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April Ekadashi 2026- जानिए कब रखा जायेगा वरुथिनी एकादशी व्रत तिथि कथा और शुभ मुहूर्त

April Ekadashi 2026- जानिए कब रखा जायेगा वरुथिनी एकादशी व्रत तिथि कथा और शुभ मुहूर्त
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 31, 2026 12:48 अपराह्न
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वरुथिनी एकादशी वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। ‘वरुथिनी’ शब्द संस्कृत के ‘वरुथ’ से बना है जिसका अर्थ है  कवच या रक्षक। मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु अपने भक्त की हर संकट से रक्षा करते हैं और उसे सुख-सौभाग्य का कवच प्रदान करते हैं।

​वरुथिनी एकादशी 2026 –  तिथि और शुभ मुहूर्त

​वर्ष 2026 में वरुथिनी एकादशी 13 अप्रैल, सोमवार को मनाई जाएगी।

  • एकादशी तिथि प्रारंभ – 12 अप्रैल 2026, दोपहर से।
  • एकादशी तिथि समाप्त –  13 अप्रैल 2026, शाम तक।
  • पारण (व्रत तोड़ने) का समय –  14 अप्रैल 2026, प्रातः काल (सूर्योदय के बाद)।
  • विशेष नोट –  हिंदू पंचांग के अनुसार, उदय तिथि की मान्यता के कारण 13 अप्रैल को ही व्रत रखना सर्वश्रेष्ठ है।

वरुथिनी एकादशी का महत्व (धार्मिक पक्ष)

शास्त्रों में वरुथिनी एकादशी का फल कन्यादान के फल के बराबर बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार-

  • ​यह व्रत दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल देता है।
  • ​मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से मनुष्य को दस हजार वर्षों की तपस्या के समान पुण्य प्राप्त होता है।
  • ​राजा मांधाता को इसी एकादशी के प्रभाव से स्वर्ग की प्राप्ति हुई थी।
  • ​यह एकादशी शारीरिक कष्टों और पापों के निवारण के लिए अचूक मानी जाती है।

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​3. पूजा विधि (Step-by-Step)

​भगवान मधुसूदन की कृपा पाने के लिए इस विधि का पालन करें

  • संकल्प –  दशमी की रात्रि से ही मन में सात्विक विचार लाएं। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प करें।
  • वेदी स्थापना – पूजा घर में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • पूजन सामग्री – भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले पुष्प, अक्षत (बिना टूटे चावल), रोली, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें।
  • दीप-धूप –  घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती से वातावरण को सुगंधित करें।
  • भोग – भगवान को फल और मिठाई का भोग लगाएं। याद रखें, विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता अनिवार्य है।
  • कथा और आरती –  वरुथिनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में ‘ॐ जय जगदीश हरे’ की आरती करें।

​क्या करें और क्या न करें (Dos & Don’ts)

क्या करेंक्या न करें
पीले वस्त्र पहनें: यह रंग भगवान विष्णु को अति प्रिय है।चावल का त्याग: एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है।
दान करें: तिल, अन्न, जल या स्वर्ण का दान महापुण्य देता है।क्रोध न करें: मन को शांत रखें और किसी की बुराई न करें।
तुलसी पूजन: शाम को तुलसी के काड़े में घी का दीपक जलाएं।तुलसी न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए (एक दिन पहले तोड़ लें)।
पारण का ध्यान: अगले दिन शुभ मुहूर्त में ही व्रत खोलें।तामसिक भोजन: लहसुन, प्याज या मांस-मदिरा से पूर्णतः दूर रहें।

वरुथिनी एकादशी व्रत कथा (संक्षेप में)

​प्राचीन काल में नर्मदा नदी के तट पर राजा मांधाता राज्य करते थे। वे अत्यंत दानवीर और तपस्वी थे। एक बार जब वे जंगल में तपस्या कर रहे थे तब एक जंगली भालू ने उन पर हमला कर दिया और उनका पैर चबाने लगा। राजा अपनी तपस्या में लीन रहे और हिंसा नहीं की। उन्होंने मन ही मन भगवान विष्णु को याद किया।

​भक्त की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने भालू को मारकर राजा की रक्षा की। हालांकि भालू के कारण राजा का पैर क्षत-विक्षत हो चुका था। भगवान ने राजा से कहा “हे राजन! तुम दुखी न हो। मथुरा जाकर वरुथिनी एकादशी का व्रत करो, मेरे वराह अवतार की पूजा करो। उसके प्रभाव से तुम्हारा शरीर पुनः स्वस्थ हो जाएगा।” राजा ने विधिपूर्वक व्रत किया और वे पहले से भी अधिक सुंदर और बलशाली हो गए।

​ व्रत के लाभ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

  • आध्यात्मिक लाभ – मानसिक शांति और इच्छाशक्ति में वृद्धि।
  • स्वास्थ्य लाभ –  महीने में दो बार उपवास करने से पाचन तंत्र (Digestive System) को आराम मिलता है और शरीर के विषाक्त पदार्थ (Toxins) बाहर निकल जाते हैं।

 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या इस दिन फल खा सकते हैं?

 हाँ यदि आप निर्जला व्रत नहीं कर सकते, तो फलाहार (फल, दूध, कुट्टू का आटा) ले सकते हैं।

पारण में क्या खाना चाहिए?

पारण हमेशा सात्विक भोजन से करना चाहिए। चावल या दाल-चावल से व्रत खोलना शुभ माना जाता है।

वरुथिनी एकादशी का व्रत केवल उपवास मात्र नहीं है बल्कि यह अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का दिन है। यदि आप भक्ति भाव से इस दिन भगवान मधुसूदन की आराधना करते हैं तो आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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