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प्रेम कुमार ने ली बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद की शपथ, स्पीकर पद के साथ BJP बनी गठबंधन का बड़ा भाई

प्रेम कुमार
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 4, 2025 12:17 पूर्वाह्न
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बिहार की राजनीति में बुधवार का दिन कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। वरिष्ठ नेता और आठ बार के विधायक प्रेम कुमार ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) पद की शपथ ली। स्पीकर का यह पद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के खाते में जाना राजनीतिक समीकरणों का नया संदेश देता है—कि NDA में अब BJP ही सबसे बड़ा और निर्णायक सहयोगी बनकर उभर आई है।

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जहां गठबंधन का संचालन अभी तक जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार की राजनीतिक समझ से होता रहा, वहीं विधानसभा अध्यक्ष जैसा महत्वपूर्ण पद BJP के हाथों में आने से सत्ता संतुलन का चेहरा एक बार फिर बदलता दिखाई देता है।

स्पीकर की कुर्सी BJP के पास, गठबंधन में बढ़ा राजनीतिक वर्चस्व

बिहार में विधानसभा अध्यक्ष का पद हमेशा से अत्यंत प्रतिष्ठित और प्रभावशाली माना जाता है। इस पर जो भी बैठता है, वह न केवल सदन की कार्यवाही का संचालन करता है बल्कि कई महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णय भी लेता है। प्रेम कुमार को इस पद पर लाना BJP के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत है।

यह संकेत है कि आगामी समय में विधायक दल, सदन की कार्यशैली और विधायी प्रक्रियाओं पर BJP की पकड़ और मजबूत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेडीयू की तुलना में अब भाजपा अधिक संख्या और अधिक निर्णायक भूमिका में है, इस कारण स्पीकर का पद भी उसे दिया गया।

प्रेम कुमार आठ बार के विधायक, प्रशासनिक अनुभव और शांत छवि

प्रेम कुमार 1990 से लगातार राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे हैं। बिहार के गया टाउन विधानसभा क्षेत्र से वे आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं।उनकी छवि एक शांत, सौम्य और संतुलित नेता की रही है। प्रशासनिक अनुभव, मंत्रिपरिषद में लंबे समय तक जिम्मेदारियां निभाने और सदन की कार्यप्रणाली की गहरी समझ के कारण BJP ने उन्हें इस पद के लिए सबसे उपयुक्त माना। स्पीकर के रूप में उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे सदन को बिना किसी विवाद, शोरगुल या पक्षपात के सुचारू रूप से चलाएंगे।
विपक्ष भी उनके चयन पर कड़ी प्रतिक्रिया देने से बचा है, क्योंकि प्रेम कुमार अपनी शालीनता के लिए जाने जाते हैं।

शपथ ग्रहण समारोह: राजनीतिक संदेशों का मंच

शपथ ग्रहण के दौरान सदन में माहौल पूरी तरह औपचारिक, लेकिन राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ था।
नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री और BJP नेताओं ने प्रेम कुमार को बधाई दी।BJP नेताओं ने इसे “गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव की शुरुआत” के रूप में वर्णित किया। दूसरी ओर विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि स्पीकर पद BJP को देना यह साबित करता है कि बीजेपी अब “बिहार में सबसे ऊपर” बन चुकी है और जेडीयू मजबूरी में उसका साथ दे रही है।

गठबंधन की राजनीति: BJP का बढ़ता प्रभाव

बिहार में पिछले कुछ महीनों से NDA की राजनीति लगातार बदलाव के दौर से गुजर रही है। जहां पहले गठबंधन में जेडीयू प्रमुख भूमिका निभाती थी, वहीं अब समीकरण उलटते दिख रहे हैं। BJP के पास बड़ा जनाधार, अधिक विधायक और राष्ट्रीय नेतृत्व का समर्थन है, जबकि जेडीयू के सामने सीटों की सीमाएं और गठबंधन की मजबूरियां दोनों हैं।

