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पाक PM को कराया 40 मिनट इंतजार, झल्लाकर मीटिंग में जबरन घुस गए शहबाज शरीफ; फिर क्या हुआ?

शहबाज शरीफ
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 13, 2025 12:21 पूर्वाह्न
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अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में व्यवहार और समय-पालन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन तुर्कमेनिस्तान की राजधानी अश्गाबात में आयोजित एक बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन में ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने पूरे विश्व मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से होने वाली मुलाकात के लिए करीब चालीस मिनट तक इंतजार कराया गया। यह इंतजार इतना लंबा हो गया कि शहबाज अपनी झुंझलाहट पर नियंत्रण खो बैठे और पुतिन की चल रही बंद-दरवाज़ा मीटिंग में सीधे घुस गए। इस असामान्य कूटनीतिक क्षण ने आगे क्या रूप लिया—यह सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गया।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन

सम्मेलन का माहौल और पहले से तय मुलाकात

अश्गाबात में आयोजित यह सम्मेलन कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों की उपस्थिति के कारण सुर्खियों में था। पाकिस्तान ने भी पूरी तैयारी के साथ अपनी टीम भेजी थी और शहबाज शरीफ की पुतिन से अलग से होने वाली द्विपक्षीय बैठक को इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा था। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था भारी संकट से जूझ रही है और इस समय रूस से ऊर्जा, रक्षा और व्यापारिक सहयोग को लेकर बातचीत शहबाज के एजेंडा का प्रमुख हिस्सा थी।

शुरुआती कार्यक्रम के अनुसार पुतिन और शहबाज की मुलाकात निर्धारित समय पर होनी थी। लेकिन पुतिन का कार्यक्रम व्यस्त होने के कारण उनका समय लगातार आगे बढ़ता गया। शहबाज शरीफ और उनके साथ मौजूद मंत्रियों तथा अधिकारियों को एक कमरे में इंतजार करने के लिए कहा गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन मिनटों के साथ-साथ माहौल बदलने लगा।

इंतजार के दौरान बढ़ती बेचैनी

लगभग दस मिनट तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई स्पष्ट संदेश नहीं आया, तो शहबाज ने आयोजकों से पूछा कि पुतिन कब तक मिलने वाले हैं। उन्हें बताया गया कि कुछ औपचारिकताएँ चल रही हैं और उनका इंतजार करना उचित होगा। इसके बाद वे अपनी टीम के साथ बैठ गए।

लेकिन बीस मिनट, फिर पच्चीस, फिर तीस मिनट बीत गए। कई बार वे अपने सहयोगियों से धीमे स्वर में कुछ कहते दिखाई दिए। वीडियो में वे बेचैन होकर हाथों की उंगलियाँ चटकाते और सामने रखी कुर्सी पर झुक-झुककर बोलते देखे गए। किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के लिए यह इंतजार कूटनीतिक दृष्टि से असहज और असामान्य माना जाता है। जैसे ही इंतजार ने चालीस मिनट का समय पार किया, शहबाज के चेहरे पर नाराज़गी साफ दिखाई देने लगी। वे बार-बार घड़ी देखते और अपने मंत्रियों से चर्चा करते रहे कि आखिर क्या किया जाए। जब उन्हें पता चला कि पुतिन इसी समय तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन के साथ एक बंद-दरवाज़ा बैठक में हैं, तो उनका धैर्य जवाब दे गया।

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झल्लाकर जबरन मीटिंग में प्रवेश

अचानक शहबाज अपनी कुर्सी से खड़े हुए और सीधे उस दिशा में चल पड़े जहाँ पुतिन और एर्दोगन बैठक कर रहे थे। पाकिस्तान के अधिकारी उनके पीछे-पीछे भागते हुए पहुंचे, लेकिन तब तक शहबाज मीटिंग रूम के दरवाज़े तक पहुँच चुके थे।दरवाज़े पर मौजूद सुरक्षा अधिकारियों ने पहले उन्हें रोका, लेकिन वह यह कहते हुए आगे बढ़ गए कि यह बैठक उनके लिए भी महत्वपूर्ण है और उन्हें पुतिन से तुरंत बात करनी है। स्थिति इतनी अचानक हुई कि गार्ड भी कुछ पल के लिए असहज रह गए।

शहबाज ने दरवाज़ा खोला और बैठक कक्ष में प्रवेश कर गए। अंदर बैठे पुतिन और एर्दोगन ने उन्हें देखकर आश्चर्य प्रकट किया। कमरे में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। अफसरों और इंटरप्रेटर्स को भी समझ नहीं आया कि क्या प्रतिक्रिया दी जाए। शहबाज कुछ कदम अंदर आए और खुद ही बोलना शुरू कर दिया कि उन्हें लंबे समय से इंतजार कराया जा रहा है और वे सिर्फ कुछ मिनट की बातचीत के लिए आए हैं।

