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पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक बनाने की तैयारी दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी 2.0 पर बड़ा प्रस्ताव

पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक बनाने की तैयारी दिल्ली सरकार की नई EV पॉलिसी 2.0 पर बड़ा प्रस्ताव
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 24, 2026 3:01 अपराह्न
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डेलीबार्ता,दिल्ली। दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते प्रदूषण और ईंधन पर निर्भरता को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) को तेजी से बढ़ावा देने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में अब सरकार एक नए और अहम प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत पुरानी पेट्रोल–डीजल गाड़ियों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों में बदलने (रेट्रोफिटिंग) पर सब्सिडी देने की योजना बनाई जा रही है। इसका मकसद न केवल प्रदूषण घटाना है, बल्कि मिडल क्लास और आम लोगों को ईवी अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।

क्या है रेट्रोफिटिंग का कॉन्सेप्ट?

रेट्रोफिटिंग का मतलब है किसी पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी के इंजन और उससे जुड़े सिस्टम को हटाकर उसमें इलेक्ट्रिक मोटर, बैटरी और जरूरी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम लगाना। इस प्रक्रिया से वही पुरानी गाड़ी एक इलेक्ट्रिक वाहन में बदल जाती है।

वर्तमान में भारत में यह तकनीक उपलब्ध तो है, लेकिन अभी बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा, क्योंकि इसकी लागत काफी ज्यादा है।

रेट्रोफिटिंग में कितना आता है खर्च?

विशेषज्ञों और कंपनियों के अनुसार, किसी भी पुरानी कार को इलेक्ट्रिक में बदलने में औसतन 2 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आता है। इसमें बैटरी, मोटर, कंट्रोल यूनिट, चार्जिंग सिस्टम और फिटमेंट की लागत शामिल होती है। यही वजह है कि अब तक आम लोग इस विकल्प से दूरी बनाए हुए थे।

पहली 1000 कारों को मिलेगा इंसेंटिव

दिल्ली सरकार इस समस्या को समझते हुए एक खास प्रस्ताव लेकर आई है। सरकार का विचार है कि पहली 1000 पुरानी कारों को EV में बदलने पर सब्सिडी या इंसेंटिव दिया जाए।

इससे एक तरफ जहां लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ इस तकनीक को बढ़ावा मिलेगा और भविष्य में इसकी लागत भी कम हो सकती है।

R&D में निवेश का भी प्रस्ताव

सरकार केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं रहना चाहती। योजना यह भी है कि रेट्रोफिटिंग टेक्नोलॉजी के रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) में निवेश किया जाए।

इसका उद्देश्य यह है कि पुरानी गाड़ियों को कबाड़ में भेजने के बजाय उन्हें इलेक्ट्रिक में बदला जाए, जिससे संसाधनों की बचत होगी और पर्यावरण पर बोझ भी कम पड़ेगा।

ईवी खरीद पर मिडल क्लास को राहत देने की तैयारी

दिल्ली सरकार का साफ मानना है कि इलेक्ट्रिक गाड़ियां अभी भी आम लोगों के लिए महंगी हैं। मिडल क्लास और लोअर मिडल क्लास के लिए EV खरीदना आसान नहीं है, खासकर तब जब ऑटो लोन की ब्याज दरें भी ज्यादा हों।

इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ईवी खरीद के लिए लिए जाने वाले लोन पर 5% तक की सब्सिडी देने पर भी विचार कर रही है।अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो ईवी खरीदने वालों की मासिक EMI काफी कम हो सकती है।

सस्ती EV पर ही मिलेगी सब्सिडी

सरकार की नीति साफ है कि सब्सिडी का लाभ उन्हीं लोगों तक पहुंचे, जिन्हें इसकी वास्तव में जरूरत है।इसीलिए प्रस्ताव है कि 25 लाख रुपये से कम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों पर ही सब्सिडी दी जाए।

