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ब्रिटेन राष्ट्रपति 8 साल बाद चीन पहुंचे कई अनुबंधों की संभावना

ब्रिटेन राष्ट्रपति 8 साल बाद चीन पहुंचे कई अनुबंधों की संभावना
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 29, 2026 6:48 अपराह्न
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (Keir Starmer) की हालिया चीन यात्रा अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से एक ऐतिहासिक मोड़ है। 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी ब्रिटिश प्रधानमंत्री का बीजिंग पहुंचना न केवल कूटनीतिक ‘रीसेट’ का संकेत है, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में ब्रिटेन की नई प्राथमिकताओं को भी दर्शाता है।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री की चीन यात्रा –  8 साल बाद वापसी

ब्रिटेन और चीन के बीच संबंधों में पिछले एक दशक में काफी उतार-चढ़ाव आए हैं। 2015 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डेविड कैमूरन ने दोनों देशों के बीच संबंधों के ‘स्वर्ण युग’ (Golden Era) की घोषणा की थी। हालांकि, हॉन्गकॉन्ग में सुरक्षा कानून, शिनजियांग में मानवाधिकारों के मुद्दे और जासूसी के आरोपों के कारण रिश्ते ‘शीत युद्ध’ जैसी स्थिति में पहुंच गए थे।

  • पिछली यात्रा – 2018 में थेरेसा मे अंतिम ब्रिटिश प्रधानमंत्री थीं जिन्होंने चीन का दौरा किया था।
  • वर्तमान संदर्भ –  कीर स्टार्मर 28 से 31 जनवरी, 2026 तक चीन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यह यात्रा लेबर पार्टी की उस नीति का हिस्सा है जिसे वे “यथार्थवादी और व्यावहारिक जुड़ाव” (Realistic and Pragmatic Engagement) कह रहे हैं।

 यात्रा का मुख्य एजेंडा और प्रतिनिधिमंडल

स्टार्मर के साथ 50 से अधिक प्रमुख ब्रिटिश कंपनियों के सीईओ और सांस्कृतिक संगठनों का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल गया है। इसमें वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और रचनात्मक उद्योगों के दिग्गज शामिल हैं।

प्रमुख बैठकें –  स्टार्मर ने बीजिंग के ‘ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल’ में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री ली कियांग से मुलाकात की। इसके बाद वे व्यापारिक चर्चाओं के लिए शंघाई भी जाएंगे।

प्रमुख अनुबंध और समझौतों की संभावना 

इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है:

1 – आर्थिक और वित्तीय सहयोग

ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था वर्तमान में धीमी विकास दर से जूझ रही है। चीन ब्रिटेन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।

  • वित्तीय सेवाएं – लंदन के वित्तीय केंद्र (The City of London) की चीनी बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के लिए समझौते।
  • निवेश –  हरित ऊर्जा (Green Energy) और बुनियादी ढांचे में चीनी निवेश को फिर से सक्रिय करना, लेकिन सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा जांच के साथ।

2 –  जलवायु परिवर्तन और हरित तकनीक

दोनों देशों ने वैश्विक कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए सहयोग पर सहमति जताई है।

  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV) – चीनी बैटरी तकनीक और ब्रिटिश ऑटोमोटिव डिजाइन के बीच तालमेल बिठाने पर चर्चा।
  • नवीकरणीय ऊर्जा – अपतटीय पवन ऊर्जा (Offshore Wind) के क्षेत्र में तकनीकी साझाकरण।

3 – सुरक्षा और प्रवासन

एक चौंकाने वाला लेकिन महत्वपूर्ण समझौता ‘छोटी नावों’ (Small Boats) के माध्यम से होने वाले अवैध प्रवासन की सप्लाई चेन को तोड़ने पर हुआ है। ब्रिटेन ने चीनी अधिकारियों के साथ अवैध प्रवासन गिरोहों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा सहयोग की बात की है।

4 –  शिक्षा और संस्कृति

ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों (जैसे नेशनल थिएटर) ने चीन के साथ छात्रों के आदान-प्रदान और अनुसंधान सहयोग के लिए कई समझौतों पर चर्चा की है।

भू-राजनीतिक महत्व –  अमेरिका बनाम चीन

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति फिर से ‘प्रशुल्क’ (Tariffs) और संरक्षणवाद की ओर मुड़ रही है।

  • ब्रिटेन की मजबूरी –  अमेरिका के साथ तनावपूर्ण व्यापारिक संबंधों और ‘ब्रेक्सिट’ के बाद के आर्थिक दबाव के कारण ब्रिटेन के लिए चीन के साथ व्यापार बढ़ाना अनिवार्य हो गया है।
  • एक नई राह – कनाडा, फिनलैंड और जर्मनी के नेताओं की चीन यात्रा के बाद स्टार्मर की यह यात्रा दिखाती है कि पश्चिमी देश अब अमेरिका की ‘चीन से पूर्ण अलगाव’ (Decoupling) की नीति के बजाय ‘जोखिम कम करने’ (De-risking) की नीति अपना रहे हैं।

चुनौतियाँ और आलोचना

इस यात्रा को लेकर स्टार्मर को घरेलू स्तर पर आलोचना का भी सामना करना पड़ रहा है-

  • मानवाधिकार –  विपक्षी नेताओं (जैसे प्रीति पटेल) ने आरोप लगाया है कि स्टार्मर अर्थव्यवस्था के लिए मानवाधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ समझौता कर रहे हैं।
  • सुरक्षा जोखिम – चीनी जासूसी और तकनीकी चोरी के डर के बीच ‘हुआवेई’ (Huawei) जैसे पुराने विवादों की छाया अभी भी बनी हुई है।

क्या यह नया ‘स्वर्ण युग’ है?

कीर स्टार्मर ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया ‘स्वर्ण युग’ नहीं है, बल्कि एक “सुसंगत, टिकाऊ और सम्मानजनक” संबंध बनाने की कोशिश है। ब्रिटेन का लक्ष्य चीन के साथ वहां सहयोग करना है जहां संभव हो (जैसे व्यापार, जलवायु) और वहां चुनौती देना है जहां आवश्यक हो (जैसे सुरक्षा, मानवाधिकार)।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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