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आज दो शक्तिशाली देश के प्रमुख PM मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुंबई में बैठक

आज दो शक्तिशाली देश के प्रमुख PM मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुंबई में बैठक
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 17, 2026 8:24 अपराह्न
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यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मुंबई में होने वाली यह मुलाकात न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि भारत-फ्रांस संबंधों के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रही है।

भारत-फ्रांस रणनीतिक शिखर सम्मेलन 2026 –  मुंबई में शक्ति प्रदर्शन

17 फरवरी, 2026 का दिन भारत की सैन्य शक्ति और कूटनीतिक कौशल के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा की शुरुआत मुंबई से कर रहे हैं। यह पहला मौका है जब किसी फ्रांसीसी राष्ट्रपति की आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता दिल्ली के बजाय भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में हो रही है।

आगमन और स्वागत –  एक नए युग की शुरुआत

राष्ट्रपति मैक्रों और उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों का मुंबई आगमन उस समय हुआ जब भारत अपनी वायुसेना के आधुनिकीकरण के सबसे बड़े चरण में है। मुंबई के ‘लोक भवन’ में आयोजित इस शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और नवाचार है।

स्थान –  लोक भवन, मुंबई।

प्रमुख कार्यक्रम – द्विपक्षीय वार्ता, ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026’ का उद्घाटन और बिजनेस लीडर्स के साथ बैठक।

114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील (MRFA)

इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण 114 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा है, जिसे रक्षा विशेषज्ञ “सदी का सबसे बड़ा रक्षा अनुबंध” (Contract of the Century) कह रहे हैं।

डील की मुख्य बातें

  • अनुमानित लागत – लगभग 39 अरब डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये)।
  • प्रक्रिया –  रक्षा खरीद बोर्ड (DPB) और रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने इस सौदे को पहले ही हरी झंडी दे दी है।

मेक इन इंडिया  इस डील की सबसे खास बात यह है कि इन 114 विमानों में से अधिकांश का निर्माण भारत में किया जाएगा। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत निजी भारतीय कंपनियों और डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) के सहयोग से होगा।

सुपर राफेल (F4 और F5 स्टैंडर्ड)

इस सौदे में केवल सामान्य राफेल नहीं, बल्कि अत्याधुनिक संस्करण शामिल हैं

  • 88 सिंगल-सीटर और 26 डबल-सीटर विमान।
  • एफ-5 (Super Rafale) – डील के तहत मिलने वाले कुछ विमान भविष्य के ‘F5’ मानक के होंगे, जिनमें स्टेल्थ क्षमता (रडार से बचने की तकनीक) और अधिक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट होगा।
  • हथियार प्रणाली –  ये विमान मीटियर (Meteor) मिसाइल, स्कैल्प (SCALP) और हैमर (HAMMER) जैसे घातक हथियारों से लैस होंगे।

भारतीय वायुसेना के लिए यह क्यों जरूरी है?

भारतीय वायुसेना (IAF) वर्तमान में विमानों की कमी (Squadron Shortage) से जूझ रही है।

  • स्क्वाड्रन की स्थिति –  IAF के पास वर्तमान में स्वीकृत 42 स्क्वाड्रन के मुकाबले केवल 29-30 स्क्वाड्रन हैं।
  • चीन-पाकिस्तान की चुनौती – चीन की बढ़ती पांचवीं पीढ़ी के विमानों की संख्या और पाकिस्तान के आधुनिकीकरण को देखते हुए, राफेल की 6 अतिरिक्त स्क्वाड्रन भारत को आसमान में पूर्ण प्रभुत्व (Air Superiority) प्रदान करेंगी।
  • बहुआयामी भूमिका –  राफेल परमाणु हमला करने, समुद्री स्ट्राइक और दुश्मन के हवाई बचाव को नष्ट करने में सक्षम है।

मुंबई बैठक का रणनीतिक महत्व

मुंबई को इस बैठक के लिए चुनना भारत के ‘इंडो-पैसिफिक’ दृष्टिकोण को दर्शाता है। फ्रांस हिंद महासागर में भारत का सबसे भरोसेमंद साथी है।

  • नौसेना सहयोग – राफेल-एम (Naval version) की 26 विमानों की डील पहले से ही पाइपलाइन में है, जो आईएनएस विक्रांत पर तैनात होंगे। मुंबई की बैठक में इस पर भी अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
  • AI और टेक्नोलॉजी – दोनों नेता ‘AI इम्पैक्ट समिट’ में भाग लेंगे, जहाँ रक्षा के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर चर्चा होगी।

आर्थिक और औद्योगिक प्रभाव

यह डील केवल विमान खरीदने के बारे में नहीं है, बल्कि भारत में एक डिफेंस इकोसिस्टम बनाने के बारे में है:

  • रोजगार – भारत में उत्पादन लाइन शुरू होने से हजारों इंजीनियरों और तकनीशियनों को रोजगार मिलेगा।
  • MSME को लाभ – डसॉल्ट और सैफरन (Safran) जैसी फ्रांसीसी कंपनियाँ सैकड़ों भारतीय छोटी कंपनियों के साथ मिलकर कलपुर्जे बनाएंगी।
  • इंजन तकनीक – चर्चा है कि फ्रांस भारत के साथ मिलकर लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने के लिए 100% तकनीक हस्तांतरण (ToT) पर भी सहमत हो सकता है।

वैश्विक राजनीति पर असर

मोदी-मैक्रों की यह मुलाकात दुनिया को यह संदेश देती है कि भारत अब केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि एक सह-उत्पादक (Co-producer) बन गया है। रूस पर निर्भरता कम करने और पश्चिम के साथ एक संतुलित साझेदारी बनाने की दिशा में यह एक मास्टरस्ट्रोक है।

 “भारत और फ्रांस की दोस्ती केवल दो देशों के बीच का समझौता नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्थिरता का एक मजबूत आधार है।”

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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