प्रेम कुमार


ऐसे में स्पीकर पद BJP को मिलना यह साबित करता है कि अब सत्ता संचालन का असली केंद्र भाजपा ही बन गई है। राजनीतिक विश्लेषक यह भी कह रहे हैं कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल विस्तार, संसदीय समितियां और अध्यक्ष मंडल जैसे पदों पर भी BJP का वर्चस्व बढ़ने वाला है।

विधानसभा में सदन चलाने की चुनौती

स्पीकर होने का मतलब सिर्फ कुर्सी पर बैठना नहीं है, बल्कि हर विवाद, हर बहस और हर निर्णय को निष्पक्षता के साथ संभालना होता है। बिहार विधानसभा में विपक्ष की संख्या कम है, लेकिन वह आक्रामक है।
कई बार सदन में तीखी नोकझोंक, वाकआउट और हंगामा भी आम बात है। ऐसी स्थिति में प्रेम कुमार की असली परीक्षा तब होगी जब सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होंगे।उनसे यह उम्मीद की जा रही है कि वे नियमों को सर्वोपरि रखकर सदन को मर्यादित और गरिमामयी बनाए रखेंगे।

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नीतीश कुमार की रणनीति: सहमति से चलना या मजबूरी?

नीतीश कुमार ने हमेशा दावा किया है कि NDA में सब कुछ “सहमति” से होता है। लेकिन राजनीतिक जानकार पूछ रहे हैं कि क्या यह नियुक्ति सहमति का परिणाम है या हालात की मजबूरी का?

जेडीयू का आकार लगातार सिमट रहा है और BJP अपनी ताकत बढ़ा रही है। ऐसे में नीतीश कुमार पर दबाव था कि वे BJP को एक बड़ा पद सौंपें, ताकि गठबंधन सुचारू तरीके से चलता रहे। फिलहाल, मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर प्रेम कुमार को बधाई दी और उनके साथ काम करने की इच्छा जाहिर की है, लेकिन राजनीति में तस्वीरें अक्सर जो दिखती हैं, वह सच्चाई नहीं होती।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: “BJP की जीत, जेडीयू की हार”

महागठबंधन से जुड़े दलों का कहना है कि यह निर्णय जेडीयू के कमजोर होते कद और BJP की बढ़ती ताकत को उजागर करता है।आरजेडी ने इसे नीतीश कुमार की “कमजोर स्थिति” का प्रतीक बताया और कहा कि आने वाले समय में बिहार की सत्ता पर बीजेपी का ही नियंत्रण रहेगा।हालांकि बीजेपी नेताओं ने इसे सिर्फ “योग्य व्यक्ति को योग्य पद देने” का परिणाम बताया है।

BJP की रणनीति—2025 विधानसभा चुनाव पर नजर

बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव दूर नहीं हैं।BJP का मकसद है कि तब तक संगठन और सरकार दोनों में अपना प्रभाव इतना बढ़ा ले कि वह खुद को राज्य की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति साबित कर सके। स्पीकर का पद उसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।इससे BJP को सदन में न सिर्फ बढ़त मिलेगी, बल्कि विधायी प्रक्रिया पर भी उसकी पकड़ मजबूत होगी।

समापन: बिहार की राजनीति में नया अध्याय

प्रेम कुमार का बिहार विधानसभा अध्यक्ष बनना सिर्फ एक संवैधानिक नियुक्ति नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति के बदलते समीकरणों का प्रतीक है।
यह स्पष्ट संदेश है कि NDA में अब सबसे बड़ा और निर्णायक साझेदार भाजपा ही है। आने वाले महीने यह तय करेंगे कि यह शक्ति संतुलन बिहार की नीतियों, शासन और राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
फिलहाल इतना तय है कि प्रेम कुमार की ताज़ी शपथ ने बिहार की राजनीति में एक नया और दिलचस्प अध्याय जोड़ दिया है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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