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महावीर जयंती पर व्रत एवं पूजा विधि शुभ मुहूर्त पारण के साथ 

महावीर जयंती पर व्रत एवं पूजा विधि शुभ मुहूर्त पारण के साथ 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 28, 2026 1:47 अपराह्न
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महावीर जयंती जैन धर्म के अनुयायियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र त्योहार है। यह पर्व जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप में मनाया जाता है।

​महावीर जयंती 2026 –  एक आध्यात्मिक परिचय

​भगवान महावीर का जन्म बिहार के कुंडग्राम (वैशाली) में इक्ष्वाकु वंश के राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के यहाँ हुआ था। उनका बचपन का नाम वर्द्धमान था। उन्होंने 30 वर्ष की आयु में सांसारिक सुखों का त्याग कर संयम का मार्ग अपनाया और 12 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद ‘केवल ज्ञान’ प्राप्त किया।

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​शुभ मुहूर्त (Mahavir Jayanti 2026 Shubh Muhurat)

​वर्ष 2026 में महावीर जयंती की महत्वपूर्ण तिथियां इस प्रकार हैं:

  • तिथि –  31 मार्च, 2026 (मंगलवार)
  • चैत्र शुक्ल त्रयोदशी प्रारंभ –  30 मार्च, 2026 को शाम से
  • चैत्र शुक्ल त्रयोदशी समाप्त –  31 मार्च, 2026 की देर शाम तक

​महावीर जयंती व्रत एवं पूजा विधि

​महावीर जयंती का व्रत आत्म-शुद्धि और अहिंसा के संकल्प का प्रतीक है। इसकी विधि निम्नलिखित चरणों में संपन्न की जाती है

​ प्रातःकाल की तैयारी

  • ​सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ (अधिमानतः श्वेत) वस्त्र धारण करें।
  • ​घर के मंदिर की सफाई करें और भगवान महावीर की प्रतिमा को स्वच्छ जल से स्नान कराएं।

​ अभिषेक और पूजन

  • अभिषेक –  जैन मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का ‘क्षीराभिषेक’ (दूध और जल से अभिषेक) किया जाता है। घर पर आप शुद्ध जल या पंचामृत से अभिषेक कर सकते हैं।
  • अष्टद्रव्य पूजा – जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेद्य, दीप, धूप और फल—इन आठ द्रव्यों से भगवान की अर्चना करें।
  • मंत्र जाप –  पूजन के दौरान “ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं णमो अरिहंताणं” या “णमोकार मंत्र” का निरंतर जाप करें।

​ शोभायात्रा और प्रवचन

  • ​इस दिन जैन समाज द्वारा भव्य शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इसमें शामिल होना और भगवान के रथ को खींचना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
  • ​मंदिरों में विद्वानों द्वारा भगवान महावीर के ‘पंचशील सिद्धांत’ (अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह) पर प्रवचन सुनें।

​व्रत में क्या खाएं और पारण विधि

​महावीर जयंती पर कई लोग निराहार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ लोग ‘एकासन’ (दिन में एक बार भोजन) करते हैं।

  • पारण का समय –  व्रत का पारण अगले दिन (चतुर्दशी) सूर्योदय के पश्चात विधिवत पूजन करके किया जाता है।
  • सात्विकता –  पारण के समय सादा और सात्विक भोजन ग्रहण करें। इसमें लहसुन, प्याज या गरिष्ठ भोजन से परहेज करें।

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​व्रत के दौरान क्या न करें (वर्जित कार्य)

​जैन धर्म में सूक्ष्म जीवों की रक्षा पर अत्यधिक बल दिया गया है। महावीर जयंती के व्रत में निम्नलिखित बातों का कड़ाई से पालन करना चाहिए

  • हिंसा से बचें –  मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं। यहाँ तक कि छोटे कीट-पतंगों का भी ध्यान रखें।
  • कंदमूल का त्याग –  इस दिन जमीकंद (जैसे आलू, प्याज, लहसुन, गाजर, मूली) का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है क्योंकि जैन दर्शन के अनुसार इनमें अनंत सूक्ष्म जीव होते हैं।
  • क्रोध और वाद-विवाद –  व्रत के दिन अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें। किसी की निंदा न करें और न ही क्रोध करें।
  • रात्रि भोजन –  जैन धर्म के सिद्धांतों के अनुसार सूर्यास्त के बाद भोजन करना निषिद्ध है। व्रत के दिन इसका विशेष ध्यान रखें।
  • व्यसन: तंबाकू, शराब या किसी भी प्रकार के नशे से पूरी तरह दूर रहें।

​भगवान महावीर के पंचशील सिद्धांत –  जीवन का सार

​यदि आप व्रत रख रहे हैं तो इन पांच सिद्धांतों को आत्मसात करना ही सच्ची पूजा है

सिद्धांतअर्थ
अहिंसाकिसी भी प्राणी को मन, वचन या कर्म से दुख न देना।
सत्यसदैव मधुर और हितकारी सत्य बोलना।
अचौर्यबिना दी हुई वस्तु को ग्रहण न करना (चोरी न करना)।
ब्रह्मचर्यअपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना और पवित्रता बनाए रखना।
अपरिग्रहआवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संचय न करना।

विशेष नोट –  महावीर जयंती केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं बल्कि अपनी आत्मा के भीतर झांकने और ‘जियो और जीने दो’ के संदेश को अपने आचरण में उतारने का दिन

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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