मीटिंग का माहौल और पुतिन की प्रतिक्रिया

पुतिन ने सहजता बनाते हुए हल्की-सी मुस्कान के साथ उन्हें बैठने का संकेत दिया, लेकिन यह स्पष्ट था कि वे अपनी चल रही बैठक को बीच में रोकना नहीं चाहते थे। उन्होंने शहबाज से कहा कि बैठक शीघ्र ही समाप्त हो रही है और इसके बाद वे उनसे औपचारिक रूप से मिलेंगे।

शहबाज कुछ क्षण वहीं खड़े रहे, फिर उन्होंने दो-तीन औपचारिक वाक्य बोले, जैसे—“हमारी चर्चा बहुत महत्वपूर्ण है… मैं यह सुनिश्चित करना चाहता हूँ कि यह मुलाकात हो।”

एर्दोगन ने भी स्थिति को सहज बनाने की कोशिश की और शहबाज को कुछ क्षण बैठने का अवसर दिया, मगर माहौल पहले ही असामान्य हो चुका था।करीब आठ से दस मिनट शहबाज कमरे में रहे और फिर आयोजकों के कहने पर बाहर आ गए। कमरे से बाहर निकलते समय उनकी नाराज़गी अब भी चेहरे पर साफ थी।

बाहर निकलते ही कूटनीतिक हलचल

जैसे ही घटना बाहर आई, सम्मेलन में शामिल कई प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी मिल गई। थोड़ी देर में सोशल मीडिया पर शहबाज के इंतजार करने का वीडियो और मीटिंग रूम की ओर जाते हुए उनके फुटेज वायरल होने लगे।

पाकिस्तानी मीडिया में इसे लेकर कड़ी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने कहा कि एक प्रधानमंत्री को इस तरह इंतजार कराना असम्मान है, जबकि कई विशेषज्ञों ने इसे शहबाज की कूटनीतिक नासमझी बताया। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने भी इस कदम को अप्रत्याशित और अनौपचारिक कहा।

पुतिन-शहबाज की औपचारिक मुलाक़ात

हालाँकि कुछ समय बाद रूस और पाकिस्तान की टीमों ने एक संक्षिप्त द्विपक्षीय बातचीत की व्यवस्था की, ताकि विवाद न बढ़े। इस औपचारिक मुलाकात में दोनों पक्षों ने ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन यह बैठक उतनी विस्तृत नहीं रही जितनी पाकिस्तान को उम्मीद थी।
सूत्रों के अनुसार पुतिन ने शहबाज के अचानक कमरे में प्रवेश को “अनुचित लेकिन समझ में आने वाला” बताया, क्योंकि बहुपक्षीय सम्मेलन में समय-तालिका अक्सर बदलती रहती है। परंतु कूटनीतिक भाषा में यह साफ हो गया कि शहबाज की जल्दबाज़ी ने पूरे माहौल को असहज कर दिया।

घटना के बाद की राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

पाकिस्तान में विपक्ष ने इस घटना को लेकर शहबाज पर सवाल उठाए और कहा कि प्रधानमंत्री ने देश की गरिमा को नुकसान पहुंचाया। वहीं, सरकार समर्थक मीडिया ने इसे “पाकिस्तान के लिए रूस से संबंध मजबूत करने की व्यग्रता” बताया। वहीं दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटना को कूटनीतिक शिष्टाचार के उल्लंघन के रूप में भी देखा गया, क्योंकि किसी भी राष्ट्राध्यक्ष की निजी और सुरक्षित बैठक में बिना अनुमति प्रवेश को स्वीकार्य नहीं माना जाता।

कूटनीति का एक असामान्य क्षण

यह घटना ऐसे समय हुई जब पाकिस्तान आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों से गुजर रहा है। ऐसे में रूस जैसा शक्तिशाली देश उसके लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन अश्गाबात में जो हुआ, वह कूटनीति की पाठ-पुस्तक में शायद “कैसे व्यवहार नहीं करना चाहिए” के अध्याय में दर्ज हो सकता है, शहबाज का हताशा में मीटिंग में घुस जाना यह दिखाता है कि किसी भी बड़े नेता पर परिस्थितियों का कितना दबाव हो सकता है। पर साथ ही यह भी सिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर धैर्य, व्यवस्था और संयम ही किसी भी राष्ट्र की गरिमा की पहचान होते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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