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बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के आसान तरीके

बच्चों की याददाश्त बढ़ाने के आसान तरीके
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 1, 2026 7:33 अपराह्न
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बच्चों की याददाश्त (Memory) बढ़ाना कोई जादू नहीं, बल्कि सही आदतों, पोषण और मानसिक व्यायाम का एक सुंदर मेल है। 

बच्चों की याददाश्त बढ़ाने की संपूर्ण गाइड

बच्चों का मस्तिष्क एक गीली मिट्टी की तरह होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, बचपन में न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) सबसे अधिक होती है, जिसका अर्थ है कि उनके सीखने और याद रखने की क्षमता चरम पर होती है।

आहार और पोषण

मस्तिष्क को ऊर्जा के लिए सही ईंधन की आवश्यकता होती है। याददाश्त बढ़ाने के लिए इन चीज़ों को शामिल करें:

  • ओमेगा-3 फैटी एसिड-  अखरोट, अलसी के बीज और मछली में पाया जाता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है।
  • एंटीऑक्सीडेंट्स – जामुन (Blueberries/Strawberries) और खट्टे फल मस्तिष्क की नसों को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां –  पालक और ब्रोकली में विटामिन-K और ल्यूटिन होता है, जो संज्ञानात्मक कार्यों को तेज करता है।
  • सूखे मेवे और बीज – बादाम और कद्दू के बीज याददाश्त बढ़ाने वाले जिंक और विटामिन-E से भरपूर होते हैं।

वैज्ञानिक तकनीकें 

केवल रटने से बेहतर है कि बच्चा जानकारी को ‘संसाधित’ (Process) करना सीखे|

  • विजुअलाइजेशन (Visualization) – बच्चों को कहें कि वे जो पढ़ रहे हैं, उसकी एक फिल्म अपने दिमाग में चलाएं। चित्र शब्दों से ज्यादा समय तक याद रहते हैं।
  • चंकिंग (Chunking) – बड़ी जानकारी को छोटे टुकड़ों में बांट दें। जैसे मोबाइल नंबर को 3-3-4 के समूह में याद करना।
  • एक्रोनिम्स (Acronyms) – जैसे इंद्रधनुष के रंगों के लिए ‘VIBGYOR’।
  • सिखाना (The Feynman Technique)-  बच्चे से कहें कि वह आपको वह पाठ पढ़ाए जो उसने अभी सीखा है। जब हम दूसरों को समझाते हैं, तो हमारा कॉन्सेप्ट 90% तक स्पष्ट हो जाता है।

जीवनशैली और आदतें

याददाश्त केवल पढ़ाई पर निर्भर नहीं करती, बल्कि शरीर की स्थिति पर भी निर्भर करती है|

  • पर्याप्त नींद (Quality Sleep)-  नींद के दौरान ही मस्तिष्क ‘मेमोरी कंसोलिडेशन’ करता है, यानी दिनभर की सीखी गई बातों को शॉर्ट-टर्म मेमोरी से लॉन्ग-टर्म मेमोरी में भेजता है। 6-12 साल के बच्चों के लिए 9-11 घंटे की नींद अनिवार्य है।
  • शारीरिक व्यायाम – खेलने कूदने से मस्तिष्क में BDNF (Brain-Derived Neurotrophic Factor) नामक प्रोटीन बढ़ता है, जो याददाश्त की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करता है।
  •  पानी का सेवन – मस्तिष्क का 75% हिस्सा पानी है। हल्की सी डिहाइड्रेशन भी एकाग्रता कम कर सकती है।

माइंड गेम्स और एक्टिविटीज

मनोरंजन के साथ मस्तिष्क की कसरत कराएं:

गतिविधिलाभ 
शतरंज (Chess)रणनीतिक सोच और एकाग्रता बढ़ाता है। 
पहेलियाँ (Puzzles)समस्या समाधान कौशल में सुधार। 
कहानी सुनाना कल्पना शक्ति और क्रमबद्ध याददाश्त (Sequential Memory) का विकास। 
नया हुनर सीखना पेंटिंग या कोई वाद्य यंत्र (Musical Instrument) बजाना नए न्यूरॉन्स बनाता है। 

डिजिटल डिटॉक्स और तनाव प्रबंधन

आजकल बच्चों की याददाश्त कम होने का एक बड़ा कारण ‘डिजिटल ओवरलोड’ है।

स्क्रीन टाइम कम करें-  अत्यधिक मोबाइल और टीवी देखने से ‘अटेंशन स्पैन’ (एकाग्रता का समय) कम हो जाता है।

मेडिटेशन (ध्यान) – बच्चों को 5 मिनट गहरी सांस लेने का अभ्यास कराएं। यह ‘कोर्टिसोल’ (तनाव हार्मोन) को कम करता है, जो याददाश्त का दुश्मन है।

माता-पिता के लिए विशेष टिप्स

  • सकारात्मक प्रोत्साहन-  बच्चे को “तुम्हारी याददाश्त कमजोर है” कहने के बजाय, उसकी छोटी जीत पर उसकी प्रशंसा करें।
  • सवाल पूछने की आजादी-  उन्हें “क्यों” और “कैसे” पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। जिज्ञासा याददाश्त की जननी है।
  • रूटीन बनाएं – एक निश्चित दिनचर्या मस्तिष्क को अनुशासित रखती है, जिससे वह जानकारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर पाता है।

बच्चों की याददाश्त बढ़ाना एक निरंतर प्रक्रिया है। इसमें धैर्य, प्यार और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। जब आप खान-पान, खेल और पढ़ाई की तकनीकों में संतुलन बनाते हैं, तो परिणाम चमत्कारी होते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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