दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में चीन की राजधानी बीजिंग में क्वाड QUAD देशों के राजदूतों की एक ऐतिहासिक और दुर्लभ बैठक हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है।
बीजिंग बैठक एक कूटनीतिक संदेश
दिसंबर 2025 को बीजिंग स्थित अमेरिकी दूतावास में क्वाड देशों के राजदूतों की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की मेजबानी चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू David Perdue ने की। इसमें भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत और ऑस्ट्रेलिया व जापान के राजदूतों ने शिरकत की।
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बैठक का मुख्य उद्देश्य
बीजिंग जैसी जगह पर जो चीन का शक्ति केंद्र है वहां क्वाड राजदूतों का सार्वजनिक रूप से मिलना एक स्पष्ट संदेश था। राजदूत परड्यू ने सोशल मीडिया पर इस बैठक की तस्वीर साझा करते हुए कहा कि क्वाड एक Force for Good भलाई के लिए एक शक्ति है और यह साझेदारी एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए प्रतिबद्ध है।
चर्चा के प्रमुख मुद्दे और कार्यसूची
इस उच्च-स्तरीय बैठक में केवल सुरक्षा ही नहीं बल्कि वैश्विक चुनौतियों के विस्तृत स्पेक्ट्रम पर चर्चा हुई। प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित थे-
- समुद्री सुरक्षा और चीन की आक्रामकता-बैठक के दौरान दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई गई। विशेष रूप से चीन द्वारा ताइवान के पास चलाए जा रहे सैन्य अभ्यास Justice Mission 2025 के संदर्भ में चर्चा हुई। क्वाड देशों ने समुद्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता Freedom of Navigation और अंतरराष्ट्रीय कानूनों UNCLOS के पालन पर जोर दिया।
- आतंकवाद और साइबर सुरक्षा-क्वाड ने सीमा पार आतंकवाद की निंदा की और साइबर सुरक्षा के लिए एक साझा बुनियादी ढांचा बनाने पर बात की। डिजिटल स्पेस में चीन और अन्य हैकर्स द्वारा किए जा रहे हमलों से निपटने के लिए क्वाड साइबर चैलेंज जैसे कार्यक्रमों को मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
बुनियादी ढांचा और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain Resilience)
चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव BRI के जवाब में क्वाड देशों ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के विकासशील देशों को पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाले बुनियादी ढांचे के विकल्प प्रदान करने पर सहमति जताई। साथ ही सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने के लिए सप्लाई चेन को विविधतापूर्ण बनाने पर चर्चा हुई।
स्वास्थ्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन
- स्वास्थ्य –क्वाड वैक्सीन पार्टनरशिप को अब एक व्यापक हेल्थ सिक्योरिटी पार्टनरशिप में बदल दिया गया है ताकि भविष्य की महामारियों से निपटा जा सके।
- जलवायु –समुद्री स्तर में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए उपग्रह डेटा साझा करने (Space cooperation) पर सहमति बनी।
क्वाड QUAD सदस्य और पृष्ठभूमि
क्वाड का पूरा नाम चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) है। इसमें चार प्रमुख लोकतांत्रिक देश शामिल हैं|
- भारत – दक्षिण एशिया की प्रमुख शक्ति और इंडो-पैसिफिक का केंद्रीय स्तंभ।
- अमेरिका – वैश्विक महाशक्ति और इस गठबंधन का मुख्य प्रस्तावक।
- जापान – पूर्वी एशिया की तकनीकी और आर्थिक शक्ति।
- ऑस्ट्रेलिया – प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता का प्रमुख साझीदार।
क्वाड का विकास
- 2004 – सुनामी के बाद मानवीय सहायता के लिए यह पहली बार अनौपचारिक रूप से सामने आया।
- 2007 – जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसे औपचारिक रूप दिया।
- 2017 – चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण इसे पुनर्जीवित किया गया।
- 2021- पहली बार शिखर सम्मेलन लीडर्स समिट आयोजित हुआ।
चीन इसकी आलोचना क्यों कर रहा है
चीन शुरू से ही क्वाड को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मानता आया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने अक्सर इसे एशियाई नाटो Asian NATO की संज्ञा दी है। आलोचना के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
- घेराबंदी का डर (Containment Policy)-चीन का मानना है कि अमेरिका भारत जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर उसे समुद्र और कूटनीति दोनों मोर्चों पर घेरने की कोशिश कर रहा है।
- गुटीय राजनीति (Bloc Politics)-चीन की प्रवक्ता माओ निंग के अनुसार क्वाड जैसे समूह कोल्ड वॉर मानसिकता को दर्शाते हैं और क्षेत्र में गुटीय टकराव को बढ़ावा देते हैं।
- समुद्री प्रभुत्व को चुनौती-चीन दक्षिण चीन सागर के लगभग 90% हिस्से पर अपना दावा करता है। क्वाड का स्वतंत्र और खुला इंडो-पैसिफिक का नारा सीधे तौर पर चीन के इन दावों को चुनौती देता है।
- आर्थिक प्रतिस्पर्धा –क्वाड जब वैकल्पिक सप्लाई चेन की बात करता है तो यह चीन के वर्ल्ड फैक्ट्री वाले दर्जे पर प्रहार होता है जिससे चीन की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँच सकता है।
बीजिंग में हुई यह बैठक दर्शाती है कि क्वाड अब केवल कागजी समूह नहीं रह गया है बल्कि यह चीन की नाक के नीचे भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने से नहीं हिचकिचाता। यह गठबंधन अब सुरक्षा से आगे बढ़कर क्षेत्रीय विकास का मंच बन चुका है।
भारत के लिए क्वाड एक ऐसा मंच है जहाँ वह अपनी रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) को बरकरार रखते हुए चीन की आक्रामकता को संतुलित कर सकता है। हालांकि क्वाड के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह सदस्य देशों के बीच के छोटे मतभेदों को भुलाकर कैसे एक ठोस सैन्य और आर्थिक दीवार के रूप में खड़ा होता है।







