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नए साल के आगाज़ के साथ जनवरी 2026 के मध्य पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत

जनवरी 2026 के मध्य पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 3, 2026 11:47 पूर्वाह्न
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2026 के आगमन के साथ भारतीय रेलवे ने यात्रियों को उपहार-बहुप्रतीक्षित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन अब पटरी पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह ट्रेन न केवल भारतीय रेल के आधुनिकीकरण का प्रतीक है बल्कि लंबी दूरी की रात भर की यात्रा को एक नया आयाम देने जा रही है।

शुभारंभ 

​रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का उद्घाटन जनवरी 2026 के मध्य में किया जाएगा।

  • ​उद्घाटन की संभावित तिथि -17 से 19 जनवरी 2026 के बीच इस ट्रेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
  • ​वंदे भारत स्लीपर ट्रेन रूट -यह ट्रेन हावड़ा (कोलकाता) और कामाख्या/गुवाहाटी (असम) के बीच चलेगी।
  • ​समय 

यह एक ओवरनाइट (रात भर चलने वाली) ट्रेन होगी। यह शाम को प्रस्थान करेगी और अगली सुबह अपने गंतव्य पर पहुँचेगी।

कोच और क्षमता

​इस ट्रेन को लंबी दूरी की यात्रा के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है। इसमें कुल 16 कोच होंगे जिनमें यात्रियों की कुल क्षमता 823 है।

कोच का प्रकार संख्या यात्रियों की क्षमता 

  • AC 3-Tier 11 कोच 611 सीटें/बर्थ
  • AC 2-Tier 04 कोच 188 सीटें/बर्थ
  • AC First Class 01 कोच 24 सीटें/बर्थ
  • कुल कोच 16-  823 सीटें/बर्थ

किराया संरचना (Fare Structure)

​सरकार ने इसका किराया मध्यम वर्ग को ध्यान में रखते हुए हवाई यात्रा की तुलना में काफी कम रखा है। किराए में कैटरिंग (भोजन) का शुल्क भी शामिल है।

  • ​AC 3-Tier-  ₹2,300 के लगभग
  • ​AC 2-Tier-  ₹3,000 के लगभग
  • ​AC First Class- ₹3,600 के लगभग

नोट-  इस रूट पर हवाई जहाज का किराया अक्सर ₹6,000 से ₹10,000 के बीच रहता है जिसके मुकाबले यह एक किफायती विकल्प है।

आधुनिक सुविधाएं और विशेषताएं

​वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को “विश्व स्तरीय” सुविधाओं से लैस किया गया है ताकि यात्रियों को विमान जैसी सुखद यात्रा का अनुभव हो सके|

  • ​एर्गोनोमिक बर्थ – सोने के लिए बर्थ को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है जिसमें बेहतर कुशनिंग और अतिरिक्त आराम मिलता है।
  • स्वचालित दरवाजे-  कोच के प्रवेश द्वार और अंदर के दरवाजे पूरी तरह से ऑटोमैटिक हैं।
  • ​बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स- ट्रेन में विमान की तरह बायो-वैक्यूम शौचालय लगाए गए हैं। फर्स्ट एसी कोच में गर्म पानी के साथ शॉवर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
  • सुरक्षा (कवच प्रणाली)-  यह ट्रेन भारत की स्वदेशी एंटी-कोलिजन तकनीक ‘कवच’ (Kavach) से लैस है  जो दो ट्रेनों की टक्कर को रोकती है।
  • क्षेत्रीय व्यंजन-  ट्रेन में परोसा जाने वाला भोजन रूट के अनुसार होगा। कोलकाता से चलने पर बंगाली और गुवाहाटी से चलने पर असमिया व्यंजन परोसे जाएंगे।
  • ​कम शोर और कंपन-  उन्नत सस्पेंशन सिस्टम के कारण 160-180 किमी/घंटा की रफ्तार पर भी ट्रेन के अंदर कंपन और शोर न के बराबर होता है।
  • ​दिव्यांग अनुकूल-  विकलांग यात्रियों के लिए विशेष शौचालय और रैंप की व्यवस्था की गई है।
  • ​सेंसर-आधारित लाइटिंग-  कोच के अंदर सॉफ्ट नाइट लाइटिंग और रीडिंग लाइट्स दी गई हैं।

तकनीकी क्षमता और रफ्तार

  • अधिकतम गति -ट्रायल के दौरान इस ट्रेन ने 180 किमी/घंटा की रफ्तार को सफलतापूर्वक छुआ है।
  • ​परिचालन गति -सुरक्षा कारणों से इसे ट्रैक की स्थिति के अनुसार 130 किमी/घंटा की औसत गति पर चलाया जाएगा।
  • ​निर्माण-इसका निर्माण बेंगलुरु स्थित BEML (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड) और ICF चेन्नई के सहयोग से किया गया है।

भविष्य की योजना

​रेल मंत्री के अनुसार साल 2026 के अंत तक ऐसी कुल 12 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें ट्रैक पर उतारने का लक्ष्य है। अगले 6 महीनों में 8 और नई ट्रेनें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-बेंगलुरु जैसे प्रमुख मार्गों पर शुरू की जा सकती हैं।

​यह ट्रेन न केवल पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी को बंगाल से मजबूत करेगी बल्कि भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत भी करेगी।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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