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फुटबॉल के बादशाह मेसी ने दिया धोखा केरल सरकार का बड़ा आरोप 

फुटबॉल के बादशाह मेसी ने दिया धोखा केरल सरकार का बड़ा आरोप 
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 4, 2026 12:47 अपराह्न
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तिरुवनंतपुरम।केरल की गलियों में फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, रूह में बसने वाला जुनून है। यहाँ के लोग चाय की टपरी से लेकर बड़े स्टेडियमों तक महीनों से बस एक ही ख्वाब बुन रहे थे—लियोनेल मेसी को अपनी आँखों के सामने खेलते देखना। लेकिन अब वह ख्वाब एक कड़वे विवाद में बदल चुका है। केरल सरकार ने अर्जेंटीना की नेशनल फुटबॉल टीम पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए इसे राज्य के साथ एक बड़ा ‘धोखा’ करार दिया है।

पहले जागी उम्मीद,फिर पसरा सन्नाटा

यह महज एक मैच की बात नहीं थी, बल्कि केरल के गौरव का सवाल था। राज्य सरकार और आयोजकों ने इस ऐतिहासिक पल के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। खेल मंत्री वी. अब्दुर्रहमान खुद इस मिशन की निगरानी कर रहे थे। जानकारी के मुताबिक, विश्व चैंपियन टीम की मेजबानी के लिए करीब ₹250 करोड़ का भारी-भरकम बजट और सुरक्षा की अभूतपूर्व तैयारियां की गई थीं। लेकिन जब जश्न का वक्त करीब आया, तो केरल के हाथ लगी सिर्फ मायूसी। न टीम का पता चला, न ही मैच की कोई सुगबुगाहट दिखी।

जज्बातों से खेल गए मेसी?

केरल के खेल मंत्री की बातों में इस वक्त केवल प्रशासनिक शिकायत नहीं, बल्कि एक गहरी टीस सुनाई देती है। उनका सीधा आरोप है कि अर्जेंटीना की टीम ने पहले आने की रजामंदी दी, कागजी और आर्थिक समझौतों पर बात आगे बढ़ी, लेकिन ऐन वक्त पर उन्होंने पीठ दिखा दी। मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा, “यह केवल सरकार के साथ वादाखिलाफी नहीं है, बल्कि केरल के उन लाखों प्रशंसकों के साथ विश्वासघात है जो अपनी आंखों में मेसी की झलक लिए बैठे थे।”

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केवल खेल नहीं,भावनाओं का सैलाब

केरल में फुटबॉल की दीवानगी का आलम यह है कि यहाँ छोटे-छोटे बच्चे भी मेसी की ‘नंबर 10’ वाली जर्सी पहनकर सोते हैं। जब मेसी के आने की खबर उड़ी, तो लोगों ने उत्सव की तैयारी कर ली थी। होटल बुक हो चुके थे, दूर-दराज के इलाकों से आने वालों ने टिकटों की जुगत लगा ली थी। आज जब यह सपना टूट गया है, तो लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

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कानूनी कार्यवाही की तैयारी

केरल सरकार अब इस अपमान को चुपचाप सहने के मूड में नहीं है। मंत्री अब्दुर्रहमान ने साफ संकेत दिए हैं कि सरकार इस मामले में कानूनी रास्ते तलाश रही है। उनका तर्क है कि अगर वित्तीय समझौतों के बाद भी कोई पक्ष पीछे हटता है, तो यह केवल नैतिक हार नहीं, बल्कि एक कानूनी अपराध भी है। सरकार अब आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की मांग करने पर भी विचार कर रही है।

कागजी कार्यवाही पर सवाल

हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार भी घेरे में है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अनुबंध (Contract) में ऐसी क्या कमी रह गई कि इतनी बड़ी टीम आखिरी वक्त पर मुकर गई? क्या कागजी कार्रवाई उतनी पुख्ता नहीं थी? विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरी तरफ, लियोनेल मेसी या अर्जेंटीना फुटबॉल एसोसिएशन (AFA) की ओर से अभी तक रहस्यमयी खामोशी छाई हुई है। इस चुप्पी ने विवाद को और हवा दे दी है।

भविष्य के लिए सबक

यह घटना केरल के लिए एक कड़वा सबक भी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े आयोजनों में केवल उत्साह काफी नहीं होता, बल्कि कानूनी बारीकियां और स्पष्ट शर्तें ही सुरक्षा कवच का काम करती हैं।

मैदान पर हार-जीत तो चलती रहती है, लेकिन यहाँ लड़ाई ‘साख’ की है। फिलहाल केरल के खेल प्रेमी उसी पुराने सवाल के साथ खड़े हैं—क्या सच में अर्जेंटीना ने उन्हें ठगा है या फिर कहीं कोई बड़ी गलतफहमी रह गई? जवाब फिलहाल भविष्य के गर्भ में है, लेकिन मेसी को अपनी धरती पर देखने का केरल का इंतजार अब और लंबा और दर्दनाक हो गया है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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