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बांग्लादेश में यात्री बस फेरी बड़ी नाव पर चढ़ते समय हुई अनियंत्रित बस  के नदी में गिरने से 25 की मौत बचावकर्मियों ने 10 यात्री कोबचाया 

बांग्लादेश में यात्री बस फेरी बड़ी नाव पर चढ़ते समय हुई अनियंत्रित बस  के नदी में गिरने से 25 की मौत
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 27, 2026 7:31 अपराह्न
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बांग्लादेश के राजबाड़ी जिले में हुआ यह बस हादसा अत्यंत हृदयविदारक है। ईद की खुशियाँ मनाकर काम पर लौट रहे यात्रियों के लिए यह यात्रा अंतिम साबित हुई।

​राजबाड़ी बस दुर्घटना – पद्मा नदी में समाई खुशियाँ

​बांग्लादेश के राजबाड़ी (Rajbari) जिले में स्थित दौलतदिया घाट (Daulatdia Ghat) पर एक भीषण सड़क हादसा हुआ। एक अनियंत्रित यात्री बस फेरी (बड़ी नाव) पर चढ़ने के दौरान सीधे पद्मा नदी में जा गिरी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 26 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि कई अन्य घायल हैं।

​हादसे का संक्षिप्त विवरण

विवरणजानकारी
कब हुआहाल ही में (ईद-उल-फितर की छुट्टियों के बाद)
कहाँ हुआदौलतदिया घाट, राजबाड़ी, बांग्लादेश
कुल यात्रीलगभग 40
मृतकों की संख्या26
बचाए गए यात्री8
नदी का नामपद्मा नदी

यह हादसा कब, कहाँ और कैसे हुआ?

कब –  यह घटना सुबह के समय हुई जब यात्री ईद की लंबी छुट्टियों के बाद अपने कार्यस्थलों (मुख्यतः ढाका) की ओर लौट रहे थे।

कहाँ –  यह हादसा राजबाड़ी जिले के दौलतदिया फेरी घाट के टर्मिनल नंबर 3 पर हुआ। यह घाट दक्षिण-पश्चिमी जिलों को राजधानी ढाका से जोड़ने वाला एक प्रमुख केंद्र है।

कैसे –  प्रत्यक्षदर्शियों और जीवित बचे यात्रियों के अनुसार बस फेरी पर चढ़ने के लिए कतार में खड़ी थी। जैसे ही चालक ने बस को फेरी के रैंप (Ramp) पर चढ़ाने का प्रयास किया बस की ब्रेक फेल हो गई या चालक ने नियंत्रण खो दिया। भारी बारिश या फिसलन के कारण बस सीधे ढलान से लुढ़कते हुए गहरे पानी में समा गई।

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​बस कहाँ से कहाँ जा रही थी?

​यह बस बांग्लादेश के दक्षिण-पश्चिमी जिले (संभवतः सातखिरा या जेस्सोर) से रवाना हुई थी और राजधानी ढाका की ओर जा रही थी। अधिकांश यात्री श्रमिक और छोटे व्यवसायी थे जो ईद मनाने के बाद अपनी ड्यूटी पर वापस लौट रहे थे।

​प्रशासन द्वारा प्रदान की गई सहायता

​हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, अग्निशमन सेवा (Fire Service) और नौसेना के गोताखोरों ने बचाव अभियान शुरू किया।

  • बचाव कार्य –  अग्निशमन कर्मियों और स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए 8 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला।
  • चिकित्सा सहायता –  घायलों को तुरंत राजबाड़ी सदर अस्पताल और गोलंदा उपजिला स्वास्थ्य परिसर में भर्ती कराया गया।
  • आर्थिक सहायता – प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को दाह-संस्कार और तत्काल राहत के लिए नकद सहायता (लगभग 20,000-25,000 टका प्रति परिवार) देने की घोषणा की है।
  • क्रेन की तैनाती –  भारी क्रेन के जरिए बस को नदी से बाहर निकाला गया ताकि अंदर फंसे शवों को निकाला जा सके।

​प्रशासन और सरकार का आधिकारिक बयान

​हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है

  • जांच कमेटी –  राजबाड़ी के जिला मजिस्ट्रेट ने घटना की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है जो 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी।
  • लापरवाही पर कार्रवाई –  शुरुआती जांच में बस की फिटनेस और चालक की लापरवाही को मुख्य कारण माना जा रहा है। अधिकारियों ने कहा है कि यदि बस का फिटनेस सर्टिफिकेट वैध नहीं पाया गया तो मालिकों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
  • घाट सुरक्षा –  प्रशासन ने स्वीकार किया कि मानसून और भीड़ के दौरान घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ‘बैरिकेड्स’ लगाने का निर्देश दिया है।

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मृतकों का विवरण (उपलब्ध जानकारी के अनुसार)

​मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अधिकांश लोग एक ही क्षेत्र (कुष्टिया और राजबाड़ी) के निवासी थे।

  • अब्दुल रशीद (45) –  कुष्टिया का निवासी, ढाका में गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था।
  • मरीम बेगम (32) –  अपने दो बच्चों के साथ लौट रही थी (बच्चों की भी मौत)।
  • सोजिब हुसैन (22) –  छात्र, जो पढ़ाई के लिए ढाका जा रहा था। 

नोट – 26 मृतकों की पूरी सूची स्थानीय प्रशासन द्वारा शिनाख्त के बाद धीरे-धीरे जारी की गई है क्योंकि कई शवों की पहचान उनके पास मिले पहचान पत्रों से की जा रही है।

दुर्घटना के मुख्य कारण –  एक विश्लेषण

  • पुराने वाहन –  बांग्लादेश में फेरी मार्गों पर चलने वाली कई बसें फिटनेस मानकों को पूरा नहीं करतीं।
  • ओवरलोडिंग – ईद के समय बसों में क्षमता से अधिक यात्री बैठाए जाते हैं।
  • घाट की खराब स्थिति –  दौलतदिया घाट पर रैंप अक्सर ऊबड़-खाबड़ और असुरक्षित होते हैं।

​यह दुर्घटना बांग्लादेश के परिवहन तंत्र और घाट सुरक्षा पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। 26 परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया जो अपने बेहतर भविष्य के लिए शहर लौट रहे थे। प्रशासन को अब केवल जांच तक सीमित न रहकर घाटों पर सुरक्षा मानकों को अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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