डेलीबार्ता,नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो (IndiGo) को चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में बड़ा झटका लगा है। अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच कंपनी का शुद्ध मुनाफा 78 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 549.1 करोड़ रुपये पर सिमट गया है। एक साल पहले इसी तिमाही में इंडिगो ने 2,448.8 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। कंपनी के मुनाफे में आई इस तेज गिरावट के पीछे दिसंबर महीने में उड़ानों के बड़े स्तर पर प्रभावित होने, परिचालन अव्यवस्थाओं और नए लेबर कोड के लागू होने को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने जब अपने तिमाही नतीजे जारी किए, तो यह साफ हो गया कि यात्रियों की संख्या बढ़ने और आय में इजाफा होने के बावजूद परिचालन गड़बड़ियों ने कंपनी की कमाई पर गहरा असर डाला है।
दिसंबर में उड़ानों की अव्यवस्था बनी सबसे बड़ी वजह
दिसंबर 2025 की शुरुआत इंडिगो के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुई। देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स पर मौसम, तकनीकी कारणों और क्रू मैनेजमेंट से जुड़ी समस्याओं के चलते बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द करनी पड़ीं या घंटों देरी से संचालित हुईं। इसका सीधा असर यात्रियों के भरोसे और कंपनी की ब्रांड इमेज पर पड़ा।
उड़ानों में लगातार हो रही गड़बड़ियों के चलते नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने भी सख्त रुख अपनाया। DGCA ने इंडिगो के शीतकालीन उड़ान कार्यक्रम में 10 प्रतिशत तक कटौती करने का आदेश दिया, जो 10 फरवरी तक प्रभावी रहा। इस फैसले ने कंपनी की परिचालन क्षमता और राजस्व पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया।
कमाई बढ़ी, लेकिन मुनाफा घटा
हालांकि मुनाफे में भारी गिरावट के बावजूद इंडिगो की कुल आय में वृद्धि दर्ज की गई। इंटरग्लोब एविएशन की कुल आय तीसरी तिमाही में बढ़कर 24,540.6 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 22,992.8 करोड़ रुपये थी।
विशेषज्ञों के अनुसार, आय बढ़ने के बावजूद लागत में तेज इजाफा, उड़ानों के रद्द होने से हुए नुकसान, यात्रियों को दिए गए रिफंड और मुआवजे, साथ ही परिचालन अक्षमताओं ने कंपनी के लाभ को बुरी तरह प्रभावित किया।
नए लेबर कोड ने बढ़ाया खर्च का बोझ
इंडिगो के लिए मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। देश में लागू किए गए नए लेबर कोड का असर भी एयरलाइन के खर्च ढांचे पर पड़ा। कर्मचारियों से जुड़े वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभों पर कंपनी का खर्च बढ़ गया, जिससे मुनाफे पर अतिरिक्त दबाव बना।
एयरलाइन इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का कहना है कि जहां एक ओर एयर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर परिचालन लागत में बढ़ोतरी और नियामकीय सख्ती एयरलाइंस की लाभप्रदता को प्रभावित कर रही है।
सीनियर वाइस-प्रेजिडेंट की छुट्टी
दिसंबर में हुई अव्यवस्थाओं के बाद इंडिगो के शीर्ष प्रबंधन में भी बदलाव देखने को मिला। कंपनी ने अपने एक सीनियर वाइस-प्रेजिडेंट को पद से हटाने का फैसला किया। हालांकि कंपनी की ओर से इस पर आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान नहीं दिया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि उड़ानों के संचालन में आई गंभीर खामियों और प्रबंधन स्तर की जिम्मेदारी तय करते हुए यह कदम उठाया गया है।
यह फैसला इस बात का संकेत माना जा रहा है कि इंडिगो भविष्य में परिचालन अनुशासन और यात्रियों के अनुभव को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती।
यात्रियों को रिफंड और मुआवजे का मुद्दा पहुंचा कोर्ट तक
दिसंबर में बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द होने के कारण हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने टिकट रिफंड और मुआवजे को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं, जिसके बाद मामला दिल्ली उच्च न्यायालय तक पहुंच गया।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इंडिगो को निर्देश दिया कि वह रद्द की गई उड़ानों से प्रभावित यात्रियों को दिए गए रिफंड और मुआवजे की स्थिति को लेकर एक हलफनामा दाखिल करे।
हाईकोर्ट में इंडिगो का पक्ष
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ के समक्ष इंडिगो के वकील ने बताया कि दिसंबर में रद्द की गई सभी उड़ानों के लिए टिकट रिफंड की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके साथ ही नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार जिन यात्रियों को मुआवजा दिया जाना था, उन्हें इसकी पेशकश भी की जा रही है।
एयरलाइन ने अदालत को यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए परिचालन प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है।
ब्रांड इमेज और भरोसे की परीक्षा
इंडिगो लंबे समय से अपनी समयबद्ध उड़ानों और कम लागत वाले मॉडल के लिए जानी जाती रही है। लेकिन दिसंबर की घटनाओं ने कंपनी की इस छवि को झटका दिया है। सोशल मीडिया पर यात्रियों ने उड़ान रद्द होने, लंबी देरी और सूचना की कमी को लेकर नाराजगी जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिगो के लिए यह समय आत्ममंथन का है। मुनाफे में गिरावट केवल वित्तीय आंकड़ा नहीं, बल्कि परिचालन और प्रबंधन से जुड़े उन कमजोर बिंदुओं की ओर इशारा करती है, जिन्हें जल्द सुधारना जरूरी है।
आगे की राह,सुधार और स्थिरता की चुनौती
इंडिगो प्रबंधन ने संकेत दिए हैं कि आने वाली तिमाहियों में परिचालन स्थिरता, क्रू मैनेजमेंट और तकनीकी सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। इसके अलावा यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने और रिफंड जैसी प्रक्रियाओं को और पारदर्शी करने पर भी जोर दिया जाएगा।
एविएशन सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि भारत में हवाई यात्रा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में इंडिगो जैसी बड़ी एयरलाइन के पास बाजार में मजबूत बने रहने का पूरा मौका है, लेकिन इसके लिए उसे परिचालन अनुशासन और ग्राहक संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।
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भरोसा जीतना बड़ा लक्ष्य
तीसरी तिमाही के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि उड़ानों में हुई गड़बड़ी और प्रबंधन स्तर की चूक किसी भी बड़ी कंपनी को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। इंडिगो के लिए यह तिमाही चेतावनी की तरह है। मुनाफे में 78 प्रतिशत की गिरावट, DGCA की सख्ती, कोर्ट का हस्तक्षेप और शीर्ष स्तर पर बदलाव,ये सभी संकेत देते हैं कि एयरलाइन को अब अपने सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है। ऐसे में अब देखने वाली बात यह होगी कि इंडिगो इन चुनौतियों से कैसे उबरती है और आने वाले महीनों में यात्रियों का भरोसा दोबारा कैसे जीतती है।







