छत्तीसगढ़ सरकार राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके लिए सरकार नई पर्यटन नीति तैयार कर रही है, जिसका उद्देश्य राज्य में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर पैदा करना और आर्थिक विकास को गति देना है। इस नीति के तहत पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को प्रमुख आधार बनाया गया है, ताकि निजी निवेश के माध्यम से पर्यटन स्थलों का विकास और संचालन किया जा सके।
सरकार की मंशा साफ है कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को व्यवस्थित तरीके से विकसित कर पर्यटन को राज्य की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाया जाए।
PPP मॉडल पर होगा पर्यटन स्थलों का विकास
नई पर्यटन नीति में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को केंद्र में रखा गया है। इस मॉडल के तहत सरकार और निजी कंपनियां मिलकर पर्यटन स्थलों का विकास और संचालन करेंगी। इससे एक ओर जहां सरकार पर वित्तीय बोझ कम होगा, वहीं दूसरी ओर निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता, आधुनिक प्रबंधन और निवेश का लाभ भी मिलेगा।
इससे पहले राज्य में 15 मोटल निजी हाथों में दिए जा चुके हैं, जिनका संचालन इसी मॉडल पर किया जा रहा है। अब सरकार इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए पर्यटन स्थलों को भी PPP मॉडल के तहत विकसित करने की तैयारी में है।
पहले चरण में 20 पर्यटन स्थलों का चयन
नई नीति के तहत पहले चरण में बस्तर, जशपुर और सरगुजा संभाग के 20 प्रमुख पर्यटन स्थलों को चयनित किया गया है। ये तीनों क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाने जाते हैं, लेकिन अब तक इन्हें पर्यटन के लिहाज से अपेक्षित पहचान नहीं मिल पाई थी। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में पर्यटन विकास से न सिर्फ स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि आदिवासी समुदायों को भी रोजगार और आय के नए अवसर मिलेंगे।
इको टूरिज्म को मिलेगी प्राथमिकता
छत्तीसगढ़ की नई पर्यटन नीति में इको टूरिज्म को विशेष प्राथमिकता दी गई है। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा वन क्षेत्र से आच्छादित है, जो इसे प्राकृतिक पर्यटन के लिए बेहद उपयुक्त बनाता है। सरकार का फोकस पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन स्थलों के विकास पर रहेगा, ताकि प्रकृति और पर्यटन के बीच संतुलन बना रहे। इसके तहत जंगल सफारी, नेचर ट्रेल, नेचर कैंप, बर्ड वॉचिंग, वाटरफॉल टूरिज्म और इको रिसॉर्ट्स जैसी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
होम-स्टे, होटल और एडवेंचर स्पोर्ट्स को मिलेगा बढ़ावा
सरगुजा और बस्तर संभाग में पर्यटन को बढ़ाने के लिए होम-स्टे, होटल, रिसॉर्ट, एडवेंचर स्पोर्ट्स और वेलनेस सेंटर जैसी परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे पर्यटकों को ठहरने की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और स्थानीय लोगों को सीधे तौर पर पर्यटन से जोड़ने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य बड़े होटल प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ छोटे स्तर के स्थानीय उद्यमों को भी बढ़ावा देना है, ताकि पर्यटन का लाभ गांव-गांव तक पहुंचे।
सब्सिडी और अतिरिक्त अनुदान का प्रावधान
निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए नई पर्यटन नीति में आकर्षक सब्सिडी और अनुदान का प्रावधान किया गया है। सामान्य क्षेत्रों में पर्यटन परियोजनाओं पर 45 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाएगी। आदिवासी और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में निवेश करने वालों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान मिलेगा।
इस प्रोत्साहन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में भी पर्यटन विकास हो सके और वहां के लोगों को मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
पर्यटन अधोसंरचना के विकास पर जोर
नई नीति में पर्यटन अधोसंरचना के विकास को एक अहम स्तंभ माना गया है। सरकार पर्यटकों की सुविधा के लिए सड़क, बिजली, पानी, संचार, सुरक्षा और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करेगी।इसके साथ ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त होटल, रिसॉर्ट और विश्राम गृह तैयार किए जाएंगे, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण
