केंद्रीय बजट से ठीक पहले भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार सुबह ऐसा झटका लगा, जिसने निवेशकों की नींद उड़ा दी। कारोबार शुरू होते ही बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और महज 15 मिनट के भीतर निवेशकों की करीब चार लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में फिसल गए, जिससे बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया।
शुरुआती कारोबार में भारी दबाव, सेंसेक्स 600 से ज्यादा अंक लुढ़का
शुक्रवार को जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों ने मुनाफावसूली और सतर्कता का रुख अपनाया। इसके चलते बीएसई सेंसेक्स करीब 625 अंकों की गिरावट के साथ 81,941 के स्तर तक टूट गया, जो लगभग 0.75 फीसदी की गिरावट दर्शाता है। इसी तरह निफ्टी 50 भी 194 अंक फिसलकर 25,224 के आसपास पहुंच गया, जिससे यह 25,300 के अहम स्तर से नीचे चला गया।
शुरुआती मिनटों की इस गिरावट ने साफ संकेत दे दिया कि बाजार फिलहाल किसी भी जोखिम को लेने के मूड में नहीं है।
15 मिनट में चार लाख करोड़ स्वाहा, निवेशकों की संपत्ति पर सीधा असर
बाजार में आई इस तेज गिरावट का सबसे बड़ा असर निवेशकों की कुल संपत्ति पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 455.73 लाख करोड़ रुपये रह गया, जबकि इससे पहले यह इससे कहीं ज्यादा था। महज 15 मिनट के भीतर करीब चार लाख करोड़ रुपये का बाजार पूंजीकरण साफ हो जाना, इस बात को दर्शाता है कि बिकवाली कितनी व्यापक और तेज थी।
छोटे निवेशकों से लेकर बड़े संस्थागत निवेशकों तक, सभी को इस गिरावट ने झटका दिया।
बजट से पहले क्यों डरे निवेशक? …अनिश्चितता ने बढ़ाई सतर्कता
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह आगामी केंद्रीय बजट को माना जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को बजट पेश करने वाली हैं, और इस बार बजट को लेकर उम्मीदों के साथ-साथ आशंकाएं भी काफी ज्यादा हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल “देखो और इंतजार करो” की रणनीति अपना रहे हैं। बजट में टैक्स, खर्च, घाटा और विकास को लेकर क्या संकेत मिलेंगे इसी को लेकर बाजार असमंजस में है।
बजट के लिए विशेष ट्रेडिंग सत्र, बाजार की नज़र हर घोषणा पर
इस बार बजट के दिन विशेष ट्रेडिंग सत्र रखा गया है, जिससे बाजार की संवेदनशीलता और बढ़ गई है। निवेशक जानते हैं कि बजट के बाद सेक्टर-वार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के अनुसार,“बजट नजदीक आने के साथ बाजार के सामने कुछ चुनौतियां हैं, लेकिन साथ ही कुछ सकारात्मक अवसर भी मौजूद हैं।” फिलहाल चुनौतियों का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
रुपये की कमजोरी बनी बड़ी चिंता
डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब शेयर बाजार पर दबाव की दूसरी बड़ी वजह भारतीय रुपये की कमजोरी रही। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले हाल के सत्रों में रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास बना हुआ है।
शुक्रवार सुबह भले ही रुपया 7 पैसे की मामूली मजबूती के साथ 91.92 प्रति डॉलर पर पहुंचा, लेकिन इससे एक दिन पहले यह 91.9850 के स्तर तक गिर चुका था, जो ऐतिहासिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति मानी जाती है।
कमजोर रुपया क्यों डराता है बाजार? पूंजी निकासी और महंगाई का खतरा
रुपये की गिरावट से विदेशी निवेशकों की चिंता बढ़ जाती है। कमजोर मुद्रा का मतलब है—
- विदेशी पूंजी के बाहर जाने का खतरा
- आयात महंगा होना
- महंगाई पर दबाव
- चालू खाता घाटे की आशंका
इन सभी कारणों से शेयर बाजार पर नकारात्मक असर पड़ता है और निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन,पांच महीने के उच्च स्तर पर तेल
तीसरी बड़ी वजह रही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई की आशंकाओं ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
भारत जैसे देश पर तेल महंगा होने का असर,महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर
भारत एक शुद्ध तेल आयातक देश है, यानी हमें अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदना पड़ता है। ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने का सीधा असर पड़ता है—
- पेट्रोल-डीजल महंगे होते हैं
- परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है
- कंपनियों का मुनाफा घटता है
- महंगाई बढ़ने की आशंका होती है
इन सभी बातों का असर शेयर बाजार की धारणा पर साफ दिखाई देता है।
वैश्विक संकेत भी रहे कमजोर,विदेशी बाजारों से नहीं मिला सहारा
घरेलू कारणों के अलावा वैश्विक बाजारों से भी खास सकारात्मक संकेत नहीं मिले। अमेरिका और यूरोप के बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। ब्याज दरों,भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक मंदी की आशंकाओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
एशियाई बाजारों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला, जिससे भारतीय बाजार को कोई ठोस समर्थन नहीं मिल सका।
किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर?
आईटी, बैंकिंग और मेटल शेयर दबाव में
शुक्रवार की गिरावट में आईटी, बैंकिंग, मेटल और ऑयल-गैस सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली। इसके साथ ही आईटी शेयरों पर कमजोर रुपये और वैश्विक मांग की चिंता हावी रही। वहीं बैंकिंग शेयर बजट से जुड़ी नीतिगत अनिश्चितता के कारण दबाव में रहे मेटल और एनर्जी शेयरों पर कच्चे तेल और वैश्विक संकेतों का असर पड़ा।
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?सबकी नजर बजट और वैश्विक संकेतों पर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ सत्रों तक उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। केंद्रीय बजट के बाद ही बाजार को स्पष्ट दिशा मिलने की संभावना है।
अगर बजट में विकास, निवेश और उपभोक्ता मांग को लेकर सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो बाजार में राहत की रैली देखी जा सकती है। वहीं अगर उम्मीदों पर पानी फिरा, तो गिरावट और गहरी हो सकती है।
निवेशकों के लिए क्या रणनीति सही? घबराने के बजाय समझदारी जरूरी
विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि घबराकर फैसले न लें। बजट जैसे बड़े इवेंट से पहले बाजार में अस्थिरता सामान्य होती है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय धैर्य रखने और गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर रखने का है। बजट से पहले आई यह गिरावट बाजार की अनिश्चितता, सतर्कता और वैश्विक दबावों का नतीजा है। 15 मिनट में चार लाख करोड़ का डूबना भले ही चौंकाने वाला हो, लेकिन यह शेयर बाजार की प्रकृति का हिस्सा है। अब सारी निगाहें केंद्रीय बजट पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि बाजार को राहत मिलेगी या दबाव और बढ़ेगा।







