संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच फलते-फूलते “रणनीतिक संबंधों” का एक नया अध्याय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद के बीच की केमिस्ट्री ने भारत-UAE संबंधों को व्यापारिक आदान-प्रदान से ऊपर उठाकर एक ‘अटूट विश्वास’ के धरातल पर खड़ा कर दिया है।
आमंत्रण का उद्देश्य- प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें आमंत्रित क्यों किया
प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति में UAE का स्थान बेहद खास है। इस आमंत्रण के पीछे कई ठोस कारण हैं-
- रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना – UAE भारत के लिए पश्चिम एशिया में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। मोदी चाहते हैं कि दोनों देश रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मिलकर काम करें।
- आर्थिक विकास और निवेश – भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और UAE के पास विशाल सॉवरेन वेल्थ फंड (Sovereign Wealth Fund) है। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए UAE का निवेश गेम-चेंजर है।
- प्रवासी भारतीयों का हित – UAE में लगभग 35 लाख भारतीय रहते हैं। उनकी सुरक्षा और कल्याण के लिए राष्ट्रपति के साथ सीधे संबंध बनाए रखना भारत की प्राथमिकता है।
यह राष्ट्रपति का कौन सा दौरा है?
शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का यह दौरा उनके राष्ट्रपति बनने के बाद की महत्वपूर्ण राजकीय यात्राओं में से एक है। विशेष रूप से, पिछले कुछ वर्षों में दोनों नेताओं के बीच यह चौथी या पांचवीं व्यक्तिगत मुलाकात है (जिसमें वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन और G20 शिखर सम्मेलन जैसे अवसर भी शामिल हैं)। यह दौरा दर्शाता है कि UAE के लिए भारत केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय मित्र है।
बंगाल की राजनीति में हलचल, अधीर रंजन चौधरी–पीएम मोदी भेंट के मायने क्या?
आज किन क्षेत्रों में समझौते (MoUs) होने की उम्मीद है?
विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरे पर निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में हस्ताक्षर होने की संभावना है|
- ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) – कच्चे तेल के भंडारण और LNG की दीर्घकालिक आपूर्ति पर नए करार।
- डिजिटल भुगतान – UPI (भारत) और JAYWAN (UAE) के बीच एकीकरण को और विस्तार देना।
- खाद्य सुरक्षा (Food Security) – ‘इंडिया-यूएई फूड कॉरिडोर’ परियोजना पर ठोस प्रगति, जिसमें UAE भारत में एग्रो-पार्क बनाने के लिए निवेश करेगा।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) – सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में संयुक्त उद्यम।
- शिक्षा और कौशल – IIT दिल्ली के अबू धाबी परिसर के बाद, कुछ और शिक्षण संस्थानों के सहयोग पर चर्चा।
व्यापार और अर्थव्यवस्था – आगे क्या उम्मीदें हैं?
भारत और UAE के बीच CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) लागू होने के बाद से व्यापार में भारी उछाल आया है।
- लक्ष्य – दोनों देशों ने गैर-तेल व्यापार (Non-oil trade) को अगले कुछ वर्षों में $100 बिलियन तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
- स्थानीय मुद्रा में व्यापार – डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रुपया और दिरहम में व्यापार करने की व्यवस्था को और सुगम बनाया जाएगा।
- लॉजिस्टिक्स – ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ (IMEC) को गति देने पर चर्चा होगी, जिसमें UAE एक मुख्य केंद्र है।
भविष्य की रणनीति – भारत और UAE का विजन
आगे की रणनीति केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी आधारित है-
- आतंकवाद पर कड़ा प्रहार- दोनों देश कट्टरपंथ और आतंकवाद के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग बढ़ाएंगे।
- I2U2 समूह – भारत, इजराइल, UAE और अमेरिका के साथ मिलकर तकनीक और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में काम करना।
- रक्षा निर्यात – भारत अब UAE को रक्षा उपकरण (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल या तेजस विमान) निर्यात करने की संभावनाएं तलाश रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लखनऊ में कमल के आकार का एक नया राष्ट्र प्रेरणा स्थल का किया लोकार्पण
संबंधों में क्या बढ़ोतरी होगी?
राष्ट्रपति के इस दौरे से संबंधों में निम्नलिखित सकारात्मक बदलाव आएंगे|
- विश्वास की नई ऊंचाई – व्यक्तिगत स्तर पर नेताओं के बीच विश्वास से नौकरशाही की बाधाएं कम होती हैं।
- सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति – वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत को तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- रोजगार के अवसर – UAE के निवेश से भारत में लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि भारत की ‘वेस्ट एशिया पॉलिसी’ सफल रही है। यह दौरा न केवल व्यापारिक समझौतों का केंद्र होगा, बल्कि यह दुनिया को संदेश देगा कि भारत और UAE मिलकर 21वीं सदी की नई आर्थिक धुरी बन रहे हैं।







