डेलीबार्ता,नई दिल्ली- गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर देश की सुरक्षा के लिए तत्पर रहने वाले भारतीय सेना के वीर जवानों को राष्ट्रपति द्वारा वीरता और विशिष्ट सेवा पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल व्यक्तिगत शौर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि उन अनगिनत बलिदानों की कहानी भी है, जो सैनिक देश की एकता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर दिन देते हैं। इस अवसर पर 2 कीर्ति चक्र, 10 शौर्य चक्र (जिसमें 1 मरणोपरांत), 45 सेना मेडल (वीरता), 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल, 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल और 81 मेंशन-इन-डिस्पैच प्रदान किए गए।
यह सूची भारतीय सेना की उस जीवटता और समर्पण को दर्शाती है, जिसने चुनौतीपूर्ण हालात, घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ों और आतंकवाद से प्रभावित क्षेत्रों में भी देश की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा।
कीर्ति चक्र: सर्वोच्च वीरता का प्रतीक
मेजर अर्शदीप सिंह (1 असम राइफल्स),14 मई 2025 को भारत–म्यांमार सीमा पर विशेष गश्त के दौरान मेजर अर्शदीप सिंह और उनकी टीम पर घने जंगलों में अचानक उग्रवादियों ने हमला कर दिया। चारों ओर से हो रही भारी गोलीबारी के बावजूद मेजर अर्शदीप ने असाधारण साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के ठिकाने पर आक्रामक हमला किया। उन्होंने न केवल कई उग्रवादियों को निष्क्रिय किया, बल्कि अपनी सूझबूझ और नेतृत्व से पूरी टीम को सुरक्षित बाहर निकाला। यह अभियान उच्च जोखिम वाला था, जहां एक पल की चूक जानलेवा साबित हो सकती थी, लेकिन मेजर अर्शदीप सिंह की निर्भीकता ने मिशन को सफल बनाया।
नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जंगलों में चल रहे आतंकवाद-रोधी अभियान के दौरान नायब सूबेदार दोलेश्वर सुब्बा ने अद्वितीय साहस दिखाया। भारी फायरिंग के बीच वे आगे बढ़े और बेहद नजदीक से एक विदेशी आतंकवादी को मार गिराया। इसके बाद उन्होंने दूसरे आतंकवादी को भी निष्क्रिय किया। अत्यधिक जोखिम और जानलेवा हालात में उनका धैर्य और आक्रमकता पूरे अभियान की सफलता की कुंजी बनी।
शौर्य चक्र: रणभूमि में पराक्रम की मिसाल
लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
11 से 13 जुलाई 2025 के बीच भारत–म्यांमार सीमा पर चलाए गए विशेष अभियान में लेफ्टिनेंट कर्नल घटगे आदित्य श्रीकुमार ने सटीक योजना और मजबूत नेतृत्व का परिचय दिया। उनके नेतृत्व में एक बड़े उग्रवादी शिविर को पूरी तरह नष्ट किया गया, जिसमें 9 आतंकवादी मारे गए। यह अभियान सीमा सुरक्षा के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण था और इससे भविष्य के कई हमलों को रोका जा सका।
मेजर अंशुल बलटू (32 असम राइफल्स)
29 अप्रैल 2025 को असम के दीमा हसाओ जिले में मुठभेड़ के दौरान मेजर अंशुल बलटू ने व्यक्तिगत साहस का परिचय देते हुए एक उग्रवादी को ढेर किया। इस अभियान में कुल तीन उग्रवादियों को मार गिराया गया। कठिन भूभाग और सीमित संसाधनों के बावजूद उनका आत्मविश्वास और नेतृत्व प्रेरणादायक रहा।
मेजर शिवकांत यादव (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
13 मई 2025 को शोपियां में आतंकवादियों का पीछा करते हुए मेजर शिवकांत यादव ने एक बेहद खतरनाक आतंकवादी को नजदीकी मुकाबले में मार गिराया। यह ऑपरेशन अत्यधिक जोखिम भरा था, जहां हर कदम पर जान का खतरा था।
