कोलकाता: फुटबॉल की दीवानगी के लिए दुनिया भर में मशहूर कोलकाता शहर से इन दिनों एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने खेल प्रेमियों को हैरान और बेहद परेशान कर दिया है। अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी की जिस विशाल प्रतिमा को देखने के लिए महज कुछ महीने पहले तक हजारों की भीड़ उमड़ रही थी, अब उसी प्रतिमा के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
सुरक्षा कारणों का सीधा हवाला देते हुए स्थानीय प्रशासन इस भारी-भरकम ढांचे को पूरी तरह से हटाने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में हुई एक प्रशासनिक जांच में इस स्टैच्यू के स्ट्रक्चर को लेकर कई गंभीर तकनीकी खामियां पाई गई हैं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया जा रहा है।यह पूरा मामला कोलकाता के सबसे व्यस्त और पॉश इलाकों में शुमार लेक टाउन का है। यहाँ करीब 5 महीने पहले करीब 70 फीट ऊंची मेसी की एक भव्य प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस फाइबर ग्लास प्रतिमा में मेसी को ऐतिहासिक फीफा विश्व कप की चमचमाती ट्रॉफी हाथ में लिए हुए दिखाया गया है, जो रात के वक्त लाइटों की रोशनी में बेहद खूबसूरत नजर आती थी। लेकिन अब यही खूबसूरती स्थानीय लोगों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है।
तेज हवाओं ने हिलाया ढांचा, रस्सियों के सहारे टिकी ‘साख’
लेक टाउन के स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से जब भी इलाके में तेज हवाएं चलती हैं, तो यह 70 फीट ऊंची गगनचुंबी प्रतिमा हल्की-हल्की डोलने लगती है। चूंकि मानसून का सीजन बिल्कुल सिर पर है और कोलकाता में प्री-मानसून की बारिश शुरू हो चुकी है, ऐसे में लोगों का डरना लाजिमी है। स्थानीय लोगों को अंदेशा है कि अगर भारी बारिश के साथ तेज आंधी या तूफान आया, तो यह विशालकाय ढांचा ताश के पत्तों की तरह ढह सकता है।
इलाके के कुछ सजग नागरिकों ने खतरे को भांपते हुए तुरंत इसकी लिखित शिकायत स्थानीय पुलिस, नगरपालिका और नगर निगम प्रशासन से की। जांच के बाद इंजीनियरों के मुताबिक, प्रतिमा की कुल ऊंचाई के अनुपात में उसका जो जमीनी बेस तैयार किया गया था, वह बहुत कमजोर है। हवा के भारी दबाव को झेलने की क्षमता इस ढांचे के भीतर है ही नहीं, और इसका ऊपरी हिस्सा कभी भी अपना संतुलन खोकर सड़क पर आ गिर सकता है।फिलहाल, किसी बड़ी अनहोनी या हादसे को रोकने के लिए प्रशासन ने आनन-फानन में इस 70 फीट ऊंची प्रतिमा को चारों तरफ से मोटी-मोटी रस्सियों और लोहे के मोटे तारों से बांधकर किसी तरह रोकने की अस्थायी कोशिश की है। सोशल मीडिया पर रस्सियों और क्रेन के तारों में जकड़े लाचार मेसी की तस्वीरें इन दिनों खूब वायरल हो रही हैं, जिसे लेकर प्रशासन की जमकर किरकिरी हो रही है।
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पीडब्ल्यूडी की जमीन पर ‘अवैध’ निर्माण? अनुमति पर उठे गंभीर सवाल
जानकारी के अनुसार, जिस मुख्य सड़क के किनारे इस विशाल प्रतिमा को खड़ा किया गया, वह जमीन दरअसल राज्य के लोक निर्माण विभाग के अधीन आती है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इस विशालकाय निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले न तो पीडब्ल्यूडी से कोई लिखित अनुमति ली गई और न ही स्थानीय दमकल विभागसे कोई जरूरी अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया था। यानी इतने बड़े स्ट्रक्चर का कोई सेफ्टी ऑडिट हुआ ही नहीं था।अब कोलकाता के गलियारों में यह बड़ा सवाल गूंज रहा है कि बिना किसी आधिकारिक मंजूरी, बिना किसी आर्किटेक्चरल नक्शे और बिना किसी सेफ्टी ऑडिट के, शहर के इतने वीआईपी और व्यस्त इलाके में 70 फीट ऊंचा ढांचा आखिर कैसे खड़ा कर दिया गया? क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस पांच महीने तक आंखें मूंदे सो रहे थे, या फिर इस पूरे खेल के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक रसूख काम कर रहा था जिसके आगे नियमों की धज्जियां उड़ा दी गईं?
सुरक्षा की चिंता और आगे की राह
इंजीनियरों की प्रारंभिक रिपोर्ट में इस संरचना को पूरी तरह ‘असुरक्षित’ घोषित कर दिया गया है, इसलिए प्रशासन अब किसी भी तरह का जोखिम या बदनामी मोल लेने के मूड में नहीं दिख रहा है।
अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, इस हफ्ते के अंत तक प्रतिमा को पूरी तरह से वहां से हटा दिया जाएगा। हालांकि, इसे नष्ट करने के बजाय किसी दूसरे खुले और सुरक्षित मैदान में स्थानांतरित करने के विकल्प पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। दूसरी तरफ, कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों का एक बड़ा वर्ग इस फैसले से उदास है। उनका कहना है कि इस प्रतिमा को पूरी तरह हटाने के बजाय इसमें तकनीकी सुधार करके इसके बेस को मजबूत किया जाना चाहिए, क्योंकि यह स्टैच्यू महज पांच महीनों में ही शहर के फुटबॉल के प्रति जुनून और पागलपन का एक बड़ा प्रतीक बन चुकी थी।
आने वाले दो दिनों के भीतर जिला प्रशासन, पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों और संबंधित क्लब प्रबंधन के बीच एक हाई-लेवल मीटिंग होने की संभावना है, जिसके बाद ही मेसी की इस प्रतिमा के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। फिलहाल एहतियात के तौर पर पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है, बैरिकेडिंग कर दी गई है और आम लोगों को इस प्रतिमा के बहुत करीब जाने या इसके नीचे खड़े होने से पूरी तरह रोक दिया गया है।







