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ब्रिटेन की सियासत में भूचाल..क्या खतरे में है पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी?

ब्रिटेन की सियासत में भूचाल..क्या खतरे में है पीएम कीर स्टार्मर की कुर्सी?
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 10, 2026 3:04 अपराह्न
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डेलीबार्ता,दुनियां। एपस्टीन से जुड़ी फाइलों के सार्वजनिक होने के बाद दुनिया की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। अमेरिका से लेकर यूरोप तक कई बड़े नेताओं और प्रभावशाली हस्तियों के नाम सामने आने के बाद लगातार इस्तीफों और जांच की मांग का दौर जारी है। इसी कड़ी में अब ब्रिटेन की राजनीति भी इसकी चपेट में आ गई है। हालात ऐसे बनते नजर आ रहे हैं कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी पर भी खतरा मंडराने लगा है।

हालांकि प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर खुद यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी कभी जेफरी एपस्टीन से कोई मुलाकात नहीं हुई, लेकिन एपस्टीन से जुड़े वैश्विक नेटवर्क के उजागर होने के बाद उनकी सरकार के कई फैसले सवालों के घेरे में आ गए हैं। खासतौर पर पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर लेबर पार्टी के भीतर ही तीखा विरोध देखने को मिल रहा है।

एपस्टीन फाइल्स और ब्रिटेन का शाही परिवार भी कटघरे में

एपस्टीन फाइल्स सामने आने के बाद ब्रिटेन का शाही परिवार भी विवादों से अछूता नहीं रहा। शाही परिवार के सदस्य और पूर्व प्रिंस, एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर पहले ही एपस्टीन से कथित संबंधों को लेकर सवालों के घेरे में हैं। इन खुलासों ने ब्रिटेन की प्रतिष्ठा और राजनीति दोनों पर असर डाला है।

इसी क्रम में वाशिंगटन में ब्रिटेन के राजदूत पीटर मैंडेलसन को पद से हटाया गया। आरोप है कि मैंडेलसन ने जेफरी एपस्टीन से अपने संबंधों को लेकर कई बार गलत जानकारी दी। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने खुद सामने आकर एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगी और स्वीकार किया कि मैंडेलसन ने एपस्टीन के साथ अपने रिश्तों को कमतर दिखाने की कोशिश की थी।

लेबर पार्टी के भीतर बढ़ता दबाव

पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर कीर स्टार्मर को अपनी ही पार्टी के भीतर भारी दबाव का सामना करना पड़ा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि एपस्टीन जैसे विवादित व्यक्ति से जुड़े शख्स को इतनी अहम जिम्मेदारी सौंपना पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला कदम था।

हाल में जारी दस्तावेजों में एपस्टीन और मैंडेलसन के रिश्तों की नजदीकियां सामने आने के बाद यह मामला और गंभीर हो गया। इन खुलासों ने लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को हवा दे दी है।

क्या बदल सकता है ब्रिटेन का प्रधानमंत्री?

राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल तेज़ी से उठने लगा है कि क्या कीर स्टार्मर को पद छोड़ना पड़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो ब्रिटेन को नया प्रधानमंत्री मिल सकता है। इसी बीच एक नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है शबाना महमूद।

अगर शबाना महमूद प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वह ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री होंगी। यही वजह है कि न केवल ब्रिटेन, बल्कि दुनिया भर में उनके नाम को लेकर दिलचस्पी बढ़ती जा रही है।

कौन हैं शबाना महमूद?

