व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

खाद संकट पर केंद्र की पैनी नजर: 25 लाख टन यूरिया आयात करेगी सरकार

खाद संकट पर केंद्र की पैनी नजर: 25 लाख टन यूरिया आयात करेगी सरकार
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 23, 2026 2:10 अपराह्न
Follow Us:

नई दिल्ली। आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने यूरिया की बड़ी खरीद का फैसला किया है।भारत की अर्थव्यवस्था में खरीफ फसलों का योगदान बहुत बड़ा है। धान, मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों के लिए यूरिया की मांग जून और जुलाई के महीनों में चरम पर होती है। 

पिछले कुछ वर्षों का अनुभव बताता है कि अगर इस समय आपूर्ति में थोड़ी भी देरी हो जाए, तो ग्रामीण इलाकों में खाद को लेकर हाहाकार मच जाता है। इसी संभावित संकट को भांपते हुए सरकार ने इस बार समय से काफी पहले आयात का ऑर्डर जारी कर दिया है,अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में पिछले दो महीनों के दौरान तेज उछाल देखने को मिला है। पहले जहां यूरिया लगभग 500 डॉलर प्रति टन के आसपास मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 935 से 959 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई है। 

इस तरह बहुत कम समय में कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। यही वजह है कि इस बार की खरीद सरकार के लिए महंगी साबित हो रही है,सरकार ने यूरिया की खरीदी और वितरण के लिए एक योजना तैयार की है इसके अनुसार  25 लाख यूरिया की खरीदी की जाएगी और 15 लाख टन यूरिया पश्चिमी तट के बंदरगाहों पर उतरेगा, जबकि 10 लाख टन की खेप पूर्वी तट पर पहुंचेगी। जून के मध्य तक इस पूरे स्टॉक को देश के चप्पे-चप्पे में पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है,ताकि जैसे ही मानसून की बारिश के साथ बुवाई की रफ्तार बढ़े, खाद का पर्याप्त स्टॉक हर जिले और हर सहकारी समिति के पास मौजूद रहे।

घरेलू उत्पादन की सीमाएं

 भारत में यूरिया की मांग इतनी विशाल है कि हमें आज भी आयात का सहारा लेना पड़ता है। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया के संकट ने भारत में गैस के आयात को प्रभावित किया है जो कि यूरिया उत्पादन का सबसे महत्वपूर्ण कच्चा  माल है ,हालांकि हमने पिछले कुछ वर्षों में घरेलू उत्पादन में काफी सुधार किया है और कई पुराने बंद पड़े कारखानों को फिर से चालू किया है लेकिन हमें आज भी यूरिया के आयात का सहारा लेना पड़ता है। हाल के दिनों में देश के भीतर कुछ बड़े संयंत्रों में तकनीकी मरम्मत और गैस की सीमित आपूर्ति के कारण उत्पादन की रफ्तार थोड़ी धीमी रही, जिसने आयात की जरूरत को और अधिक अनिवार्य बना दिया।

वैश्विक बाजार पर असर

भारत की इस बड़ी खरीद का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है। जब कोई बड़ा देश एक साथ इतनी बड़ी मात्रा में खरीद करता है, तो इससे बाजार में मांग बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव बनता है। इससे छोटे देशों के लिए यूरिया खरीदना और महंगा हो सकता है।

read more :

अर्थव्यवस्था पर असर

केंद्र की सरकार यूरिया की खरीदी में किसानों को भारी सब्सिडी देती है , इस सब्सिडी का बोझ कई हजार करोड़ रुपये बढ़ जाएगा। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें जल्द ही नीचे नहीं आईं, तो इस साल का उर्वरक सब्सिडी बिल सरकार के शुरुआती अनुमानों को काफी पीछे छोड़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंता का विषय है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो सरकार का यह कदम किसानों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मानसून से पहले खाद का बफर स्टॉक तैयार करना एक समझदारी भरा फैसला है ताकि बुआई के समय कोई अफरा-तफरी न मचे। लेकिन लंबे समय में यह स्थिति हमें सचेत भी करती है कि हमें अपनी आत्मनिर्भरता को और अधिक मजबूत करना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वैश्विक परिस्थितियां सुधरती हैं या फिर भारत को अपनी कृषि व्यवस्था को बचाने के लिए इसी तरह के महंगे और कड़े फैसले आगे भी लेने पड़ेंगे। फिलहाल किसानों के लिए यही संदेश है कि वे निश्चिंत होकर खेतों में उतरें क्योंकि खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने अपना मोर्चा संभाल लिया है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment