नई दिल्ली। BJP के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक हलकों में सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है। कई महीनों से टल रही घोषणा अब इसी हफ्ते होने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीते तीन दिनों से भाजपा शीर्ष नेतृत्व लगातार विचार–मंथन में जुटा है। संगठन चुनावों को लेकर समिति के अध्यक्ष के. लक्ष्मण की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद से राजनीतिक गलियारों में तेज अटकलें लगाई जा रही हैं। बुधवार को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा पार्टी पदाधिकारियों को दिए जाने वाले रात्रिभोज को भी इसी संदर्भ से जोड़ा जा रहा है, हालांकि आधिकारिक रूप से इसे बिहार विधानसभा चुनाव जीत के उत्सव के रूप में बताया गया है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए कई नामों की चर्चा है। धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, शिवराज सिंह चौहान, सुनील बंसल और मनोहर लाल खट्टर जैसे नेताओं के नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। लेकिन भाजपा की निर्णय प्रक्रिया को देखते हुए अंतिम समय में किसी नए और अप्रत्याशित नाम के उभरने की संभावना भी पूरी तरह नकारा नहीं जा सकती।
नए अध्यक्ष की घोषणा जल्द इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि 28 से 30 नवंबर तक रायपुर में देशभर के डीपीपी की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह शामिल होंगे। आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी यह बैठक हर साल केंद्र सरकार और भाजपा की रणनीति के लिहाज से अहम मानी जाती है। इसके तुरंत बाद एक दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होगा, जो 19 दिसंबर तक चलेगा। इस अवधि में पार्टी कोई बड़ा फैसला करने से बचती है। ऐसे में संगठनात्मक घोषणा के लिए यह सप्ताह सबसे उपयुक्त माना जा रहा है।
शीर्ष नेतृत्व की लगातार बैठकों ने भी इस कयास
पार्टी में शीर्ष नेतृत्व की लगातार बैठकों ने भी इस कयास को मजबूत किया है कि भाजपा नए संगठनात्मक ढांचे को अंतिम रूप देने के बहुत करीब है। सूत्रों के मुताबिक बीते शनिवार की रात अमित शाह, जेपी नड्डा और संगठन महामंत्री बीएल संतोष के बीच लंबी बैठक चली, जिसमें नए राष्ट्रीय अध्यक्ष, पदाधिकारियों और संगठनात्मक बदलाव पर व्यापक चर्चा की गई। इसके बाद शाह ने कई वरिष्ठ नेताओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, जिसके बाद यह संकेत मिला कि निर्णय जल्द होने वाला है।
अमित शाह का लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखना भी इन भीतरखाने की गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा ने पिछले वर्ष ही संगठन चुनावों की रूपरेखा तय कर दी थी और जनवरी–फरवरी में नए अध्यक्ष के चुनाव की संभावना थी। लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव, आंतरिक रणनीतियों और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे कारणों से समय सीमा आगे बढ़ती चली गई। इसके बाद जुलाई तक प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव पूरे होने के बावजूद इसे बिहार चुनाव के बाद तक स्थगित कर दिया गया था।
वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2020 में तीन वर्ष के लिए तय किया गया था, लेकिन लोकसभा चुनावों को देखते हुए इसे जून 2024 तक बढ़ा दिया गया। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी नड्डा फिलहाल पद पर बने हुए हैं। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने विलंब को भाजपा और आरएसएस के बीच मतभेद का संकेत भी बताया था, लेकिन अगस्त में सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट कर दिया कि भाजपा अध्यक्ष का चयन पूरी तरह पार्टी का विषय है और इसमें संघ का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा।
अब जब राष्ट्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण सत्र शुरू होने वाले हैं और बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए अनुकूल माहौल बना चुके हैं, ऐसे में पार्टी नए संगठनात्मक नेतृत्व के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार दिख रही है। भाजपा में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय अध्यक्ष की भूमिका सिर्फ संगठन चलाने तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि यह राजनीतिक संदेश और चुनावी रणनीति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इसी कारण नया अध्यक्ष कौन होगा, यह सवाल केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं बल्कि 2029 तक की राजनीतिक दिशा तय करने वाली बड़ी घोषणा मानी जा रही है।
सप्ताह के अंत तक जारी बैठकों, नेताओं की सक्रियता और अचानक बुलाए गए कार्यक्रमों ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि भाजपा नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के मामले में निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी किसी अनुभवी संगठनकर्ता को चुनती है या किसी ऐसे चेहरे को मौका देती है जो चुनावी राजनीति में मजबूत पकड़ रखता हो। चाहे नाम कोई भी हो, इस घोषणा के साथ ही भाजपा आने वाले वर्षों की रणनीति को नई गति देने की तैयारी में लग जाएगी।
नई घोषणा का बेसब्री से इंतजार
देशभर के भाजपा कार्यकर्ता, राजनीतिक विश्लेषक और विपक्षी दल सभी इस घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। भाजपा का नया अध्यक्ष कौन होगा, यह सिर्फ एक पद नहीं बल्कि आगामी चुनावी राजनीति और संगठनात्मक ढांचे की दिशा तय करने वाला निर्णय साबित होगा।