शबाना महमूद लेबर पार्टी की वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता मानी जाती हैं। वर्तमान में वह प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की करीबी सहयोगियों में से एक हैं। 45 वर्षीय शबाना पेशे से वकील और अनुभवी राजनेता हैं।

पार्टी के भीतर उन्हें एक प्रभावशाली वक्ता और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है। वह लेबर पार्टी के दक्षिणपंथी धड़े में एक मजबूत और महत्वाकांक्षी नेता के रूप में उभरी हैं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि और शिक्षा

शबाना महमूद का जन्म इंग्लैंड के बर्मिंघम शहर में हुआ। उनके माता-पिता जुबैदा और महमूद अहमद की जड़ें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मीरपुर क्षेत्र से जुड़ी रही हैं। एक प्रवासी परिवार से आने के बावजूद शबाना ने ब्रिटेन की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।

उन्होंने वर्ष 2002 में लिंकन कॉलेज, ऑक्सफोर्ड से कानून की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने इन्स ऑफ कोर्ट स्कूल ऑफ लॉ से बार वोकेशनल कोर्स किया और 2003 में बैरिस्टर बनीं। कानून की मजबूत समझ ने उनके राजनीतिक करियर को भी मजबूती दी।

संसद से मंत्रालय तक का सफर

वर्ष 2010 में शबाना महमूद ने इतिहास रचते हुए ब्रिटेन की संसद में प्रवेश किया। वह रुशनारा अली और यास्मीन क़ुरैशी के साथ ब्रिटेन की पहली महिला मुस्लिम सांसदों में शामिल रहीं।

इसके बाद उन्होंने पार्टी में लगातार महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 2025 में गृह विभाग से जुड़े कार्यालय में प्रवेश के बाद उन्हें यूके की सीमा सुरक्षा और आव्रजन प्रबंधन से जुड़े अहम दायित्व सौंपे गए। इस भूमिका में उनके प्रशासनिक कौशल और निर्णय क्षमता की सराहना हुई।

पीएम पद की रेस में क्यों आगे हैं शबाना महमूद?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शबाना महमूद की सबसे बड़ी ताकत उनका संतुलित दृष्टिकोण है। वह पार्टी के भीतर विभिन्न गुटों को साथ लेकर चलने की क्षमता रखती हैं। साथ ही उनका कानूनी अनुभव उन्हें जटिल मामलों में मजबूत दावेदार बनाता है।

इसके अलावा, विविधता और समावेशिता के मुद्दे पर उनका नेतृत्व लेबर पार्टी की छवि को और मजबूत कर सकता है। यही कारण है कि मौजूदा हालात में उन्हें पीएम पद का सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है।

पीएम पद की रेस में और कौन-कौन शामिल?

शबाना महमूद के अलावा भी कई बड़े नाम इस दौड़ में शामिल हैं।

  • एंजेला रेनर-पूर्व डिप्टी प्रधानमंत्री एंजेला रेनर को भी एक मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि घर खरीद से जुड़े कर मामले में जांच और इस्तीफे के बावजूद वह पार्टी के वामपंथी गुट की पसंदीदा नेता बनी हुई हैं। एपस्टीन से जुड़े मुद्दे पर सरकार को यू-टर्न लेने के लिए मजबूर करने में उनकी अहम भूमिका रही है।
  • वेस स्ट्रीटिंग-स्वास्थ्य सचिव वेस स्ट्रीटिंग को महत्वाकांक्षी नेता माना जाता है। मीडिया में उनकी अच्छी पकड़ है, लेकिन एनएचएस में निजी क्षेत्र की भागीदारी के समर्थन और पीटर मैंडेलसन से नजदीकी के कारण पार्टी के वामपंथी गुट में उन्हें लेकर असंतोष है।
  • एड मिलिबैंड-ऊर्जा सचिव और लेबर पार्टी के पूर्व नेता एड मिलिबैंड भी इस रेस में शामिल हैं। अनुभव और अंतरराष्ट्रीय पहचान उनके पक्ष में जाती है।
  • एंडी बर्नहैम-ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर एंडी बर्नहैम को भी संभावित उम्मीदवारों में गिना जा रहा है, जिनकी जमीनी राजनीति में मजबूत पकड़ मानी जाती है।

एपस्टीन फाइल्स ने ब्रिटेन की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में शबाना महमूद का नाम तेजी से उभर रहा है। अगर परिस्थितियां बदलीं और नेतृत्व परिवर्तन हुआ, तो शबाना महमूद न केवल ब्रिटेन की राजनीति में इतिहास रच सकती हैं, बल्कि देश को पहली मुस्लिम महिला प्रधानमंत्री भी मिल सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ब्रिटेन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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