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ईसा मसीह यीशु के जन्म की खुशी में क्रिसमस और खास रौनक के 12 दिन

ईसा मसीह यीशु के जन्म की खुशी में क्रिसमस
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 25, 2025 10:36 पूर्वाह्न
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क्रिसमस केवल 25 दिसंबर का एक दिन नहीं है बल्कि यह आनंद आशा और शांति का एक लंबा उत्सव है। ईसाई परंपरा में इसे क्रिसमसटाइड (Christmastide) कहा जाता है जो 25 दिसंबर से शुरू होकर 6 जनवरी एपिफेनी तक चलता है। इन 12 दिनों का हर दिन अपने आप में एक अनोखा संदेश और इतिहास समेटे हुए है।

ईसा मसीह यीशु के जन्म की खुशी में क्रिसमस

​क्रिसमस के 12 दिन आस्था परंपरा और उल्लास की यात्रा

​ईसा मसीह का जन्म मानवता के लिए ईश्वर का सबसे बड़ा उपहार माना जाता है। बाइबिल के अनुसार जब यीशु का जन्म हुआ तो आकाश में एक दिव्य तारा चमका जिसने पूरी दुनिया को मुक्तिदाता के आगमन का संदेश दिया। इसी खुशी को मनाने के लिए क्रिसमस के बाद के 12 दिन निर्धारित किए गए हैं।

​पहला दिन 25 दिसंबर – प्रभु यीशु का जन्म (The Nativity)

​यह उत्सव का मुख्य दिन है। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।

  • महत्व- इस दिन मरियम और यूसुफ के पुत्र के रूप में बेथलहम की एक चरनी में यीशु का जन्म हुआ। ​
  • परंपरा- मध्यरात्रि की प्रार्थना Midnight Mass उपहारों का आदान-प्रदान और परिवार के साथ भव्य दावत। इस दिन शांति का संदेश मुख्य होता है।​

दूसरा दिन 26 दिसंबर – सेंट स्टीफन डे (St. Stephen’s Day)

​इसे कई देशों में बॉक्सिंग डे के रूप में भी मनाया जाता है।

  • ​महत्व- सेंट स्टीफन ईसाई धर्म के पहले शहीद Martyr थे। यह दिन निस्वार्थ सेवा और त्याग को समर्पित है। ​
  • परंपरा- बॉक्सिंग डे का अर्थ मुक्केबाजी नहीं बल्कि गरीबों के लिए दान के बॉक्स खोलना है। लोग अपनी खुशियों में से कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को दान करते हैं।

​तीसरा दिन 27 दिसंबर – सेंट जॉन का पर्व (St. John the Apostle)

​सेंट जॉन को यीशु का सबसे प्रिय शिष्य माना जाता है, जिन्होंने प्रेम पर सबसे अधिक जोर दिया। ​

  • महत्व-  यह दिन प्रेम और दोस्ती के नाम है। जॉन ने ही सिखाया कि ईश्वर प्रेम है। ​
  • परंपरा- इस दिन परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं। कई जगहों पर इस दिन अंगूर का रस या वाइन को आशीर्वाद Blessing of Wine दिया जाता है।

​चौथा दिन 28 दिसंबर – मासूमों का पर्व (Feast of the Holy Innocents)

​यह दिन इतिहास की एक दुखद लेकिन महत्वपूर्ण घटना की याद दिलाता है। ​

  • महत्व- राजा हेरोद ने बालक यीशु को मारने के प्रयास में बेथलहम के सभी नवजात शिशुओं की हत्या करवा दी थी। ये बच्चे अनजाने में यीशु के लिए शहीद हुए। ​
  • परंपरा- यह दिन बच्चों की सुरक्षा और उनके कल्याण के लिए प्रार्थना करने का दिन है।

​पांचवां दिन 29 दिसंबर – सेंट थॉमस बेकेट का दिन

  • महत्व- सेंट थॉमस बेकेट कैंटरबरी के आर्कबिशप थे जिन्होंने चर्च की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण दे दिए। ​
  • परंपरा- यह दिन अपने विश्वास और सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

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​छठा दिन 30 दिसंबर – सेंट एगवर्थ (St. Egwin of Worcester)

  • महत्व- यह दिन परोपकार और अनाथों की मदद के लिए जाना जाता है। ​
  • परंपरा- लोग इस दिन सामाजिक कार्यों में समय बिताते हैं और सामुदायिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।​

सातवां दिन 31 दिसंबर – न्यू ईयर ईव और सेंट सिल्वेस्टर

  • ​महत्व- वर्ष का अंतिम दिन आत्म-चिंतन का होता है। सेंट सिल्वेस्टर ने रोम के सम्राट कॉन्सटेंटाइन को बपतिस्मा दिया था जिससे ईसाई धर्म को मान्यता मिली। ​
  • परंपरा- चर्च में वॉच नाइट सर्विस होती है जहाँ पुराने साल की गलतियों के लिए क्षमा मांगी जाती है और नए साल के लिए आशीर्वाद मांगा जाता है।

​आठवां दिन 1 जनवरी – मैरी मदर ऑफ गॉड (The Circumcision of Christ)

  • महत्व- नया साल यीशु के नामकरण और उनकी माता मरियम के सम्मान के साथ शुरू होता है। ​
  • परंपरा- नए संकल्प लेना और विश्व शांति के लिए प्रार्थना करना।

​नौवां दिन 2 जनवरी – सेंट बेसिल और सेंट ग्रेगरी

  • ​महत्व- ये दोनों संत महान विद्वान थे जिन्होंने शिक्षा और ज्ञान के प्रसार में जीवन लगा दिया।
  • परंपरा- यह दिन ज्ञान प्राप्त करने और दूसरों को शिक्षित करने के महत्व को दर्शाता है।​

दसवां दिन 3 जनवरी – यीशु का पवित्र नाम (The Feast of the Holy Name of Jesus)

  • महत्व- बाइबिल के अनुसार जन्म के आठवें दिन बालक का नाम यीशु रखा गया जिसका अर्थ है उद्धारकर्ता। 
  • परंपरा- इस दिन यीशु के नाम की महिमा गाई जाती है और विशेष भजन कीर्तन होते हैं।

​ग्यारहवां दिन 4 जनवरी – सेंट एलिजाबेथ एन सेटन

  • महत्व- यह दिन अमेरिका की पहली संत एलिजाबेथ को समर्पित है जिन्होंने गरीबों के लिए स्कूल खोले।
  • परंपरा-  शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का सम्मान करना।

​बारहवां दिन 5 जनवरी – एपिफेनी की पूर्व संध्या (Twelfth Night)

​यह क्रिसमस सीजन का अंतिम पड़ाव है।

  • ​महत्व- यह उस रात की याद दिलाता है जब तीन बुद्धिमान ज्योतिषी Three Wise Men तारे का पीछा करते हुए यीशु तक पहुँचने वाले थे।
  • ​परंपरा- इस रात क्रिसमस की सजावट उतारी जाती है और ट्वेल्थ नाइट केक काटा जाता है।

​6 जनवरी- एपिफेनी (The Epiphany)

​क्रिसमस के 12 दिनों के ठीक बाद 6 जनवरी को एपिफेनी मनाई जाती है। यह वह दिन है जब तीन राजाओं ने बालक यीशु को सोना लोबान और गंधरस भेंट किया था। यह इस बात का प्रतीक है कि यीशु केवल एक समुदाय के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए आए हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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