यूरोपीय क्लब फुटबॉल के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित मंच ‘यूईएफए चैंपियंस लीग’ के फाइनल में रविवार की रात इतिहास तो बना, लेकिन एक बेहद दर्दनाक मोड़ के साथ। बुडापेस्ट के ऐतिहासिक पुस्कास एरेना में खेले गए इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मुकाबले में फ्रांस के दिग्गज क्लब पीएसजी (पेरिस सेंट जर्मेन) ने बाजी मारी। पीएसजी ने खिताबी भिड़ंत में आर्सेनल को पेनल्टी शूटआउट के ड्रामे में 4-3 से शिकस्त देकर लगातार दूसरी बार यूरोप के किंग का ताज अपने सिर सजा लिया।
काई हैवर्ट्ज का वो पांचवां मिनट और आर्सेनल का तूफान
मैच की शुरुआत आर्सेनल के लिए किसी खूबसूरत सपने जैसी रही। रेफरी की सीटी बजने के साथ ही आर्सेनल के इरादे साफ दिख रहे थे। खेल के अभी सिर्फ पांच ही मिनट बीते थे कि आर्सेनल के फैंस खुशी से झूम उठे। मिडफील्ड से मिले एक शानदार पास को भांपते हुए स्टार खिलाड़ी काई हैवर्ट्ज ने पीएसजी के डिफेंस को छकाते हुए गेंद को सीधे नेट के अंदर डाल दिया। इस शुरुआती और धमाकेदार गोल ने पुस्कास एरेना में मौजूद आर्सेनल के प्रशंसकों को पूरी तरह से दीवाना कर दिया था।1-0 की बढ़त मिलने के बाद आर्सेनल ने मैच पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने दी। कोच मिकेल आर्टेटा की रणनीति साफ थी—दबाव बनाए रखो लेकिन डिफेंस में कोई ढील मत दो। पहले हाफ में पीएसजी के स्टार फॉरवर्ड्स ने कई बार आर्सेनल के चक्रव्यूह को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन आर्सेनल का डिफेंस दीवार की तरह अडिग रहा।
दूसरे हाफ में डेम्बेले का वार और पीएसजी की वापसी
टूर्नामेंट की डिफेंडिंग चैंपियन पीएसजी इतनी आसानी से हथियार डालने वाली नहीं थी। दूसरे हाफ की शुरुआत होते ही पेरिस के खिलाड़ियों ने अपने खेल की रफ्तार को दोगुना कर दिया। आर्सेनल के बॉक्स के आसपास पीएसजी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा था।मैच के 63वें मिनट में आर्सेनल के डिफेंस से एक छोटी सी चूक हुई और पीएसजी को पेनल्टी मिल गई। इस बड़े मौके पर पूरे स्टेडियम की सांसें थमी हुई थीं। पीएसजी के स्टार फॉरवर्ड उस्मान डेम्बेले गेंद लेकर स्पॉट पर आए। उन्होंने बेहद ठंडे दिमाग से आर्सेनल के गोलकीपर को छकाया और गेंद को गोलपोस्ट के कोने में डाल दिया। स्कोर 1-1 से बराबर हो चुका था और इसी स्कोर पर 90 मिनट का खेल खत्म हुआ।
एक्स्ट्रा टाइम का सस्पेंस और गोलकीपरों की जांबाजी
जब मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम (अतिरिक्त 30 मिनट) में पहुंचा, तो खिलाड़ियों के चेहरों पर थकान साफ देखी जा सकती थी, लेकिन उनका जज्बा कम नहीं हुआ था। इन 30 मिनटों में पीएसजी ने बॉल पजेशन के मामले में अपना दबदबा बनाए रखा और लगातार छोटे-छोटे पास बनाकर आर्सेनल के बॉक्स में सेंध लगाने की कोशिश की।दूसरी तरफ, आर्सेनल की टीम पूरी तरह से काउंटर-अटैक पर निर्भर हो चुकी थी। इस दौरान दोनों टीमों के गोलकीपरों ने कुछ ऐसे हैरतअंगेज और जांबाज बचाव किए कि दर्शकों के मुंह से चीख निकल गई। ऐसा लग रहा था कि गोलपोस्ट के आगे कोई अभेद्य दीवार खड़ी हो। आखिरकार, एक्स्ट्रा टाइम के खत्म होने की सीटी बजी और स्कोरबोर्ड पर अभी भी 1-1 की बराबरी दर्ज थी। अब फैसला भाग्य के खेल यानी शूटआउट से होना था।
शूटआउट का नर्व-रैकिंग ड्रामा और आर्सेनल का बिखराव
पेनल्टी शूटआउट फुटबॉल में किसी लॉटरी से कम नहीं होता, जहाँ हुनर से ज्यादा नसों पर काबू रखना मायने रखता है। पीएसजी के खिलाड़ियों ने इस ‘करो या मरो’ वाले दबाव के क्षणों में गजब का संयम और अनुभव दिखाया। पेरिस की तरफ से पहले चार शॉट बिल्कुल क्लिनिकल और सटीक निशाने पर रहे।असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब आर्सेनल के खिलाड़ी दबाव के आगे बिखरने लगे। एबेरेची एजे के शॉट को पीएसजी के कीपर ने शानदार तरीके से रोक दिया, जिससे गनर्स कैंप में सन्नाटा पसर गया। इसके ठीक बाद गैब्रियल मैगलहाएस का प्रयास भी असफल रहा। इन दो चूकों ने आर्सेनल की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। पीएसजी ने शूटआउट को 4-3 से अपने नाम कर इतिहास रच दिया।
पीएसजी का नया साम्राज्य और आर्सेनल की अधूरी हसरत
इस खिताबी जीत के साथ ही पीएसजी ने यह साबित कर दिया है कि यूरोपीय फुटबॉल में अब उनका एक नया साम्राज्य स्थापित हो चुका है। लगातार दो बार चैंपियंस लीग जीतना कोई मामूली बात नहीं है। मुख्य कोच लुइस एनरिके की देखरेख में इस टीम ने पूरे सीजन में चैंपियन की तरह खेल दिखाया।वहीं दूसरी ओर, आर्सेनल के लिए यह रात किसी कयामत से कम नहीं थी। साल 2006 के बाद टीम पहली बार इस बड़े फाइनल में पहुंची थी। पूरा गनर्स परिवार और दुनिया भर के फैंस इस उम्मीद में थे कि इस बार क्लब के इतिहास का पहला चैंपियंस लीग खिताब आ ही जाएगा।
आर्सेनल ने पूरे टूर्नामेंट में दिल जीतने वाला खेल दिखाया, लेकिन किस्मत ने ठीक आखिरी मोड़ पर उनका साथ छोड़ दिया। मैच खत्म होने के बाद जहाँ एक तरफ पीएसजी के खिलाड़ी मैदान पर जश्न में डूबे थे, वहीं आर्सेनल के खिलाड़ियों के आंसुओं ने बुडापेस्ट की रात को और भावुक बना दिया







