इंडियन सुपर लीग (ISL) 2025-26 का रोमांच अपने चरम पर है और इसी कड़ी में कल रात ओडिशा एफसी और बेंगलुरु एफसी के बीच एक ऐसा मुकाबला देखने को मिला, खेल के आखिरी मिनट तक यह कहना मुश्किल था कि ऊंट किस करवट बैठेगा। दोनों टीमों ने मैदान पर अपना सब कुछ झोंक दिया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अंत में यह मुकाबला 1-1 की बराबरी पर छूटा और दोनों ही टीमों को एक-एक अंक से संतोष करना पड़ा।
शुरुआती संघर्ष और रणनीति का खेल
मैच शुरू होते ही बेंगलुरु एफसी ने अपने इरादे साफ कर दिए थे। कोच ने जिस आक्रामक एकादश को मैदान पर उतारा था, उसका असर शुरुआती 15 मिनट में साफ दिखाई दिया। बेंगलुरु के मिडफील्डर्स ने गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और छोटे-छोटे पास के जरिए ओडिशा की रक्षापंक्ति में छेद करने की कोशिश की। बेंगलुरु की टीम लगातार विंग्स का इस्तेमाल कर रही थी और उनके फॉरवर्ड खिलाड़ी कई बार ओडिशा के डी-एरिया में घुसने में सफल रहे। ओडिशा ने शुरुआत में खुद को डिफेंसिव मोड में रखा और विपक्षी टीम की चालों को समझने की कोशिश की। वे जानते थे कि बेंगलुरु जैसी टीम के खिलाफ अगर शुरुआत में ही गोल खा लिया, तो वापसी करना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
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रहीम अली का वो बेहतरीन फिनिश
जब बेंगलुरु की टीम पूरी तरह से मैच पर हावी नजर आ रही थी, तभी खेल के 34वें मिनट में पूरा मंजर बदल गया। बेंगलुरु के एक हमले को नाकाम करने के बाद ओडिशा ने बिजली की तेजी से काउंटर-अटैक किया। गेंद रक्षापंक्ति से निकलकर सीधे मिडफील्ड में आई और वहां से एक सटीक थ्रू-पास ने बेंगलुरु के डिफेंस को छिन्न-भिन्न कर दिया। यह गेंद ओडिशा के स्टार खिलाड़ी रहीम अली के पास पहुंची। रहीम ने गजब की फुर्ती दिखाई और बेंगलुरु के गोलकीपर के पास पहुंचने से पहले ही गेंद को एक शानदार कोणीय शॉट के जरिए गोल पोस्ट के अंदर भेज दिया। इस गोल ने न केवल स्कोरबोर्ड को 1-0 कर दिया, बल्कि मैच की पूरी लय ही बदल दी। जो ओडिशा अब तक केवल बचाव कर रही थी, वह अचानक आक्रामक हो गई और बेंगलुरु के खेमे में सन्नाटा पसर गया।

दूसरे हाफ की नाटकीय शुरुआत
हाफ टाइम के बाद जब दोनों टीमें मैदान पर लौटीं, तो बेंगलुरु के खिलाड़ियों की आंखों में वापसी की तड़प साफ देखी जा सकती थी। खेल शुरू होते ही बेंगलुरु ने फिर से दबाव बनाना शुरू किया। दूसरे हाफ के अभी महज तीन मिनट ही बीते थे कि 48वें मिनट में मैच का सबसे निर्णायक मोड़ आया। बेंगलुरु के एक खिलाड़ी को ओडिशा के पेनल्टी बॉक्स में गलत तरीके से रोका गया और रेफरी ने बिना किसी देरी के पेनल्टी का इशारा कर दिया। अब दबाव ब्रायन सांचेज पर था। सांचेज ने पूरी एकाग्रता के साथ गेंद को स्पॉट पर रखा और एक दमदार किक मारी। ओडिशा के गोलकीपर ने सही दिशा में गोता तो लगाया, लेकिन गेंद की रफ्तार इतनी तेज थी कि वह सीधे जाल से जा टकराई। बेंगलुरु ने 1-1 की बराबरी कर ली।
गोलकीपरों की मुस्तैदी और आखिरी समय का रोमांच
स्कोर बराबर होने के बाद मैच का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया। अब दोनों ही टीमें एक अंक के बजाय पूरे तीन अंक हासिल करने की कोशिश में लग गईं। बेंगलुरु ने अपने हमलों की धार और तेज कर दी। मैच के 70वें और 80वें मिनट के बीच बेंगलुरु को कम से कम तीन ऐसे मौके मिले, जहां वे गोल कर सकते थे, लेकिन ओडिशा के गोलकीपर ने वहां अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। एक मौके पर तो गेंद गोल लाइन के बिल्कुल करीब थी, जिसे डिफेंडर ने स्लाइड मारकर बाहर निकाला। दूसरी ओर, ओडिशा भी खामोश नहीं बैठी थी। उन्होंने भी आखिरी 10 मिनट में कुछ बेहद खतरनाक मूव बनाए। मैच के अंतिम क्षणों में ऐसा लगा कि शायद ओडिशा फिर से कोई चमत्कार कर देगी, लेकिन बेंगलुरु की रक्षापंक्ति ने भी अपनी पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए मुस्तैदी दिखाई।
अंक तालिका पर असर और आगे की राह
इस ड्रॉ के नतीजे ने दोनों टीमों को एक-एक अंक दिया है, लेकिन अंक तालिका में इसके मायने अलग-अलग हैं। बेंगलुरु एफसी के लिए यह मैच थोड़ा निराशाजनक रहा होगा क्योंकि वे इस समय तालिका में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। तीन अंक उन्हें प्लेऑफ की दौड़ में काफी ऊपर ले जा सकते थे। अब उन्हें अपनी फिनिशिंग और अटैक को और धार देनी होगी। वहीं, ओडिशा एफसी के लिए यह ड्रॉ एक बड़ी राहत की तरह है। हालांकि वे अभी भी तालिका के निचले हिस्से में संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन बेंगलुरु जैसी मजबूत टीम से एक अंक छीन लेना उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है। यह ड्रॉ उन्हें आने वाले मुकाबलों के लिए एक नई ऊर्जा देगा।