मेजर विवेक (42 राष्ट्रीय राइफल्स)
15 मई 2025 को पुलवामा में तलाशी अभियान के दौरान मेजर विवेक ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ‘ए+ श्रेणी’ के आतंकवादी को निष्क्रिय किया। उनकी सतर्कता से स्थानीय नागरिकों को कोई नुकसान नहीं हुआ, जो उनके पेशेवर कौशल और संवेदनशील नेतृत्व को दर्शाता है।
मेजर लैशांगथेम दीपक सिंह (पैरा स्पेशल फोर्सेस)
अपहृत नागरिकों को छुड़ाने के लिए चलाए गए उच्च जोखिम वाले अभियान में मेजर दीपक सिंह ने आतंकवादियों को निष्क्रिय कर एक निर्दोष नागरिक की जान बचाई। यह अभियान त्वरित निर्णय और साहसिक कार्रवाई का उत्कृष्ट उदाहरण था।
- कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर (पैरा स्पेशल फोर्सेस)-21 जुलाई 2025 को उधमपुर के बसंतगढ़ क्षेत्र में कैप्टन योगेंद्र सिंह ठाकुर ने जैश-ए-मोहम्मद के कुख्यात आतंकवादी को मार गिराया। उनके साहसिक कदम से क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा।
- सूबेदार पी.एच. मोसेस (1 असम राइफल्स)-14 मई 2025 को भारी गोलीबारी के दौरान सूबेदार मोसेस ने बेहतर मोर्चा संभालते हुए कई आतंकवादियों को निष्क्रिय किया। उनका अनुभव और साहस टीम के लिए ढाल बना।
लांस दफादार बलदेव चंद (42 राष्ट्रीय राइफल्स) – मरणोपरांत
19 सितंबर 2025 को किश्तवाड़ में मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद लांस दफादार बलदेव चंद अंत तक लड़ते रहे और सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका बलिदान भारतीय सेना के इतिहास में अमर रहेगा।
राइफलमैन मंगलेम सांग वैफेई (3 असम राइफल्स)
9 जून 2025 को मणिपुर में घुसपैठ-रोधी अभियान के दौरान तीन उग्रवादियों को मार गिराकर उन्होंने अपनी टीम को सुरक्षित रखा। उनका साहस युवाओं के लिए प्रेरणा है।
राइफलमैन धुर्बा ज्योति दत्ता (33 असम राइफल्स)
19 सितंबर 2025 को बाढ़ राहत अभियान से लौटते समय हुए हमले में घायल होने के बावजूद उन्होंने वाहन को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया और आठ साथियों की जान बचाई। यह कर्तव्यनिष्ठा और मानवता का अद्भुत उदाहरण है।
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विशिष्ट सेवा पुरस्कार: समर्पण और नेतृत्व का सम्मान
वीरता पुरस्कारों के साथ-साथ विशिष्ट सेवा के लिए भी कई वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों को सम्मानित किया गया। 19 परम विशिष्ट सेवा मेडल और 35 अति विशिष्ट सेवा मेडल उन अधिकारियों को दिए गए, जिन्होंने दीर्घकालिक सेवा, रणनीतिक योजना और संगठनात्मक नेतृत्व में उत्कृष्ट योगदान दिया। इसके अलावा 81 जवानों को विभिन्न अभियानों में अनुकरणीय कार्य के लिए मेंशन-इन-डिस्पैच से सम्मानित किया गया।
देश का नमन, सैनिकों को सलाम
गणतंत्र दिवस 2026 पर दिए गए ये सम्मान केवल पदक नहीं हैं, बल्कि उन कहानियों का प्रतीक हैं, जिनमें साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति समाहित है। ये पुरस्कार हर उस जवान को प्रेरित करते हैं, जो सीमा पर तैनात है या दुर्गम इलाकों में देश की रक्षा कर रहा है। पूरा देश इन वीरों को सलाम करता है और उनके परिवारों के त्याग को नमन करता है। इन जांबाजों की बदौलत ही भारत सुरक्षित है, मजबूत है और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।







