लखनऊ के गौरवशाली इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में लोकार्पित राष्ट्र प्रेरणा स्थल न केवल उत्तर प्रदेश की राजधानी का एक नया लैंडमार्क है बल्कि यह आधुनिक भारत की वैचारिक नींव और देशभक्ति का एक जीवंत केंद्र भी है।

राष्ट्र प्रेरणा स्थल – लखनऊ का नया वैचारिक केंद्र
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के वसंत कुंज क्षेत्र में गोमती नगर के विस्तार के रूप में विकसित यह राष्ट्र प्रेरणा स्थल जो लगभग 82 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका अनूठा कमल के आकार (Lotus Shape) का वास्तुशिल्प है जो भारतीय संस्कृति और विकास का प्रतीक है।
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण
तीन विशाल प्रतिमाएं-इस परिसर का हृदय इसकी तीन मुख्य प्रतिमाएं हैं जो देश के उन महान व्यक्तित्वों को समर्पित हैं जिन्होंने आधुनिक भारत की रूपरेखा तैयार की भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय.
ये तीनों प्रतिमाएं लगभग 60 फीट ऊंची हैं और इन्हें अत्याधुनिक हाईटेक तकनीक से निर्मित किया गया है। ये प्रतिमाएं न केवल आकार में विशाल हैं बल्कि इनमें प्रयुक्त धातु और शिल्पकला इन्हें दशकों तक सुरक्षित और चमकदार बनाए रखेगी।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल को सिर्फ एक पार्क के रूप में नहीं बल्कि एक अनुभव केंद्र (Experience Center) के रूप में डिजाइन किया गया है।
कमल के आकार का लेआउट
पूरे स्थल का मानचित्र ऊपर से देखने पर एक खिले हुए कमल जैसा प्रतीत होता है। कमल भारतीय दर्शन में पवित्रता और कीचड़ में भी खिलने की क्षमता का प्रतीक है जो विपरीत परिस्थितियों में देश के उत्थान का संदेश देता है।
हाई-टेक और आधुनिक सुविधाएं -डिजिटल म्यूजियम
परिसर में एक अत्याधुनिक संग्रहालय है जहाँ इन तीनों महापुरुषों के जीवन दर्शन उनके भाषण और संघर्षों को डिजिटल माध्यम से दिखाया गया है।
- ओपन एयर थिएटर -यहाँ सांस्कृतिक और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रमों के आयोजन के लिए एक विशाल एम्फीथिएटर बनाया गया है।
- लाइट एंड साउंड शो-रात के समय यहाँ लेजर लाइट और साउंड शो के जरिए भारत के गौरवशाली इतिहास की झलक प्रस्तुत की जाती है।
- हरित क्षेत्र और पर्यावरण-82 एकड़ के इस परिसर का एक बड़ा हिस्सा हरियाली से ढका हुआ है। यहाँ हजारों की संख्या में पौधे लगाए गए हैं और जल संचयन Rainwater Harvesting की आधुनिक व्यवस्था की गई है।
पर्यटन और आर्थिक प्रभाव
यह स्थल लखनऊ के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
- पर्यटन को बढ़ावा-इमामबाड़ा और रेजीडेंसी के बाद अब राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर्यटकों के लिए एक अनिवार्य गंतव्य बन गया है।
- स्थानीय रोजगार -इस परियोजना के संचालन और रखरखाव से स्थानीय स्तर पर सैकड़ों लोगों को रोजगार मिला है।
- शिक्षा का केंद्र -स्कूल और कॉलेजों के विद्यार्थियों के लिए यह स्थान शैक्षिक भ्रमण Educational Tour का एक उत्तम केंद्र है जहाँ वे भारत के राजनीतिक इतिहास को करीब से समझ सकते हैं।
राष्ट्र प्रेरणा स्थल का वैचारिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया था कि यह स्थल केवल ईंट और पत्थर का ढांचा नहीं है बल्कि यह पंच प्राण के संकल्पों को दोहराने की जगह है।
यहाँ स्थापित तीनों व्यक्तित्वों का योगदान अतुलनीय है|
- अटल जी का सुशासन और शांति का संदेश।
- डॉ. मुखर्जी का एक देश में दो विधान के विरुद्ध संघर्ष।
- दीनदयाल जी का अंतिम व्यक्ति के उदय अंत्योदय का विचार।
यह स्थल आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि कैसे शून्य से शिखर तक का सफर तय किया जाता है और राष्ट्र निर्माण के लिए किन आदर्शों की आवश्यकता होती है।
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