व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

​अंतरिक्ष में भारत की बढ़ती शक्ति LVM3-M6 और ISRO का वैश्विक दबदबा

अंतरिक्ष में भारत की बढ़ती शक्ति LVM3-M6 और ISRO
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 25, 2025 9:28 पूर्वाह्न
Follow Us:

​भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO ने पिछले कुछ वर्षों में न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाया है बल्कि वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार Commercial Space Market में भी खुद को एक लीडर के रूप में स्थापित किया है। ISRO के सबसे भारी और शक्तिशाली रॉकेट LVM3 Launch Vehicle Mark-III ने इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा The Heavy lift Launcher है।

अंतरिक्ष में भारत की बढ़ती शक्ति LVM3-M6 और ISRO

​The Heavy lift Launcher- LVM3 क्या है 

​LVM3 जिसे पहले GSLV Mk-III के नाम से जाना जाता था भारत का सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान है। इसे बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है। यह एक तीन-चरणीय Three-stage रॉकेट है जिसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर्स S200 एक लिक्विड कोर स्टेज L110 और एक हाई-थ्रस्ट क्रायोजेनिक अपर स्टेज C25 शामिल है।

​क्षमता

यह रॉकेट 4,000 किलोग्राम तक के उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट GTO में और लगभग 8,000 किलोग्राम को लो अर्थ ऑर्बिट LEO में ले जाने में सक्षम है।

​महत्व 

यह मिशन भारत को विदेशी रॉकेटों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मिशन की मुख्य विशेषताएं और उद्देश्य

​LVM3-M6 या इसके पिछले सफल संस्करण M4 का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक उपग्रहों को उनकी सटीक कक्षाओं में स्थापित करना है।

 उदाहरण के तौर पर OneWeb मिशन के साथ ISRO ने एक साथ 36 उपग्रहों को अंतरिक्ष में भेजकर अपनी सटीकता का प्रमाण दिया था।

​मिशन के प्रमुख घटक

​उपग्रहों का समूह

 इस मिशन के तहत भेजे जाने वाले उपग्रह आमतौर पर ब्रॉडबैंड संचार सेवाओं के लिए होते हैं।

​न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड NSIL

 यह मिशन ISRO की वाणिज्यिक शाखा NSIL के माध्यम से संचालित किया जाता है जो यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण बाजार में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी है।

Also read – ​लीबियाई सेना के स्तंभ जनरल अल-फितौरी ग़रैबिल का निधन –  एक युग का अंत और सुरक्षा चुनौतियां

​ तकनीकी संरचना- रॉकेट कैसे काम करता है

​LVM3 की सफलता के पीछे इसकी जटिल लेकिन सटीक इंजीनियरिंग है।

​S200 स्ट्रैप-ऑन

 उड़ान के शुरुआती चरणों में भारी मात्रा में थ्रस्ट प्रदान करते हैं।

​L110 लिक्विड स्टेज

 रॉकेट की गति को नियंत्रित करने और उसे वायुमंडल की ऊपरी परतों तक ले जाने के लिए दो विकास इंजनों का उपयोग किया जाता है।

​C25 क्रायोजेनिक स्टेज

 यह रॉकेट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें तरल ऑक्सीजन और तरल हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है जो इसे उपग्रहों को अंतरिक्ष की गहराई में धकेलने की शक्ति देता है।

​वनवेब OneWeb के साथ साझेदारी का महत्व

​ISRO के LVM3 मिशनों ने विशेष रूप से OneWeb के लिए काम किया है। OneWeb एक वैश्विक संचार नेटवर्क है जिसका लक्ष्य पूरी दुनिया में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वनवेब को प्रक्षेपण के लिए चुनौतियों का सामना करना पड़ा तब भारत का LVM3 एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा।

​आर्थिक लाभ 

इन मिशनों से भारत को करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

​रणनीतिक जीत

 यह साबित करता है कि भारत पश्चिमी देशों के रॉकेटों जैसे SpaceX या Arianespace के मुकाबले कम लागत में समान गुणवत्ता दे सकता है।

​गगनयान मिशन के लिए आधार

​LVM3-M6 जैसे मिशन केवल उपग्रह भेजने के लिए नहीं हैं बल्कि ये भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान Gaganyaan मिशन की नींव भी रख रहे हैं।

​Human Rating

ISRO ने LVM3 को ह्यूमन रेटेड Human-rated बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका मतलब है कि यह रॉकेट भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाएगा।

​सुरक्षा परीक्षण

 हर सफल LVM3 लॉन्च रॉकेट की विश्वसनीयता Reliability को बढ़ाता है, जो मानव मिशन के लिए अत्यंत आवश्यक है।

​अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था Space Economy में भारत का योगदान

​वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी लगभग 2-3% है। भारत सरकार का लक्ष्य इसे अगले दशक में 10% तक ले जाने का है।

विशेषता विवरण

  • लागत प्रभावशीलता- अन्य देशों की तुलना में 30-40% सस्ता
  • सफलता दर – LVM3 की सफलता दर शत-प्रतिशत रही है
  • भविष्य के मिशन शुक्रयान –  मंगलयान-2 और चंद्रयान के अगले चरण

चुनौतियां और भविष्य की राह

​यद्यपि LVM3 एक सफल रॉकेट है लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में चुनौतियां हमेशा बनी रहती हैं|

​पुन प्रयोज्य रॉकेट Reusable Rockets SpaceX की तरह भारत भी अब RLV Reusable Launch Vehicle तकनीक पर काम कर रहा है ताकि लागत को और कम किया जा सके।

​प्रतियोगिता 

चीन और निजी कंपनियों से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच भारत को अपनी लॉन्च फ्रीक्वेंसी लॉन्च की आवृत्ति बढ़ानी होगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment