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देशभर में कैब ड्राइवरों ने बुलाई देशव्यापी हड़ताल थम जायेंगे कैब ऊबर ओला के पहिये

देशभर में कैब ड्राइवरों ने बुलाई देशव्यापी हड़ताल थम जायेंगे कैब ऊबर ओला के पहिये
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 7, 2026 12:43 अपराह्न
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देश के प्रमुख शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक टैक्सी सेवाओं पर बड़ा असर पड़ने वाला है। ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े लाखों कैब और बाइक टैक्सी ड्राइवरों ने एकजुट होकर देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल को लेकर ड्राइवर संगठनों का दावा है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा। यात्रियों, ऑफिस जाने वालों और एयरपोर्ट ट्रैवल करने वालों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि निजी ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं आज शहरी परिवहन की रीढ़ बन चुकी हैं।

ड्राइवरों का कहना है कि वे लंबे समय से अनदेखी, बढ़ते खर्च और घटती कमाई से जूझ रहे हैं। बार-बार कंपनी नीतियों में बदलाव, कमीशन बढ़ना और इंसेंटिव सिस्टम में कटौती ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। इसी असंतोष ने अब देशव्यापी हड़ताल का रूप ले लिया है।

ड्राइवरों की नाराज़गी के पीछे की वजहें

कैब ड्राइवरों की नाराज़गी अचानक पैदा नहीं हुई है, बल्कि यह बीते कई वर्षों से जमा होते आ रहे असंतोष का परिणाम है। ड्राइवरों का आरोप है कि ऐप आधारित कंपनियां शुरुआत में आकर्षक कमाई का सपना दिखाती हैं, लेकिन समय के साथ शर्तें बदल दी जाती हैं। पहले जहां प्रति किलोमीटर अच्छा भुगतान मिलता था, वहीं अब ईंधन की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराए में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई।

ड्राइवर यह भी कहते हैं कि कंपनियां भारी कमीशन वसूलती हैं। एक राइड का बड़ा हिस्सा कंपनी के पास चला जाता है, जबकि गाड़ी की किस्त, ईंधन, मेंटेनेंस, बीमा और टैक्स का पूरा बोझ ड्राइवर को ही उठाना पड़ता है। कई ड्राइवरों के अनुसार, दिनभर मेहनत करने के बाद भी उनकी आमदनी न्यूनतम स्तर तक सिमट गई है।

इसके अलावा, रेटिंग सिस्टम को लेकर भी ड्राइवरों में नाराज़गी है। उनका कहना है कि यात्रियों की एकतरफा शिकायतों पर बिना जांच के उनके अकाउंट सस्पेंड कर दिए जाते हैं। इससे उनकी रोज़ी-रोटी अचानक बंद हो जाती है। ड्राइवर चाहते हैं कि किसी भी कार्रवाई से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

देशव्यापी हड़ताल का स्वरूप और असर

ड्राइवर संगठनों ने साफ किया है कि यह हड़ताल केवल किसी एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पूरे देश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाएं प्रभावित होंगी। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े महानगरों में इसका सबसे ज्यादा असर दिखने की संभावना है।

हड़ताल के दौरान बड़ी संख्या में कैब और बाइक टैक्सी सड़कों से नदारद रहेंगी। इसका सीधा असर रोज़मर्रा के यात्रियों, आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और हवाई अड्डों तक आने-जाने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। खासकर उन लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है जो पूरी तरह ऐप आधारित सेवाओं पर निर्भर हैं।

ड्राइवरों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करेंगे। कई जगहों पर रैलियां, धरने और ज्ञापन देने की योजना भी बनाई गई है। संगठन यह भी संकेत दे रहे हैं कि अगर सरकार और कंपनियों की ओर से सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो हड़ताल की अवधि बढ़ाई जा सकती है।

सरकार और कंपनियों से ड्राइवरों की अपेक्षाएं

हड़ताल के पीछे ड्राइवरों की मुख्य मांग यह है कि उनकी आय को स्थिर और सम्मानजनक बनाया जाए। वे चाहते हैं कि किराया तय करने में ईंधन की कीमतों और महंगाई को ध्यान में रखा जाए। साथ ही, कंपनियों द्वारा वसूले जाने वाले कमीशन की एक अधिकतम सीमा तय हो।

ड्राइवर यह भी मांग कर रहे हैं कि उन्हें श्रमिक का दर्जा मिले, ताकि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल सके। बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी उनकी अपेक्षाएं सरकार से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि वे स्वतंत्र पार्टनर कहलाते हैं, लेकिन व्यवहार में उन पर पूरी तरह कंपनी का नियंत्रण होता है।

कंपनियों से ड्राइवर पारदर्शी नीतियों की मांग कर रहे हैं। इंसेंटिव, बोनस और पेनल्टी से जुड़े नियम स्पष्ट हों और बार-बार बदले न जाएं। साथ ही, अकाउंट सस्पेंशन जैसे मामलों में निष्पक्ष सुनवाई की व्यवस्था हो।

ड्राइवर संगठनों का मानना है कि यदि समय रहते उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन भविष्य में और व्यापक हो सकता है। वे इसे केवल कमाई का मुद्दा नहीं, बल्कि सम्मान और अस्तित्व की लड़ाई बता रहे हैं।

कुल मिलाकर, ओला, उबर और रैपिडो से जुड़े ड्राइवरों की यह देशव्यापी हड़ताल शहरी परिवहन व्यवस्था के लिए एक बड़ा संकेत है। यह न सिर्फ ऐप आधारित कंपनियों की नीतियों पर सवाल खड़े करती है, बल्कि सरकार के लिए भी एक चेतावनी है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों की समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत और समझौते से यह गतिरोध टूटता है या यात्रियों को लंबी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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