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SIR के बाद Voter list में बड़ा बदलाव- नौ राज्यों में 1.70 करोड़ नाम हुए कम

SIR के बाद Voter list में बड़ा बदलाव- नौ राज्यों में 1.70 करोड़ नाम हुए कम
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 22, 2026 1:17 अपराह्न
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डेलीबार्ता,नई दिल्ली। देश में चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान के बाद नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाताओं की संख्या में बड़ी कमी दर्ज की गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के पूर्ण होने के बाद कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 1.70 करोड़ घट गई है। यह बदलाव चुनावी व्यवस्था को अधिक सटीक और अद्यतन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

21.45 करोड़ से घटकर 19.75 करोड़ हुई मतदाताओं की संख्या

चुनाव आयोग द्वारा शनिवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के बाद संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल मतदाताओं की संख्या 21.45 करोड़ से घटकर लगभग 19.75 करोड़ रह गई है। यानी करीब 1.70 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।

आयोग के अनुसार यह कमी किसी एक कारण से नहीं बल्कि कई प्रक्रियात्मक जांचों और सत्यापन के बाद हुई है। इसमें मृत मतदाताओं के नाम, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज डुप्लीकेट प्रविष्टियां, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके नागरिकों के रिकॉर्ड तथा अपात्र प्रविष्टियों को सूची से हटाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय और त्रुटिरहित बनाना है।

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27 अक्टूबर से शुरू हुआ था विशेष अभियान

चुनाव आयोग ने पिछले वर्ष 27 अक्टूबर को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान के तहत राज्य स्तरीय चुनाव अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने घर-घर सत्यापन, दस्तावेज जांच और डिजिटल रिकॉर्ड मिलान की प्रक्रिया अपनाई।

गुजरात, पुडुचेरी, लक्षद्वीप, राजस्थान, छत्तीसगढ़, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा तथा केरल सहित कुल नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से संचालित की गई। अभियान शुरू होने से पहले इन सभी क्षेत्रों में मतदाताओं की कुल संख्या 21.45 करोड़ से अधिक दर्ज थी।

चुनाव अधिकारियों के अनुसार पुनरीक्षण के दौरान 

नागरिकों को दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी दिया गया था, ताकि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हटने की स्थिति में उसे पुनः शामिल किया जा सके।

क्यों जरूरी होता है मतदाता सूची का पुनरीक्षण

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में मतदाता सूची का नियमित अद्यतन बेहद आवश्यक है। हर वर्ष बड़ी संख्या में युवा मतदाता सूची में जुड़ते हैं, वहीं कई मतदाता स्थान परिवर्तन, मृत्यु या अन्य कारणों से सूची से हटने योग्य हो जाते हैं।

यदि समय-समय पर सूची का पुनरीक्षण न किया जाए तो चुनावों में फर्जी मतदान, डुप्लीकेट पहचान और प्रशासनिक गड़बड़ियों की आशंका बढ़ जाती है। इसी वजह से चुनाव आयोग समय-समय पर सामान्य संशोधन के साथ-साथ विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान भी चलाता है।

आयोग का दावा है कि SIR प्रक्रिया से चुनावी डेटा अधिक पारदर्शी बनता है और मतदान प्रतिशत के वास्तविक आकलन में भी मदद मिलती है।

अभी 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है प्रक्रिया चुनाव आयोग के अनुसार फिलहाल विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है, जहां लगभग 60 करोड़ मतदाता शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे सत्यापन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वहां भी मतदाता संख्या में बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस दौरान डिजिटल डेटा मिलान, आधार आधारित सत्यापन (जहां लागू), स्थानीय जांच और बूथ स्तर अधिकारियों की रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है। आयोग का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले सभी राज्यों की मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन करना है।

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दिल्ली सहित कई राज्यों में अप्रैल से शुरू हो सकता है अभियान

सूत्रों के अनुसार दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत कुल 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया अप्रैल महीने से शुरू होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने के बाद, यानी संभावित रूप से 10 अप्रैल के बाद यह अभियान शुरू किया जा सकता है।

चुनाव आयोग आमतौर पर ऐसे अभियानों के समय शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम तय करता है, ताकि अधिकतम नागरिक भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बढ़ी चर्चा

मतदाता संख्या में इतनी बड़ी कमी सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। जहां चुनाव आयोग इसे सूची शुद्धिकरण की सामान्य प्रक्रिया बता रहा है, वहीं विभिन्न राजनीतिक दल इस पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की पूरी प्रक्रिया स्पष्ट और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहे। इससे मतदाताओं का विश्वास बना रहता है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होती है।

लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में अहम कदम

कुल मिलाकर विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को चुनावी प्रणाली को अधिक सटीक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। मतदाता सूची में किए गए बदलाव यह संकेत देते हैं कि चुनाव आयोग डेटा की शुद्धता को लेकर गंभीर है।

आने वाले महीनों में जब यह प्रक्रिया अन्य राज्यों में भी लागू होगी, तब देशभर में मतदाता आंकड़ों में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऐसे में नागरिकों के लिए भी जरूरी है कि वे अपने नाम की पुष्टि समय-समय पर करते रहें, ताकि मतदान के अधिकार का उपयोग बिना किसी परेशानी के किया जा सके।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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