कनाडा सरकार ने अपने देश में उम्मीद से ज्यादा बढ़ने वाली स्टूडेंट्स की भीड़ को कम करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए है। यह फैसला कनाडा में बढ़ते आवास खर्चे, बढ़ते छात्रों की संख्या और वीज़ा धोखाधड़ी जैसे मुद्दों को देखते हुए लिया गया है। यह नियम पिछले नियम के मुताबिक कहीं ज्यादा सख्त है। कनाडा में इस समय वहां के नागरिकों से ज्यादा बाहर के निवास कर रहे है इसी कारण कनाडा सरकार ने वीजा नियम में कुछ अहम बदलाव किए है। दुनिया के कई देशों के लोग कनाडा जाकर पढ़ाई का सपना देखते हैं।
कनाडा सरकार भी अपने प्रतिष्ठित संस्थानों में विदेशी छात्रों को प्रवेश आसानी से दे देती थी लेकिन अब प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए विदेशी छात्रों को कुछ अहम दस्तावेज अपलोड करने होंगे व साथ ही वित्तीय दस्तावेज भी उपलब्ध करवाना होगा तब ही विदेशी छात्र कनाडा के प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर सकेंगे। इन बदलावों से भारतीय छात्रों को जरूर झटका लगा है क्योंकि कई भारतीय छात्र कनाडा में जाकर प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने का सपना देखते है।
कनाडा सरकार के महत्वपूर्ण बदलाव
कनाडा सरकार ने अपने स्टूडेंट्स वीज़ा पॉलिसी में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए है। यह महत्वपूर्ण बदलाव निम्न है –
- स्टडी परमिट संख्या में कमी – कनाडा में विदेशी छात्रों की संख्या कई गुना ज्यादा बढ़ती रहती है इसलिए कनाडा सरकार ने 2026 के लिए विदेशी छात्रों की संख्या लगभग 4.08 लाख रखने का लक्ष्य रखा है।
- Provinicial Attestation Letter – यह एक विशेष प्रकार का लेटर होता है जिसमें कोई भी छात्र कनाडा पढ़ने आता है तो वह अपने देश या राज्य से आधिकारिक स्वीकृति पत्र लेकर आता है। कनाडा सरकार इसी पत्र को देख कर यह मानती है कि संबंधित छात्र पढ़ने के उद्देश्य से कनाडा आया है।
- मास्टर्स और Phd छात्रों को छूट – कनाडा सरकार का अभी तक यह नियम था कि अगर कोई छात्र मास्टर्स या phd करने आता है तो उसके साथ रहने वाले साथी को कनाडा में वर्क करने की इजाजत थी लेकिन अब कुछ ही बिंदुओं के आधार पर उन्हें छूट दी जाएगी।
- वित्तीय क्षमता – जब भी कोई विदेशी छात्र दूसरे देश में पढ़ने के लिए जाता है तो वह वित्तीय आवेदन पत्र लेकर यह proof दिखाता है कि अध्ययन करने हेतु उसके पास प्रयाप्त वित्तीय क्षमता है और वह दूसरे देश में रहकर आवासीय खर्च उठा सकता है।
- एडमिशन में प्रतिस्पर्धा बढ़ी – सीमित स्टूडेंट वीजा पॉलिसी के बाद ओंटारियो और ब्रिटिश कोलंबिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। इससे अब सीमित संख्या में स्टूडेंट ही इन संस्थानों में अध्ययन कर पाएंगे।
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भारतीय छात्रों पर प्रभाव
कनाडा सरकार के इन बदलावों से भारतीय छात्रों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। भारतीय छात्रों में विदेश में पढ़ने का क्रेज कई ज्यादा है। भारत में रहने वाला हर छात्र यह सपना देखता है कि वह अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा जैसे देशों में जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करे। ऐसा नहीं कि भारत में संस्थानों की कमी है। भारत में एक से बढ़कर एक संस्थान हैं जो बेहतर से बेहतर शिक्षा देने के लिए जाने जाते है।
विदेश में आधुनिक शिक्षा को ज्यादा बढ़ावा दिया जाता है और शायद यही वजह है कि भारतीय छात्र कनाडा जैसे देशों का रुख करते है। कनाडा सरकार के इन बदलावों से भारतीय छात्रों पर प्रभाव पड़ेगा क्योंकि नए वीजा पॉलिसी के कारण कई भारतीय छात्र कनाडा नहीं जा सकेंगे। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण है वित्तीय क्षमता वाले छात्रों को आगे रखना। जिन छात्रों के पास कम वित्तीय क्षमता है, उन्हें कनाडा जाकर पढ़ाई करने में थोड़ी परेशानी आ सकती है। कनाडा ने क्योंकि 4.08 लाख छात्रों को ही एडमिशन देने का मन बनाया है इससे कनाडा के मूल लोगों को और अधिक मौके मिलेंगे।







