तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में संयुक्त परिवार सिमटकर छोटे परिवारों में बदलते जा रहे हैं। रोजगार, शिक्षा और बेहतर भविष्य की तलाश में युवा पीढ़ी महानगरों या विदेशों की ओर रुख कर रही है। ऐसे में गांवों और शहरों में रह गए वृद्ध माता-पिता अक्सर अकेलेपन, असुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझते नजर आते हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद वे पारिवारिक माहौल और सामाजिक सहारे से वंचित हो जाते हैं। इसी सामाजिक यथार्थ को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक अभिनव और आधुनिक पहल की गई है,लक्ज़ीरियस ओल्ड एज होम “संध्या छाया”।
“संध्या छाया”: बुजुर्गों के लिए सम्मानजनक जीवन की पहल
भोपाल के पत्रकार कॉलोनी, लिंक रोड नंबर-3 पर स्थित “संध्या छाया” केवल एक वृद्धाश्रम नहीं, बल्कि बुजुर्गों के लिए सुरक्षित, गरिमामय और सुविधासंपन्न जीवन का विकल्प है। यह पेड ओल्ड एज होम सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की पहल पर तैयार किया गया है। करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह परिसर बुजुर्गों की जरूरतों, स्वास्थ्य और भावनात्मक पहलुओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
यहां रहने के लिए वरिष्ठ नागरिकों को कमरे के आकार और सुविधाओं के अनुसार करीब 50 हजार रुपये प्रतिमाह खर्च करने होंगे। यह पहल खासतौर पर उन बुजुर्गों के लिए है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, लेकिन अकेलेपन और देखभाल की कमी से जूझ रहे हैं।
पांच एकड़ में फैला आधुनिक परिसर
“संध्या छाया” लगभग 5 एकड़ से अधिक भूमि पर फैला हुआ है। हरियाली, खुला वातावरण और शांत परिवेश इसे शहर की भीड़-भाड़ से अलग एक सुकून भरी जगह बनाता है। पूरे परिसर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि बुजुर्गों को चलने-फिरने, बैठने और समय बिताने में किसी तरह की असुविधा न हो।
इस ओल्ड एज होम में कुल 34 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें
- 12 सिंगल बेड रूम
- 22 डबल बेड रूम
कुल मिलाकर यहां 56 वरिष्ठ नागरिकों के रहने की व्यवस्था है। सीमित संख्या में निवासियों की व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि हर बुजुर्ग को व्यक्तिगत देखभाल और पर्याप्त ध्यान मिल सके।
एसी रूम से निजी बालकनी तक हर सुविधा मौजूद
“संध्या छाया” को लक्ज़ीरियस बनाने में किसी तरह की कसर नहीं छोड़ी गई है। यहां प्रत्येक कमरे में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। सभी कमरे वातानुकूलित (एसी) हैं- और इनमें
- टीवी
- फ्रिज
- गर्म व ठंडे पानी की सुविधा
- अटैच बाथरूम
- निजी बालकनी
जैसी सुविधाएं दी गई हैं। कमरे इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि बुजुर्गों को पर्याप्त रोशनी, हवा और खुलापन मिले। बालकनी से बाहर का दृश्य उन्हें प्रकृति से जोड़ता है, जिससे मानसिक शांति और सकारात्मकता बनी रहती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान
बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी चिंता स्वास्थ्य होती है। इसे ध्यान में रखते हुए “संध्या छाया” में स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष व्यवस्था की गई है। यहां
- डॉक्टर परामर्श की सुविधा
- फिजियोथेरिपी सेंटर
- आपातकालीन चिकित्सा सहायता
उपलब्ध है। इसके अलावा हर कमरे में कॉल बेल, इंटरकॉम और टेलीफोन की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। वरिष्ठ नागरिकों की नियमित स्वास्थ्य जांच और जरूरत पड़ने पर त्वरित चिकित्सा सुविधा इस ओल्ड एज होम की बड़ी खासियत है।
