भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए अपनी रणनीतिक तैयारी तेज कर दी है। मंगलवार और बुधवार को जारी की गई सूचियों के माध्यम से पार्टी ने न केवल अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूती देने का प्रयास किया है, बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है।
भाजपा राज्यसभा उम्मीदवार 2026
भाजपा ने अब तक 7 राज्यों से कुल 13 नामों की घोषणा की है (जिनमें हालिया सूची के प्रमुख नाम शामिल हैं)। इन चयन के पीछे पार्टी का स्पष्ट संदेश ‘परफॉरमेंस और सोशल इंजीनियरिंग’ है।
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दूसरी लिस्ट और प्रमुख राज्यों के उम्मीदवार
हालिया घोषणाओं में जिन प्रमुख चेहरों को जगह मिली है, उनका विवरण नीचे दिया गया है
बिहार (Bihar)
बिहार से भाजपा ने दो बड़े नामों का चयन किया है
- नितिन नबीन (Nitin Nabin) – भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष और पटना की बांकीपुर सीट से विधायक। नितिन नबीन को राज्यसभा भेजना उनके कद को राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूती देने का संकेत है। वे कायस्थ समुदाय से आते हैं और पार्टी के युवा और ऊर्जावान चेहरों में गिने जाते हैं।
- शिवेश कुमार राम (Shivesh Kumar Ram) – पार्टी के प्रदेश महासचिव और एक प्रमुख दलित चेहरा। शिवेश राम ने 2024 का लोकसभा चुनाव सासाराम से लड़ा था। हालांकि वे वहां जीत नहीं पाए थे लेकिन पार्टी ने उन्हें उच्च सदन भेजकर दलित मतदाताओं के बीच एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है।
असम (Assam)
असम से दो उम्मीदवारों के नाम तय किए गए हैं जो राज्य के पूर्वी हिस्से और चाय बागान क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं
- जोगेन मोहन (Jogen Mohan) – असम सरकार में संस्कृति और राजस्व मंत्री। वे अहोम समुदाय से आते हैं।
- तेराश गोवाला (Terash Gowalla) – डुलियाजान से विधायक और चाय जनजाति (Tea Tribe) के प्रभावशाली नेता।
रणनीति – इन दोनों समुदायों की लंबे समय से अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग रही है। उन्हें राज्यसभा भेजकर भाजपा ने इन समुदायों का विश्वास जीतने का प्रयास किया है।
ओडिशा (Odisha)
- मनमोहन सामल (Manmohan Samal) – ओडिशा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में पहली बार अपने दम पर सरकार बनाई है। चुनाव हारने के बावजूद पार्टी ने उन्हें पुरस्कृत किया है।
- सुजीत कुमार (Sujeet Kumar) – सुजीत कुमार पहले बीजेडी (BJD) में थे लेकिन हाल ही में भाजपा में शामिल हुए। वे वर्तमान में भी राज्यसभा सांसद हैं और पार्टी ने उन्हें दोबारा मौका दिया है।
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हरियाणा (Haryana)
- संजय भाटिया (Sanjay Bhatia) – पूर्व लोकसभा सांसद। उन्होंने करनाल सीट पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के लिए खाली की थी। पार्टी ने उनके इस त्याग और संगठन के प्रति निष्ठा को देखते हुए उन्हें राज्यसभा का टिकट दिया है।
पश्चिम बंगाल (West Bengal)
- राहुल सिन्हा (Rahul Sinha) – भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता। बंगाल में पार्टी के आधार को मजबूत करने के लिए राहुल सिन्हा एक अनुभवी चेहरा माने जाते हैं।
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)
- लक्ष्मी वर्मा (Laxmi Verma) – प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष और कुर्मी समाज की बड़ी नेता। वे जमीनी स्तर की कार्यकर्ता रही हैं और महिलाओं तथा ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हैं।
राज्यसभा चुनाव 2026 – एक नज़र में (तालिका)
| राज्य | उम्मीदवार का नाम | पृष्ठभूमि / विशेषता |
| बिहार | नितिन नबीन | भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष, विधायक |
| बिहार | शिवेश कुमार राम | दलित नेता, संगठन का अनुभव |
| असम | जोगेन मोहन | कैबिनेट मंत्री, अहोम नेता |
| असम | तेराश गोवाला | विधायक, चाय जनजाति नेता |
| ओडिशा | मनमोहन सामल | प्रदेश अध्यक्ष, OBC चेहरा |
| ओडिशा | सुजीत कुमार | निवर्तमान सांसद (पूर्व BJD नेता) |
| हरियाणा | संजय भाटिया | पूर्व सांसद, संगठन के प्रति निष्ठा |
| बंगाल | राहुल सिन्हा | पूर्व प्रदेश अध्यक्ष |
| छत्तीसगढ़ | लक्ष्मी वर्मा | देश उपाध्यक्ष, महिला चेहरा |
चयन के पीछे भाजपा की रणनीति
भाजपा की इस सूची को गहराई से देखने पर तीन प्रमुख बातें उभर कर आती हैं
- संगठन को वरीयता – नितिन नबीन और मनमोहन सामल जैसे संगठनात्मक दिग्गजों को जगह देकर यह साफ कर दिया गया है कि जो जमीन पर काम करेगा उसे पार्टी उच्च स्तर पर सम्मान देगी।
- जातीय समीकरण (Caste Equations) – अहोम, चाय जनजाति, दलित और ओबीसी (कुर्मी) चेहरों को चुनकर पार्टी ने आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत ‘वोट बैंक’ की किलेबंदी की है।
- पुरस्कार और संतुलन – जिन नेताओं ने अन्य नेताओं के लिए अपनी सीटें छोड़ीं (जैसे संजय भाटिया) या जो हारने के बाद भी संगठन को मजबूत करते रहे उन्हें सदन में जगह दी गई है।
चुनाव की महत्वपूर्ण तिथियां
- नामांकन की अंतिम तिथि – 5 मार्च, 2026
- नामांकन वापस लेने की तिथि – 9 मार्च, 2026
- मतदान की तिथि – 16 मार्च, 2026
- परिणाम – 16 मार्च की शाम तक
राज्यसभा की खाली हो रही 37 सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में भाजपा अपनी संख्या बल में इजाफा करने की ओर अग्रसर है जिससे उच्च सदन में महत्वपूर्ण बिलों को पास कराने में सरकार को आसानी होगी।







