8 मई, 2026 को अमेरिकी न्यायिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ आया जब अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत (US Court of International Trade – CIT) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए 10% वैश्विक टैरिफ को पूरी तरह से असंवैधानिक और अवैध घोषित कर दिया। अदालत के इस फैसले ने न केवल वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों (Executive Powers) की सीमाओं पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।
मामले की पृष्ठभूमि – धारा 122 और टैरिफ का लागू होना
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 फरवरी, 2026 को एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से अमेरिका में आयात होने वाले सभी सामानों पर 10% का एक फ्लैट ‘यूनिवर्सल टैरिफ’ लागू किया था। इसके लिए उन्होंने 1974 के व्यापार अधिनियम (Trade Act of 1974) की धारा 122 का सहारा लिया था।
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धारा 122 क्या है?
धारा 122 राष्ट्रपति को यह शक्ति देती है कि यदि अमेरिका का भुगतान संतुलन (Balance of Payments) गंभीर रूप से बिगड़ जाए या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आर्थिक खतरा उत्पन्न हो तो वह अस्थायी रूप से (150 दिनों के लिए) 15% तक का आयात शुल्क लगा सकते हैं।
अदालत का फैसला और मुख्य आपत्तियाँ
न्यायाधीशों की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति का यह कदम “शक्तियों का दुरुपयोग” था। अदालत ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं के आधार पर इसे रद्द किया
- अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन – कोर्ट ने पाया कि राष्ट्रपति ने धारा 122 की शर्तों को पूरा नहीं किया। अमेरिका का भुगतान संतुलन उस स्थिति में नहीं था जिसे “आपातकालीन” कहा जा सके।
- कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी – अदालत ने कहा कि 1974 के अधिनियम का उद्देश्य व्यापारिक वार्ताओं को सुगम बनाना था, न कि राष्ट्रपति को बिना किसी ठोस आर्थिक डेटा के वैश्विक स्तर पर मनमाना शुल्क लगाने की खुली छूट देना।
- अनधिकृत कार्रवाई – कोर्ट के शब्दों में, “यह आदेश कानूनन अनधिकृत है क्योंकि यह विधायी शक्ति (Legislative Power) का अतिक्रमण करता है, जो मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है।”
फैसले का वैश्विक और घरेलू प्रभाव
आर्थिक प्रभाव
- बाजार की प्रतिक्रिया – फैसले के तुरंत बाद वॉल स्ट्रीट और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख देखा गया। निवेशकों ने इसे वैश्विक व्यापार युद्ध (Trade War) के खतरे के टलने के रूप में देखा।
- मुद्रास्फीति (Inflation) पर लगाम – विशेषज्ञों का मानना है कि 10% टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए दैनिक सामान महंगे हो रहे थे। अब इस फैसले से महंगाई दर में गिरावट आने की उम्मीद है।
कूटनीतिक प्रभाव
चीन, यूरोपीय संघ और भारत जैसे प्रमुख व्यापारिक भागीदारों ने इस फैसले का स्वागत किया है। कई देशों ने जवाबी टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली थी, जिसे अब टाल दिया गया है।
भविष्य की राह – ट्रंप प्रशासन का अगला कदम?
हालांकि अदालत ने टैरिफ रद्द कर दिए हैं लेकिन कानूनी जानकारों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकता है। राष्ट्रपति कार्यालय (White House) ने पहले ही बयान जारी कर कहा है कि वे “अमेरिकी नौकरियों की रक्षा के लिए सभी कानूनी विकल्पों का उपयोग करेंगे।”
8 मई 2026 का यह फैसला यह सिद्ध करता है कि अमेरिका में चेक एंड बैलेंस (Checks and Balances) की प्रणाली अभी भी अत्यंत प्रभावी है। यह निर्णय व्यापारिक नीतियों में कानून के शासन (Rule of Law) की प्रधानता को रेखांकित करता है और स्पष्ट करता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर भी राष्ट्रपति की आर्थिक शक्तियाँ असीमित नहीं हैं।
मुख्य तथ्य एक नजर में:
- तारीख: 8 मई 2026
- अदालत: अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत (CIT)
- फैसला: 10% वैश्विक टैरिफ रद्द
- कारण: धारा 122 का दुरुपयोग और शक्तियों का उल्लंघन
- प्रभावी तिथि: 24 फरवरी 2026 से लागू शुल्क अब अमान्य।







