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डॉ. प्रेम कुमार – 1990 से 2025 तक का सफर, जानिये बिहार के विधानसभा अध्यक्ष के बारें में

डॉ. प्रेम कुमार
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 4, 2025 3:42 अपराह्न
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बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद ही यह बात तय थी कि अंतिम पारी खेलने वाले किसी पुराने राजनेता को इस बार अध्यक्ष बनाया जाएगा। मंत्रिपरिषद् के शपथ ग्रहण के साथ ही डॉ. प्रेम कुमार का नाम तय हो गया।

 मंत्री और नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके है डॉ. प्रेम कुमार

डॉ. प्रेम कुमार

 

भारतीय जनता पार्टी के सबसे अनुभवी विधायकों की श्रेणी में रहे डॉ. प्रेम कुमार को बिहार विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया है। वह गया टाउन, यानी गयाजी शहरी क्षेत्र के मतदाताओं के प्रतिनिधि चुनकर 9वीं बार भी विधानसभा पहुंचे हैं। 202 सीटों की बड़ी जीत के साथ ही उनका नाम चल निकला था। इंतजार हो रहा था कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लें और मंत्रिपरिषद् के बाकी सदस्यों का भी शपथ ग्रहण हो जाए। यह हुआ और तय हो गया कि डॉ. प्रेम कुमार के सामने इस कुर्सी के लिए किसी की ओर से कोई विकल्प नहीं है। डॉ. प्रेम कुमार ही होंगे। सोमवार को वही हुआ। नामांकन भरा और इकलौता। 35 विधायकों वाला महागठबंधन सामने किसी को इस पद के लिए खड़ा करने तक की हिम्मत नहीं जुटा सका। यानी, निर्विरोध चयन की घोषणा हुई।

कहां रहते हैं, किस जाति के हैं, परिवार में कौन-कौन है?

गयाजी शहर के अंदर गया इलाके की नई सड़क पर आवास है। कहार जाति से हैं, जो चंद्रवंशी समुदाय से है। परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा-बेटी हैं। दोनों शादीशुदा हैं। बेटे भारतीय जनता युवा मोर्चा के पदाधिकारी हैं। आम तौर पर सहज उपलब्ध रहना डॉ. प्रेम कुमार की खूबी है, जिसके कारण वह लगातार 35 साल से चुनाव जीत रहे हैं। कांग्रेस की सीट रही गया टाउन में डॉ. प्रेम कुमार ने 1990 में पहली बार ताल ठोकी तो शुरू से अब तक कभी नहीं हारे।

हर परिस्थिति में पार्टी के साथ रहे डॉ. प्रेम कुमार

बिहार में 1980-85 तक बाकी जगहों की तरह गया टाउन विधानसभा सीट भी कांग्रेस के वर्चस्व वाली रही थी। 1990 में इस वर्चस्व को डॉ. प्रेम कुमार ने तोड़ा। यह वह दौर था, जब भारतीय जनता पार्टी बिहार में अस्तिस्त बनाने की कोशिश कर रही थी। तब गया टाउन क्षेत्र एक बार भाजपा का हुआ तो डॉ. प्रेम कुमार और उनकी पार्टी एक-दूसरे का पर्याय ही बन गई। कभी न तो पार्टी ने वहां प्रत्याशी बदला और न जनता ने अपना विधायक। डॉ. प्रेम कुमार नें अपनें क्षेत्र नें ऐसे कार्य किये कि जनता के बीच उनकी गहरी पैठ बन गई।

सामने पहले सीपीआई के शकील अहमद खान, फिर मसूद मंजर रहे। जब यह लोग हर दांव खेलकर लौट गए, तो कांग्रेस ने संजय सहाय को उतारा। उनकी और बड़ी हार हुई। फिर यहां सीपीआई ने दम दिखाया, लेकिन 28417 मतों से करारी हार मिली। आगे, यानी 2015 से लगातार कांग्रेस इस प्रत्याशी दे रही है, लेकिन डॉ. प्रेम कुमार को सिर्फ जीत के अंतर का प्रभाव दिखता है, लेकिन जीत पक्की ही मानी जाती है।

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प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

डॉ. प्रेम कुमार का जन्म गया जिले में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गया से पूरी की और मगध विश्वविद्यालय से एम.एससी. और पीएचडी की डिग्री हासिल की। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़ गए। शिक्षा क्षेत्र से राजनीति की ओर उनका रुख जनता की सेवा की भावना से प्रेरित था।

डॉ. प्रेम कुमार

गया टाउन विधानसभा सीट सिर्फ ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व नहीं रखती, बल्कि बिहार की राजनीति में इसका विशेष स्थान है। यही वह सीट है जिसने भाजपा को लगातार जीत की परंपरा दी है। इस सीट से आठ बार के विधायक डॉ. प्रेम कुमार का नाम आज भी गया की सियासत में भरोसे और विकास का पर्याय माना जाता है। 

कौन हैं डॉ. प्रेम कुमार?

डॉ. प्रेम कुमार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और गया टाउन से आठ बार के विधायक हैं। वे 1990 से लगातार जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी सादगी, जनता से जुड़ाव और संगठनात्मक अनुशासन ने उन्हें बिहार की राजनीति में स्थायी पहचान दिलाई है। डॉ. प्रेम कुमार राज्य सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और कृषि, पर्यटन, नगर विकास जैसे विभागों का सफल संचालन किया है।

परिवार और जातिगत पृष्ठभूमि

डॉ. प्रेम कुमार एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार से आते हैं। वे अपनी सादगी और पारिवारिक मूल्यों के लिए जाने जाते हैं। उनके परिवार के लोग राजनीति से दूर रहकर भी समाजसेवा में सक्रिय हैं। वे भूमिहार जाति से हैं, जो गया सहित पूरे मगध क्षेत्र में प्रभावशाली मानी जाती है।

डॉ. प्रेम कुमार का राजनीतिक सफर भाजपा के शुरुआती दिनों से जुड़ा है।1990: पहली बार गया टाउन विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीता।

1995 से 2020 तक लगातार इस सीट से विजयी रहे,यानी आठ बार विधायक बने।वह कई बार मंत्री पद पर भी रहे और बिहार सरकार में कृषि, नगर विकास और पर्यटन जैसे विभागों की जिम्मेदारी संभाली।

बहरहाल, डॉ. प्रेम कुमार की पहचान एक ऐसे जननेता की है जो बिना दिखावे के काम करते हैं। तीन दशक से भी अधिक लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने साबित किया है कि राजनीति में ईमानदारी और सेवा ही स्थायी पूंजी है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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