सरकार का कहना है कि पर्यटन विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इको फ्रेंडली निर्माण, स्थानीय संसाधनों का उपयोग और पारंपरिक वास्तुकला को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। आदिवासी संस्कृति, लोक कला, नृत्य, संगीत और खानपान को पर्यटन से जोड़ा जाएगा, जिससे स्थानीय पहचान बनी रहे और संस्कृति का संरक्षण हो।
लेजर टूरिज्म को मिलेगा नया आयाम
नई पर्यटन नीति के तहत लेजर टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अंतर्गत गंगरेल बांध जैसे प्रमुख स्थलों पर लग्जरी रिसॉर्ट, वाटर स्पोर्ट्स और नेचर कैंप विकसित किए जाएंगे। यह पहल उन पर्यटकों को आकर्षित करेगी, जो आराम, मनोरंजन और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच समय बिताना चाहते हैं।
धार्मिक और हेरिटेज पर्यटन पर विशेष फोकस
छत्तीसगढ़ धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी बेहद समृद्ध राज्य है। नई नीति में धार्मिक, इको, एथनिक, एडवेंचर और हेरिटेज पर्यटन स्थलों को विशेष रूप से बढ़ावा देने की योजना है। दंतेवाड़ा, चित्रकोट, बस्तर, मैनपाट और सिरपुर जैसे स्थलों को प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
वेलनेस और हेल्थ टूरिज्म की संभावनाएं
नई पर्यटन नीति में वेलनेस सेंटर और स्वास्थ्य पर्यटन को भी शामिल किया गया है। प्राकृतिक चिकित्सा, योग, आयुर्वेद और वेलनेस रिट्रीट्स के माध्यम से हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा।
यह पहल खास तौर पर उन पर्यटकों को आकर्षित करेगी, जो शांति, स्वास्थ्य और प्राकृतिक उपचार की तलाश में रहते हैं। पर्यटन को आर्थिक सुधार का आधार बनाने की योजना छत्तीसगढ़ सरकार पर्यटन को राज्य के आर्थिक सुधार का एक मजबूत आधार मान रही है। राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता, घने जंगल, जलप्रपात, पठार, पौराणिक महत्व और समृद्ध संस्कृति होने के बावजूद अब तक पर्यटन का पूरा लाभ नहीं मिल सका है। सरकार का मानना है कि सुनियोजित पर्यटन विकास से न केवल राजस्व में वृद्धि होगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
भगवान राम से जुड़ा है छत्तीसगढ़ का इतिहास
छत्तीसगढ़ का धार्मिक और पौराणिक महत्व भी इसकी बड़ी ताकत है। मान्यता है कि भगवान राम का वनगमन और ननिहाल इसी क्षेत्र में रहा। रामायण से जुड़े स्थलों को पर्यटन से जोड़कर धार्मिक पर्यटन को नई दिशा दी जा सकती है। नई नीति में इन स्थलों के विकास और प्रचार-प्रसार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
स्थानीय लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
नई पर्यटन नीति का एक अहम उद्देश्य स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। होम-स्टे, गाइड सेवा, हस्तशिल्प, लोक कला और स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़कर ग्रामीण और आदिवासी युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे पलायन की समस्या भी कम होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
अगले वित्तीय वर्ष से लागू होगी नई नीति
राज्य सरकार द्वारा तैयार की जा रही नई पर्यटन नीति को अगले वित्तीय वर्ष से लागू किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से चयनित पर्यटन स्थलों का विकास और संचालन शुरू किया जाएगा।
सरकार को उम्मीद है कि यह नीति छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
छत्तीसगढ़ की नई पर्यटन नीति राज्य के लिए एक दूरदर्शी और महत्वाकांक्षी पहल है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल, इको टूरिज्म पर जोर, सब्सिडी और अधोसंरचना विकास जैसे प्रावधानों के जरिए सरकार पर्यटन उद्योग को नई दिशा देने जा रही है।
बस्तर, जशपुर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में पर्यटन विकास से न सिर्फ राज्य की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा। यदि यह नीति योजनाबद्ध तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी मजबूत जगह बना सकता है।







