दावों के बीच कहीं स्थित है।

एक तरफ, यह सच है कि भारत का उपभोक्ता बाजार विदेशी ऑपरेटिंग सिस्टम ( Android and iOS) के नियंत्रण में है, जो डेटा सुरक्षा और आर्थिक दृष्टि से एक चुनौती है। दूसरी तरफ, ‘मेक इन इंडिया’ (Make is India) के तहत पिछले दशक में भारत मोबाइल विनिर्माण (Manufacturing) का दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।

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वर्तमान परिदृश्य की चुनौतियां

  • इकोसिस्टम का निर्माण-  केवल ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) बना लेना काफी नहीं है; उसके लिए लाखों ऐप्स का एक ‘इकोसिस्टम’ (Ecosystem) चाहिए, जो फिलहाल गूगल (Google) और एप्पल (apple) के पास है।
  • आरएंडडी (R&D) में निवेश – भारत का शोध और विकास पर खर्च अभी भी विकसित देशों की तुलना में कम है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता पित्रोदा के बयानों में भी झलकती है।
  • नीतिगत प्रयास- भारत सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ (‘Self-reliant India’) के तहत ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ (Semiconductor Mission) शुरू किया है, जो आने वाले समय में पित्रोदा द्वारा उठाए गए सवालों का ठोस जवाब हो सकता है।

राजनीति और हकीकत का मेल

सैम पित्रोदा का बयान भले ही राजनीतिक रूप से विवादास्पद हो, लेकिन इसने देश के भविष्य की तकनीकी दिशा पर चर्चा को अनिवार्य बना दिया है। भाजपा जहाँ इसे कांग्रेस की ‘नकारात्मक मानसिकता’ (Negative mindset) बता रही है, वहीं यह विवाद सरकार को स्वदेशी तकनीकों (जैसे भारओएस) को और अधिक प्रोत्साहित करने का अवसर भी प्रदान करता है। JNU विवाद की तरह ही, यहाँ भी वैचारिक मतभेद गहरे हैं, लेकिन अंततः लक्ष्य भारत को एक वैश्विक तकनीकी महाशक्ति बनाना ही होना चाहिए।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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