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दिल्ली में बदलेगी ई-रिक्शा व्यवस्था सरकार ला रही नई नीति ट्रैफिक और सुरक्षा दोनों पर होगा फोकस

दिल्ली में बदलेगी ई-रिक्शा व्यवस्था सरकार ला रही नई नीति ट्रैफिक और सुरक्षा दोनों पर होगा फोकस
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 10, 2026 1:15 अपराह्न
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डेलीबार्ता,नई दिल्ली रिपोर्ट-दिल्ली की सड़कों पर रोज़ाना लाखों लोग ई-रिक्शा के ज़रिये अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। मेट्रो स्टेशन से कॉलोनी तक, बाज़ार से घर तक और बस स्टैंड से मोहल्लों तक ई-रिक्शा आज राजधानी की लास्ट माइल कनेक्टिविटी का सबसे अहम साधन बन चुका है। लेकिन इसी के साथ ई-रिक्शा चालकों की मनमानी, अव्यवस्थित संचालन और ट्रैफिक जाम की समस्या भी लगातार बढ़ती जा रही है।

अब इन समस्याओं पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार एक नई ई-रिक्शा पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। इस नीति का उद्देश्य ई-रिक्शा को व्यवस्थित करना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है।

ई-रिक्शा- सुविधा भी, चुनौती भी

पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में ई-रिक्शा की संख्या में तेज़ी से इजाफा हुआ है। कम किराया, आसानी से उपलब्धता और संकरी गलियों में पहुंचने की क्षमता के कारण ई-रिक्शा आम जनता की पहली पसंद बन गया है।

हालांकि, यह सुविधा अब ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। कई इलाकों में ई-रिक्शा बिना किसी तय रूट के चलते हैं, कहीं भी सवारी बैठा लेते हैं और सड़क के बीचों-बीच खड़े हो जाते हैं, जिससे जाम की स्थिति बनती है।

क्यों ज़रूरी हो गई ई-रिक्शा नीति?

परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ई-रिक्शा को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता। यह न केवल लाखों लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरत बन चुका है, बल्कि इससे हजारों परिवारों की आजीविका भी जुड़ी हुई है।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ई-रिक्शा को पूरी तरह प्रतिबंधित किए बिना, उन्हें रेगुलेट किया जाए। इसी सोच के साथ दिल्ली सरकार एक ऐसी नीति लाने जा रही है, जिसमें संतुलन बनाते हुए ट्रैफिक व्यवस्था और रोजगार दोनों को सुरक्षित रखा जाएगा।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति के साथ आएगी ई-रिक्शा पॉलिसी

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित ई-रिक्शा नीति को दिल्ली की इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी के साथ ही लागू किया जा सकता है। चूंकि ई-रिक्शा इलेक्ट्रिक वाहनों की श्रेणी में आते हैं, इसलिए दोनों नीतियों को आपस में जोड़ा जाएगा।

इससे जहां प्रदूषण कम करने के सरकार के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी, वहीं ई-रिक्शा संचालन को भी एक स्पष्ट दिशा मिलेगी।

236 सड़कों पर पहले से है प्रतिबंध

फिलहाल दिल्ली के 236 प्रमुख सड़कों पर ई-रिक्शा के संचालन पर पहले से ही पाबंदी लगी हुई है। इसके बावजूद कई जगहों पर नियमों का उल्लंघन देखने को मिलता है।

नई नीति में इन प्रतिबंधों को और स्पष्ट किया जाएगा, ताकि ई-रिक्शा चालक यह जान सकें कि उन्हें किन सड़कों पर चलने की अनुमति है और किन पर नहीं।

दिल्ली में कितने ई-रिक्शा है पंजीकृत?

दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक राजधानी में 2,04,131 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। यह आंकड़ा केवल रजिस्टर्ड ई-रिक्शा का है, जबकि अनौपचारिक रूप से चल रहे ई-रिक्शा की संख्या इससे कहीं अधिक मानी जा रही है।

आरटीओ के अनुसार ई-रिक्शा का वितरण:

  • रोहिणी आरटीओ: 46,150
  • वजीरपुर आरटीओ: 30,252
  • लोनी रोड आरटीओ: 28,858
  • जनकपुरी आरटीओ: 26,661
  • आईपी स्टेट आरटीओ: 94

यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि कुछ इलाकों में ई-रिक्शा की संख्या जरूरत से कहीं ज्यादा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में इनकी भारी कमी है।

रूट्स रेशनलाइजेशन पर जोर

नई ई-रिक्शा नीति का सबसे अहम हिस्सा होगा रूट्स रेशनलाइजेशन। इसका मतलब है कि हर इलाके और हर रूट पर ई-रिक्शा की एक तय संख्या होगी।

अधिकारियों का कहना है कि इससे:

  • ट्रैफिक जाम में कमी आएगी
  • ई-रिक्शा की अनावश्यक भीड़ नहीं होगी
  • यात्रियों को बेहतर सेवा मिलेगी

हर रूट पर कितने ई-रिक्शा चलेंगे, यह ट्रैफिक घनत्व और यात्रियों की जरूरत के अनुसार तय किया जाएगा।

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी होगा मजबूत

ई-रिक्शा चालकों की एक बड़ी समस्या चार्जिंग की भी है। कई जगहों पर अवैध चार्जिंग पॉइंट्स बने हुए हैं, जो आग और करंट लगने जैसी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।

नई नीति में:

  • अधिकृत चार्जिंग स्टेशन
  • सुरक्षित बिजली कनेक्शन
  • सार्वजनिक चार्जिंग हब

जैसी सुविधाओं को बढ़ावा देने का प्रस्ताव है।

स्टैंड और पार्किंग की समस्या का समाधान

अक्सर देखा जाता है कि ई-रिक्शा सड़क किनारे या चौराहों पर खड़े रहते हैं, जिससे ट्रैफिक बाधित होता है।

नई नीति के तहत:

  • ई-रिक्शा के लिए तय स्टैंड
  • अलग पार्किंग ज़ोन
  • नो-पार्किंग इलाकों में सख्ती

जैसे प्रावधान किए जा सकते हैं।

यात्रियों की सुरक्षा होगी प्राथमिकता

सरकार इस नीति में यात्रियों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखेगी। इसके तहत:

  • चालकों का सत्यापन
  • वाहन की फिटनेस जांच
  • स्पीड लिमिट
  • सवारी क्षमता तय

जैसे नियम शामिल हो सकते हैं।

बिना पंजीकरण वाले ई-रिक्शा को मिलेगा मौका

सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि जो ई-रिक्शा बिना पंजीकरण के चल रहे हैं, उन्हें एक निर्धारित समय सीमा दी जाए, ताकि वे अपना रजिस्ट्रेशन करा सकें।

इससे

  • अवैध संचालन पर रोक लगेगी
  • चालकों की रोज़ी-रोटी भी सुरक्षित रहेगी
  • सरकार के पास सही डेटा उपलब्ध होगा

मुख्यमंत्री ने दिए संकेत

रविवार को बस लॉन्च कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी ई-रिक्शा नीति लाने के संकेत दिए थे। उनके बयान से साफ है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है और जल्द ही इस पर ठोस फैसला लिया जा सकता है।

  • निष्कर्ष: व्यवस्था और रोजगार में संतुलन की कोशिश
  • दिल्ली सरकार की प्रस्तावित ई-रिक्शा नीति एक ऐसा कदम माना जा रहा है, जो राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के साथ-साथ हजारों ई-रिक्शा चालकों की आजीविका को भी सुरक्षित रखने की कोशिश करेगा।

अगर यह नीति सही तरीके से लागू होती है, तो ई-रिक्शा न केवल लास्ट माइल कनेक्टिविटी का भरोसेमंद साधन बनेंगे, बल्कि दिल्ली की सड़कों पर अनुशासन और सुरक्षा भी बढ़ेगी।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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