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महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के भीतर हलचल सुनेत्रा पवार को बड़ी भूमिका देने की चर्चा प्रफुल्ल पटेल के नाम पर अध्यक्ष पद को लेकर कयास

महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के भीतर हलचल सुनेत्रा पवार
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 30, 2026 7:21 अपराह्न
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डेलीबार्ता, महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की प्लेन दुर्घटना में मौत के बाद राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। जानकारी सामनें आई है कि एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने सुनेत्रा पवार से डिप्टी सीएम पद संभालने को कहा है, वहीं उनकी तरफ से कोई जवाब समानें नहीं आया है। गौरतलब है कि एनसीपी की महायुति सरकार में भागीदारी है और उसके पास 41 विधायक हैं। 

सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी नेतृत्व यह आकलन कर रहा है कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में पार्टी की स्थिरता, सरकार में प्रभावी भागीदारी और आगामी चुनावी चुनौतियों से निपटने के लिए किस तरह का नेतृत्व मॉडल सबसे उपयुक्त रहेगा। इसी संदर्भ में कुछ नेताओं की ओर से सुनेत्रा पवार के नाम पर चर्चा सामने आई है।

सरकार और संगठन,दोनों मोर्चों पर संतुलन की तलाश

एनसीपी के भीतर यह समझ बनती दिख रही है कि सरकार में पार्टी की भूमिका को मज़बूत बनाए रखने के साथ-साथ संगठनात्मक ढांचे को भी स्पष्ट दिशा दी जाए। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग मानता है कि सरकार में एक भरोसेमंद और स्वीकार्य चेहरा पार्टी की राजनीतिक पकड़ को मज़बूत कर सकता है। वहीं संगठन की कमान ऐसे नेता के हाथों में हो, जिनका अनुभव राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रभावी हो।

हालांकि, पार्टी की ओर से अब तक किसी भी पद या नाम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। नेताओं का कहना है कि सभी चर्चाएं आंतरिक हैं और अंतिम फैसला सामूहिक सहमति से ही लिया जाएगा।

सुनेत्रा पवार की अनुभव, पहचान और राजनीतिक यात्रा …राज्यसभा से लेकर चुनावी मैदान तक का सफर

सुनेत्रा पवार एनसीपी की एक जानी-मानी चेहरा हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बारामती सीट से चुनाव लड़ा था। भले ही उन्हें उस चुनाव में सफलता नहीं मिली, लेकिन पार्टी ने बाद में उन्हें राज्यसभा भेजकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रतिनिधित्व दिया। वर्तमान में वे राज्यसभा की सदस्य हैं और संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि सुनेत्रा पवार का प्रशासनिक समझ, राजनीतिक परिपक्वता और पार्टी के भीतर स्वीकार्य होना—इन सब वजहों से वे सरकार में बड़ी जिम्मेदारी निभा सकती हैं। हालांकि, इस संबंध में स्वयं सुनेत्रा पवार की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

प्रफुल्ल पटेल के नाम पर अध्यक्ष पद की चर्चा, संगठन को मज़बूती देने की रणनीति

एनसीपी के संगठनात्मक भविष्य को लेकर प्रफुल्ल पटेल के नाम पर भी लगातार चर्चा हो रही है। लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे प्रफुल्ल पटेल का पार्टी संगठन में गहरा अनुभव रहा है। वे राज्यसभा सदस्य हैं और केंद्र व राज्य दोनों स्तरों पर राजनीति का व्यापक अनुभव रखते हैं।

सूत्रों का कहना है कि यदि संगठनात्मक जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जाती है, तो पार्टी को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर एक स्पष्ट रणनीतिक दिशा मिल सकती है। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि इस पर अभी केवल विचार-विमर्श हो रहा है, अंतिम निर्णय पार्टी फोरम में लिया जाएगा।

बारामती की राजनीति पर सबकी नज़र, उपचुनाव और भावी रणनीति

बारामती विधानसभा सीट हमेशा से महाराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रही है। इस सीट पर एनसीपी की पकड़ ऐतिहासिक रूप से मज़बूत मानी जाती है। पार्टी के भीतर यह चर्चा भी चल रही है कि भविष्य में यदि बारामती से उपचुनाव जैसी स्थिति आती है, तो किस चेहरे को मैदान में उतारा जाए।

कुछ नेता पार्थ पवार के नाम पर विचार की बात कर रहे हैं, तो कुछ सुनेत्रा पवार को संभावित विकल्प के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, पार्टी का आधिकारिक रुख यही है कि किसी भी चुनावी फैसले से पहले ज़मीनी हालात, संगठन की राय और राजनीतिक समीकरणों का आकलन किया जाएगा।

शरद पवार गुट के साथ संभावित समीकरण,विलय पर फिलहाल कोई जल्दबाज़ी नहीं

एनसीपी के दोनों धड़ों के बीच संभावित समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। स्थानीय निकाय चुनावों में सहयोग के बाद यह अटकलें तेज़ हुई थीं कि आगे चलकर दोनों गुटों के बीच कोई बड़ा राजनीतिक निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल इस मुद्दे पर कोई जल्दबाज़ी नहीं की जा रही है।

नेताओं का मानना है कि संगठन को स्थिर करना, सरकार में भूमिका स्पष्ट करना और आगामी चुनावों की तैयारी—ये सभी प्राथमिकताएं हैं। इन मुद्दों पर स्पष्टता आने के बाद ही किसी बड़े राजनीतिक फैसले पर विचार होगा।

मंत्रालयों और विभागों को लेकर पार्टी का रुख

एनसीपी अपने कोटे की भूमिका बरकरार रखना चाहती है। महायुति सरकार में एनसीपी के पास कई महत्वपूर्ण विभाग रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, एनसीपी चाहती है कि उसके कोटे के विभागों पर पार्टी का प्रभाव बना रहे। इसके लिए मुख्यमंत्री से औपचारिक बातचीत और पत्राचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा।

एनसीपी का तर्क है कि विधानसभा में उसके 41 विधायक हैं और वह राज्य की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। ऐसे में सरकार में उसकी भूमिका और जिम्मेदारियां उसी अनुपात में रखना भी बड़ी भूमिका है।

फैसले का इंतज़ार, कयासों का दौर,आधिकारिक घोषणा तक सब कुछ अटकलें

महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी को लेकर चल रही चर्चाएं इस बात का संकेत हैं कि पार्टी अपने अगले कदम को लेकर गंभीर मंथन में है। सुनेत्रा पवार को बड़ी जिम्मेदारी देने और प्रफुल्ल पटेल को संगठनात्मक भूमिका सौंपने जैसे मुद्दों पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी निर्णय समय, परिस्थितियों और सामूहिक सहमति के आधार पर लिए जाएंगे। तब तक राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर जारी रहना तय है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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