सुरक्षा और सुविधाजनक डिज़ाइन
संध्या छाया में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। परिसर में चौबीसों घंटे निगरानी और सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। बुजुर्गों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए
विशेष रूप से डिजाइन किया गया है-
- पाथ-वे
- फिसलन रहित फर्श
- आरामदायक सीढ़ियां और रैंप बनाए गए हैं, जिससे चलने-फिरने में कोई परेशानी न हो।
- मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव का भी इंतजाम
केवल रहना और इलाज ही नहीं, बल्कि बुजुर्गों के मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी यहां पूरा ध्यान रखा गया है। ओल्ड एज होम में-
लाइब्रेरी
- मनोरंजन की सुविधाएं
- ओपन मेस
- डाइनिंग हॉल
उपलब्ध हैं। यहां बुजुर्ग आपस में बातचीत कर सकते हैं, किताबें पढ़ सकते हैं और सामूहिक गतिविधियों में हिस्सा लेकर अपने अकेलेपन को दूर कर सकते हैं। यह वातावरण उन्हें एक परिवार जैसा अहसास देता है।
कमरे के अनुसार अलग-अलग मासिक शुल्क
“संध्या छाया” में रहने का मासिक शुल्क कमरे के आकार के अनुसार तय किया गया है। प्रमुख दरें इस प्रकार हैं—
- डबल बेड (60 वर्ग मीटर) – ₹39,490 प्रतिमाह
- डबल बेड (90 वर्ग मीटर) – ₹43,490 प्रतिमाह
- डबल बेड (56.5 वर्ग मीटर) – ₹38,490 प्रतिमाह
- सिंगल बेड (49.2 वर्ग मीटर) – ₹49,990 प्रतिमाह
- सिंगल बेड (35 वर्ग मीटर) – ₹47,990 प्रतिमाह
- सिंगल बेड (33.5 वर्ग मीटर) – ₹45,990 प्रतिमाह
इन शुल्कों में रहने, मूलभूत सुविधाओं और सेवाओं का खर्च शामिल है।
सेवा भारती को संचालन की जिम्मेदारी
“संध्या छाया” के संचालन में सामाजिक सहभागिता को महत्व देते हुए सेवा भारती मध्य भारत को दो वर्षों के लिए इसके संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सेवा भारती का उद्देश्य केवल सुविधा देना नहीं, बल्कि सेवा भाव के साथ बुजुर्गों की देखभाल करना है, ताकि वे स्वयं को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करें।
प्रदेश में 83 वृद्धाश्रम, लेकिन यह पहल अलग
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में सामाजिक न्याय विभाग द्वारा 83 वृद्धाश्रम संचालित किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 2300 वृद्धजन निवासरत हैं। इन वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को नि:शुल्क आवास, भोजन, कपड़े और स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती हैं।
हालांकि, “संध्या छाया” इनसे अलग है क्योंकि यह आर्थिक रूप से सक्षम वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक सशुल्क और लक्ज़ीरियस विकल्प प्रदान करता है।
भविष्य में पीपीपी मॉडल की योजना
राज्य सरकार की मंशा भविष्य में पीपीपी मॉडल पर ऐसे और सशुल्क वृद्धाश्रम विकसित करने की है। इसके लिए नई नीति तैयार करने पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे बुजुर्गों को बेहतर विकल्प मिलेंगे और समाज में उनकी देखभाल की जिम्मेदारी को नए सिरे से परिभाषित किया जा सकेगा।
अकेलेपन से सम्मान की ओर
“संध्या छाया” केवल एक इमारत नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है जिसमें बुजुर्गों को बोझ नहीं, बल्कि समाज की धरोहर माना जाता है। यह ओल्ड एज होम उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए उम्मीद की किरण है जो अकेलेपन से जूझ रहे हैं, लेकिन सम्मान, सुरक्षा और सुविधाओं के साथ जीवन जीना चाहते हैं। भोपाल में शुरू की गई यह पहल आने वाले समय में देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।







