अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) से जुड़ा एक अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ के महासचिव डॉ. नयन साहू पर एक छात्रा ने अश्लील व्यवहार और शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे शैक्षणिक जगत में हड़कंप मच गया है।

परीक्षा में पास कराने के बदले अनुचित दबाव का आरोप
पीड़िता का आरोप है कि उससे परीक्षा में पास कराने के बदले कथित तौर पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया। छात्रा के अनुसार, जब उसने इस मांग का विरोध किया तो उसे फेल करने, बदनाम करने और जान से मारने जैसी धमकियां दी गईं।
15 दिसंबर की घटना का विवरण
छात्रा के बयान के अनुसार, 15 दिसंबर 2025 की शाम लगभग 5 बजे वनस्पति विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर डॉ. नयन साहू ने उसे अपने केबिन में अकेले बुलाया। वहां शिक्षक-छात्र संबंधों की मर्यादा के विपरीत व्यवहार किया गया और कथित रूप से अशोभनीय प्रस्ताव रखे गए-
पद और प्रभाव का हवाला देने का दावा
पीड़िता का कहना है कि आरोपी ने खुद को शिक्षक संघ का महासचिव बताते हुए अपने प्रभाव और राजनीतिक पहुंच का हवाला दिया। छात्रा के अनुसार, आरोपी ने कहा कि उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकती और वह विश्वविद्यालय तंत्र को अपने पक्ष में मोड़ सकता है।
छात्रा का आरोप है कि जब उसने अनुचित मांगों को ठुकराया तो उसे शैक्षणिक नुकसान पहुंचाने, चरित्र हनन करने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। इससे वह मानसिक रूप से बेहद भयभीत हो गई।
प्रशासन से शिकायत, लेकिन सहयोग का अभाव
पीड़िता के मुताबिक, जब उसने विश्वविद्यालय प्रशासन से शिकायत की, तो उसे अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उल्टा उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और शिक्षकों ने उसके करियर को नुकसान पहुंचाने की बात कही।
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मानसिक तनाव और असुरक्षा का दौर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद छात्रा ने खुद को मानसिक तनाव, डर और असुरक्षा की स्थिति में बताया है। उसका कहना है कि उसे लगातार भय सता रहा है और वह खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही।
न्याय की उम्मीद में छात्रा ने स्थानीय स्तर के साथ-साथ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और जिला पुलिस अधीक्षक सहित कई संवैधानिक और प्रशासनिक पदों पर शिकायत भेजी है। प्रधानमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्रालय तक भी मामला पहुंचाया गया है।
पुलिस में भी दर्ज कराया आवेदन
छात्रा ने इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है और अमरकंटक थाने में भी लिखित आवेदन दिया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शिकायत को गंभीरता से लिया गया है और तथ्यों की जांच जारी है।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि इस तरह की घटनाएं पहले भी अन्य छात्राओं के साथ होती रही होंगी, लेकिन डर और दबाव के कारण वे सामने नहीं आ पाईं। उसने खुद को हिम्मत जुटाकर आवाज उठाने वाली छात्रा बताया है।
आरोपी से संपर्क पर रोक और सुरक्षा की मांग
छात्रा ने मांग की है कि आरोपी से किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क पर तत्काल रोक लगाई जाए और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वह बिना डर के अपनी पढ़ाई और कानूनी प्रक्रिया जारी रख सके।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
जांच जारी, दोष सिद्ध होना बाकी
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच निष्पक्ष रूप से की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला आरोपों के स्तर पर है।
यह घटना एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसरों में महिला सुरक्षा, शिक्षक-छात्र संबंधों की मर्यादा और आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच कितनी तेज़ और निष्पक्ष होती है तथा पीड़िता को न्याय और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।






