पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और रक्षा निर्यात के प्रयासों के केंद्र में JF-17 थंडर (Thunder) फाइटर जेट सबसे महत्वपूर्ण हथियार बनकर उभरा है। पाकिस्तान इस विमान को अपनी लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था के लिए एक लाइफलाइन के रूप में देख रहा है।
वर्तमान में पाकिस्तान न केवल अपनी वायुसेना की जरूरतों को पूरा कर रहा है बल्कि चीन के सहयोग से इसे वैश्विक बाजार में एक सस्ते और प्रभावी विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
किन देशों से संपर्क साध रहा है पाकिस्तान
पाकिस्तान मुख्य रूप से उन विकासशील देशों को निशाना बना रहा है जिनके पास बजट कम है या जिन पर पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका ने प्रतिबंध लगा रखे हैं।
अज़रबैजान (Azerbaijan) – यह पाकिस्तान की सबसे बड़ी सफलता है। हाल ही में 2024-25 में अज़रबैजान ने पाकिस्तान के साथ लगभग 4.6 बिलियन डॉलर का समझौता किया है जिसमें 40 के करीब JF-17 ब्लॉक-III विमान शामिल हैं।
बांग्लादेश (Bangladesh) – जनवरी 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार बांग्लादेश की वायुसेना और पाकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता चल रही है। बांग्लादेश पोटेंशियल इंटरेस्ट संभावित रुचि दिखा रहा है।
इराक (Iraq) – इराक के साथ 12 विमानों के लिए लगभग 664 मिलियन डॉलर का सौदा अंतिम चरण में माना जा रहा है।
अफ्रीकी देश – पाकिस्तान ने नाइजीरिया को पहले ही विमान बेचे हैं। अब वह जिम्बाब्वे मोरक्को और सूडान जैसे देशों से भी संपर्क में है।
दक्षिण-पूर्व एशिया – पाकिस्तान ने पूर्व में म्यांमार को ये विमान बेचे थे हालांकि वहां कुछ तकनीकी खामियों की खबरें आई थीं। अब वह मलेशिया जैसे देशों को लुभाने की कोशिश कर रहा है।
ISRO के लिये DDU के 5 स्टूडेंट्स का चयन, अखिल भारतीय तकनीकी सम्मेलन 2025 में होगें शामिल
पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख और उनके दौरे
पाकिस्तान के आर्मी चीफ (COAS) और एयर चीफ सीधे तौर पर हथियार विक्रेता (Salesmen) की भूमिका निभा रहे हैं।
एयर चीफ मार्शल ज़हीर अहमद बाबर सिद्धू
जनवरी 2026 में बांग्लादेशी वायुसेना प्रमुख हसन महमूद खान के साथ इस्लामाबाद में बैठक की। उन्होंने बांग्लादेश को न केवल जेट बल्कि ट्रेनिंग और मेंटेनेंस का कम्पलीट पैकेज ऑफर किया है।
जनरल असीम मुनीर (आर्मी चीफ)
अज़रबैजान और खाड़ी देशों UAE कतर के अपने दौरों के दौरान जनरल मुनीर ने रक्षा सहयोग और JF-17 के निर्यात पर विशेष जोर दिया है। हाल ही में दुबई एयरशो 2025 में पाकिस्तान ने एक अज्ञात मित्र देश के साथ MoU साइन किया है जिसमें आर्मी चीफ की कूटनीति का बड़ा हाथ बताया जा रहा है।
कब से हो रही है JF-17 बेचने की कोशिश
इस विमान का निर्यात अभियान 2010 के दशक की शुरुआत से ही सक्रिय है। पहला बड़ा एक्सपोर्ट ऑर्डर 2015 में म्यांमार से मिला था। 2019 में भारत के साथ बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने इसे बैटल प्रूवन युद्ध में परखा हुआ बताकर इसकी मार्केटिंग तेज कर दी।
वर्तमान में पाकिस्तान अपनी विदेशी मुद्रा की कमी को पूरा करने के लिए इसे आक्रामक तरीके से बेच रहा है।
NDAA 2026 हिंद महासागर में चीन की घेराबंदी और नई वैश्विक रणनीति
कैसा फाइटर जेट है JF-17 – तकनीकी जानकारी
JF-17 एक हल्का सिंगल-इंजन मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है। यह चौथी पीढ़ी 4th Generation का विमान माना जाता है।
क्षमता – यह हवा से हवा हवा से जमीन और हवा से समुद्र में मार करने वाली मिसाइलें दाग सकता है।
ब्लॉक-III (लेटेस्ट वर्जन) – इसमें AESA रडार (Active Electronically Scanned Array) लगा है जो इसे लंबी दूरी से दुश्मन को पहचानने की शक्ति देता है। इसमें चीन की PL-15 जैसी खतरनाक मिसाइलें लगाई जा सकती हैं।
इंजन – इसमें रूसी मूल का RD-93 इंजन इस्तेमाल होता है चीन अब अपने इंजनों से बदलने की कोशिश कर रहा है।
डिजाइन – इसका डिजाइन काफी हद तक अमेरिकी F-16 से प्रेरित लगता है।
बन कहाँ रहा है और कितनी आती है लागत –यह विमान पाकिस्तान और चीन का एक साझा प्रोजेक्ट है।
उत्पादन – इसका उत्पादन पाकिस्तान के एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) कामरा में होता है। लगभग 58% हिस्सा धड़ पंख टेल पाकिस्तान में बनता है। बाकी 42% चीन (Chengdu Aircraft Industry Group) से आता है।
अंतिम असेंबली पाकिस्तान में ही होती है।
लागत (Price) – इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है।
ब्लॉक-I/II – करीब 25-30 मिलियन डॉलर।
ब्लॉक-III – करीब 35-40 मिलियन डॉलर यह F-16 या राफेल जैसे विमानों के मुकाबले आधे से भी कम दाम पर उपलब्ध है।
पाकिस्तान के लिए महत्व
आर्थिक लाभ
निर्यात से प्राप्त होने वाले डॉलर पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देते हैं।
रणनीतिक लाभ
जिन देशों को यह जेट बेचा जाता है उनके साथ पाकिस्तान के सैन्य संबंध गहरे होते हैं।
चुनौतियां
म्यांमार ने इसके इंजन और रडार में खराबी की शिकायत की थी जिससे इसकी छवि पर असर पड़ा है। इसके अलावा रूसी इंजन के स्पेयर पार्ट्स मिलना अब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कठिन हो गया है।