अधिकतम सब्सिडी,1.5 लाख रुपये तक लाभार्थी होगें पहली 25,000 इलेक्ट्रिक कारें| सरकार का मानना है कि जो लोग 25 लाख रुपये या उससे ज्यादा कीमत की कार खरीद सकते हैं, उन्हें सरकारी सब्सिडी की जरूरत नहीं है।

महंगी कारों को सब्सिडी से बाहर रखने का कारण

दिल्ली सरकार का तर्क है कि सरकारी धन का इस्तेमाल सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन के लिए होना चाहिए।

यदि महंगी लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों को भी सब्सिडी दी जाएगी, तो इसका लाभ सीमित वर्ग तक ही रहेगा। इसलिए नीति को जरूरत आधारित और न्यायसंगत बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • इलेक्ट्रिक बाइकों पर ₹30,000 तक सब्सिडी-कारों के साथ-साथ सरकार दोपहिया वाहनों पर भी बड़ा फोकस कर रही है, क्योंकि शहर में सबसे ज्यादा प्रदूषण और ट्रैफिक में दोपहिया वाहनों की संख्या अधिक है।
  • प्रस्ताव के अनुसार-1 लाख इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों को ₹30,000 तक की सब्सिडी दी जा सकती है। इससे खासतौर पर डिलीवरी बॉय, ऑफिस जाने वाले युवा और कम आय वर्ग को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।
  • जरूरतमंदों को प्राथमिकता-सरकार की कोशिश है कि EV पॉलिसी का लाभ सही लोगों तक पहुंचे। इसलिए सब्सिडी योजनाओं को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि मिडल क्लास को सीधा फायदा मिले,रोजमर्रा के उपयोग वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जाए। प्रदूषण कम करने में वास्तविक असर दिखे।
  • परिवहन मंत्री ने की स्टेकहोल्डर्स से चर्चा-दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने हाल ही में EV पॉलिसी 2.0 को लेकर विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ बैठक की। इस बैठक में EV निर्माता कंपनियां,रेट्रोफिटिंग से जुड़ी फर्म,फाइनेंस और ऑटो लोन सेक्टर, पर्यावरण विशेषज्ञ शामिल हुए और सभी ने अपने सुझाव सरकार के सामने रखे।
  • अगले सप्ताह सीएम करेंगी समीक्षा बैठक-सूत्रों के मुताबिक, अगले सप्ताह खुद मुख्यमंत्री EV पॉलिसी 2.0 को लेकर समीक्षा बैठक करेंगी।इस बैठक के बाद पॉलिसी को अंतिम रूप दिया जा सकता है और फिर इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

दिल्ली में EV को बढ़ावा क्यों जरूरी?

दिल्ली लंबे समय से वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। पेट्रोल और डीजल वाहनों से निकलने वाला धुआं शहर की हवा को जहरीला बना रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण कम करते हैं,ईंधन आयात पर निर्भरता घटाते हैं,लोगों के परिवहन खर्च को कम करते हैं।

क्या बदलेगी दिल्ली की सड़कों की तस्वीर?

अगर रेट्रोफिटिंग, सस्ती EV पर सब्सिडी और लोन पर राहत जैसे प्रस्ताव लागू होते हैं, तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की सड़कों पर इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि आम आदमी के लिए भी परिवहन को सस्ता और टिकाऊ बनाएगा।

दिल्ली सरकार का ‌स्पष्ट फोकस

दिल्ली सरकार की EV पॉलिसी 2.0 का फोकस साफ है कि प्रदूषण कम करना, मिडल क्लास को राहत देना और इलेक्ट्रिक वाहनों को जन-जन तक पहुंचाना।

पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक में बदलने पर सब्सिडी, सस्ती EV पर इंसेंटिव और दोपहिया वाहनों को प्रोत्साहन जैसे कदम अगर जमीन पर उतरते हैं, तो यह राजधानी के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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