भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की क्रांति अब पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ी पकड़ रही है — अक्टूबर 2025 में EV रजिस्ट्रेशन ने 2.34 लाख यूनिट्स का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जो भारतीय EV इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। 

रिकॉर्ड में मौसम: अक्टूबर में EV का धमाका
Vahan डेटा के मुताबिक़, अक्टूबर महीने में कुल 2,34,274 EV दर्ज किए गए — यह अब तक का सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है।  यह सालाना आधार पर (YoY) 7% की वृद्धि है, और पिछले महीने (सितंबर) की तुलना में भी लगभग 27% की बढ़ोतरी है। 
धन्यवाद, त्योहारों का सीजन: दशहरा, दियों, दिवाली जैसे उत्सवों ने खरीददारी को बढ़ावा दिया, जिससे EV की मांग में ज़बरदस्त उछाल आया। 
हर सेगमेंट का ज़बरदस्त योगदान
दिलचस्प बात यह है कि इस रिकॉर्ड रफ्तार में EV इंडस्ट्री के लगभग हर सेगमेंट ने सकारात्मक प्रदर्शन किया है: दोपहिया (E2W), तीन पहिया, पैसेंजर EV और कमर्शियल EV — हर हिस्से में बिक्री बढ़ी है। 
- इलेक्ट्रिक दोपहिया (E2W): इस सेगमेंट ने अकेले 1,43,814 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की है, जो पिछले साल की तुलना में 3% ऊपर है।
- तीन-पहिया EV: अक्टूबर में 70,604 यूनिट्स बिकी, जो पिछले साल के समान महीने की तुलना में 5% बढ़ी है।
- पैसेंजर EV (कार / SUV): इस सेगमेंट में सबसे तेज़ वृद्धि हुई — पिछले साल की तुलना में 57% की बढ़ोतरी के साथ 17,942 यूनिट्स पंजीकृत की गई।
- कमर्शियल EV: हालांकि यह अभी छोटे स्तर पर है, फिर भी इस महीने 1,902 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो पिछले साल की तुलना में 121% की छलांग है।
ब्रांड-वार लीडरशिप
ऑक्टूबर 2025 में EV बिक्री के मामले में Tata Motors ने महत्वपूर्ण बढ़त बनाई है। Car quest इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, Tata ने इस महीने 7,118 EV यूनिट्स बेचे, जो 6,634 यूनिट्स की पिछली महीने-बिक्री से लगभग 7% अधिक है। 
इसी दौरान Mahindra की EV बिक्री भी जबरदस्त बढ़ी — कंपनी ने 3,867 EVs बेचे, जो पिछले साल के मुकाबले 303% का विस्फोटक उछाल है। 
नए खिलाड़ियों की बात करें तो VinFast को भी इस महीने उल्लेखनीय सफलता मिली: 131 EV यूनिट्स की बिक्री, जो इसके भारत में विस्तार और उपस्थिति की मजबूती का संकेत है। 
“2 मिलियन” लक्ष्य अब वास्तविकता के करीब
इस रिकॉर्ड-महीने के ज़रिए EV उद्योग ने 2025 में 20 लाख (2 मिलियन) यूनिट्स की सालाना बिक्री लक्ष्य की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं। जनवरी से अक्टूबर 2025 तक, Vahan डेटा के अनुसार लगभग 18.46 लाख EVs बेचे जा चुके हैं। 

विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि वर्तमान गति जारी रही, तो साल के अंत तक यह लक्ष्य पूरा हो जाएगा और कुल बिक्री करीब 2.15 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच सकती है। 
चुनौतियाँ भी हैं — लेकिन इरादा मजबूत है
इस उत्साह के बीच, EV इंडस्ट्री को कुछ चुनौतियों का सामना भी करना पड़ रहा है:
- मैग्नेट की कमी (Rare-Earth Magnets): कुछ मेकर्स को जरूरी मैग्नेट उपलब्ध कराने में दिक्कतें आ रही हैं, जो EV मोटर्स के लिए बहुत ज़रूरी सामग्री हैं।
- GST बदलाव: हालांकि GST-2.0 ने कुछ इंजन-वाहनों की कीमतों में कटौती की, लेकिन EVs पर GST अभी भी 5% है — इससे कीमत में बढ़त बनी हुई है।
- चार्जिंग ढांचा: जैसे-जैसे EV की मांग बढ़ रही है, चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार भी उतनी ही ज़रूरत बन गया है — बुनियादी ढांचे की कमी अभी बड़ी बाधा हो सकती है।
सामाजिक और आर्थिक असर
यह रिकॉर्ड बिक्री न सिर्फ पर्यावरण के लिहाज़ से अच्छी खबर है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है:
- स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में कदम: बढ़ती EV बिक्री वायु प्रदूषण को कम कर सकती है और भारत को ग्रीन मोबिलिटी की दिशा में आगे ले जा सकती है।
- स्थानीय उत्पादन और नौकरियाँ: EV मेकर्स की मांग बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली युनिट्स में निवेश और रोज़गार के नए अवसर खुल सकते हैं।
- उपभोक्ता अपनापन: त्योहारों और छूटों की वजह से EV खरीदना और अधिक व्यवहार में आने लगा है — यह दर्शाता है कि आम लोग भी इलेक्ट्रिक भविष्य को स्वीकार कर रहे हैं।
आगे की राह
- EV कंपनियों को चाहिए कि वे मैग्नेट की वैकल्पिक सप्लायर खोजें और अपनी सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करें, ताकि भविष्य में किसी आपूर्ति संकट से न जूझना पड़े।
- सरकार और उद्योग को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर और ज़्यादा ध्यान देना होगा — चार्जिंग स्टेशन बढ़ने चाहिए, ताकि यूज़र्स को भरोसा हो सके।
- पॉलिसी-निर्माताओं को यह देखना चाहिए कि GST जैसे टैक्स इंसेंटिव्स EVs और ICE वाहनों के बीच संतुलन बनाए रखें और EV अपनाने को बढ़ावा दें







