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अब Bihar में पंचायत चुनाव की बारी- 2026 में बजेगा बिगुल

Bihar में पंचायत चुनाव
नवजोत कौर सिद्धू
On: नवम्बर 29, 2025 7:09 अपराह्न
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बिहार में 2026 में पंचायत चुनाव का बिगुल बजने वाला है। इस चुनाव में पंचायत चुनाव में मिलने वाले आरक्षित सीटों को बदला जाएगा। पंचायती राज कानून के तहत हर दो चुनावों के चक्र में यह फेरबदल करना होता है। बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियाँ धीरे-धीरे तेज होती जा रही हैं।

Bihar में पंचायत चुनाव

गांव स्तर की राजनीति में बदलाव, सामाजिक संतुलन और नेतृत्व को नई दिशा देने में पंचायत चुनाव हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस बार सबसे अधिक चर्चाओं में जो विषय बना हुआ है, वह आरक्षण (Reservation) का मुद्दा है। विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधित्व, महिलाओं की भागीदारी और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक सशक्तिकरण देने के लिए सरकार द्वारा आरक्षण व्यवस्था में संभावित बदलावों पर विचार किए जाने की चर्चा जोरों पर है।

हालाँकि चुनाव आयोग और राज्य सरकार की ओर से अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि 2021 के पंचायत चुनाव की तरह 2026 में भी आरक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है। 

सामाजिक न्याय, जनसंख्या आधारित सीटें, और महिलाओं को 50% आरक्षण—ये सभी बिंदु नीति निर्धारण के केंद्र में हैं। आपको बता दें कि एक पद पर लगातार दो बार जिस कोटि के उम्मीदवारों के लिए आरक्षण तय किया गया था, वह अब 2026 के चुनाव में बदल जाएगा। जहां पर जिस कोटि के प्रत्याशियों के लिए 2021 में पद आरक्षित थे, उसे समाप्त कर जनगणना के आधार पर नए सिरे से आरक्षण का लाभ दिया जाएगा।

बिहार पंचायत चुनाव में वर्तमान में आरक्षण

बिहार पंचायत चुनावों में अभी जो आरक्षण व्यवस्था लागू है, उसमें निम्न श्रेणियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। अनुसूचित जाति (SC),अनुसूचित जनजाति (ST), अति पिछड़ा वर्ग (EBC),पिछड़ा वर्ग (BC), महिलाएँ  कुल सीटों का 50% आरक्षण। ग्रामीण स्तर के सभी प्रमुख पद जैसे मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य तक इन आरक्षण श्रेणियों के अनुसार बांटे जाते हैं।

2026 में क्या बदलेगा?

यद्यपि आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार 2026 में निम्न संभावित बदलावों पर चर्चा हो रही है—

जनगणना के आधार पर सीटों का होगा पुनर्गठन

2021 के बाद विभिन्न जिलों और पंचायतों में जनसंख्या में हुए बदलाव को देखते हुए कई सीटें पुनर्गठित हो सकती हैं। इसका मतलब है कि कुछ ऐसे पंचायत क्षेत्र जहाँ अब EBC या SC की संख्या बढ़ी है, वहाँ आरक्षित सीटों का अनुपात भी बढ़ सकता है।  इसके साथ ही महिलाओं के लिए आरक्षण की समीक्षा भी होगी। 

आपको बता दें कि बिहार देश का पहला राज्य था जिसने पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया। 2026 में इसे जारी रखने के साथ यह भी मुमकिन है कि महिलाओं की भागीदारी को और प्रभावी बनाने के लिए प्रशिक्षण, नेतृत्व विकास योजनाओं पर जोर दिया जाए।

EBC आरक्षण का हो सकता है विस्तार

अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को पंचायत स्तर पर सबसे अधिक आरक्षण मिलता है, लेकिन हाल के वर्षों में EBC समुदायों की राजनीतिक मांगें बढ़ी हैं। विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि 2026 में EBC सीटों का अनुपात कुछ क्षेत्रों में बढ़ सकता है या नए वर्गीकरण के अनुसार इन्हें पुनर्वितरित किया जा सकता है।

पदों का रोस्टर रोटेशन से बदलेगा समीकरण

हर पंचायत चुनाव में आरक्षण के अनुसार सीटों का रोटेशन होता है। इससे सुनिश्चित होता है कि एक ही पद लगातार एक ही श्रेणी के लिए आरक्षित न रहे। 2026 में भी यह रोटेशन कई पंचायतों का राजनीतिक समीकरण बदल देगा।

राजनीतिक दलों की रणनीति पर पड़ सकता है असर

हालाँकि पंचायत चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते, लेकिन राजनीतिक दल अपने समर्थक उम्मीदवारों को समर्थन देते हैं। आरक्षण व्यवस्था में बदलाव से राजनीतिक रणनीति पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में यह कहना मुमकिन है कि हर दल कोशिश करेगा कि SC, ST, EBC और महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करे। इन वर्गों में लोकप्रिय स्थानीय चेहरों को आगे बढ़ाये। 

आरक्षण को लेकर विवाद और  चुनौतियाँ भी आ सकती है सामनें

आरक्षण जितना जरूरी है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहता है। 2026 में भी कुछ संभावित चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं, जिसमें रोस्टर को लेकर असहमति, जातिगत संतुलन की जटिलता,‌महिला सीटों पर प्रॉक्सी उम्मीदवार का सवाल, कानूनी याचिकाएँ जैसे प्रमुख बिंदु है। 

ग्रामीण जनता की अपेक्षाओं का चुनाव

ग्रामीण जनता को पंचायत चुनाव से बहुत अपेक्षाएँ होती हैं, क्योंकि यह चुनाव सीधे उनके जीवन से जुड़े निर्णयों को प्रभावित करते हैं। सड़क, पानी, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि। ऐसे में अब विधानसभा इलेक्शन के बाद पंचायत चुनाव को लेकर बिहार में राजनीतिक सरगर्मी शुरु होती दिखाई दे रही है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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