11 दिसंबर।
दिसंबर का महीना हर वर्ष दुनिया को एक ऐसे अवसर देता है, जिनका सीधा संबंध मानव जीवन, प्रकृति से है जो है अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस। यह दिन प्रकृति के उच्चतम शिखरों की महत्ता को रेखांकित करता है, जो कही न कहीं मानव जीवन को बेहतर बनानें के साथ प्रकृति की सुरक्षा से जुड़ा है। अंर्तराष्ट्रीय पर्वत दिवस विश्व समुदाय को यह याद दिलाने का वह मौका है कि पर्वत केवल भौगोलिक संरचनाएँ नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति, जैव-विविधता और पर्यावरणीय संतुलन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित यह दिवस पर्वतीय पारिस्थितिकियों के संरक्षण, वहाँ की सभ्यताओं के उत्थान और जलवायु परिवर्तन से निपटने के वैश्विक प्रयासों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। वर्ष 2025 में भी यह दिवस दुनिया भर में विभिन्न देशों, संस्थानों, पर्वत समुदायों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा उत्साह और जिम्मेदारी के साथ मनाया जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस,प्रकृति के प्रहरी को समर्पित
पर्वत धरती की जीवन-रेखा है क्योंकि दुनिया की करीब 15% जनसंख्या पर्वतीय क्षेत्रों में रहती है। पर्वत धरती की सतह का लगभग 27 प्रतिशत क्षेत्र कवर करते हैं। और वैश्विक जैव-विविधता का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं भू-आकृतियों में सुरक्षित है। पर्वत न केवल हिमनदों को जन्म देते हैं, बल्कि दुनिया के लगभग आधी आबादी के लिए ताजे पानी का प्रमुख स्रोत भी हैं। इसके बावजूद, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, अनियंत्रित पर्यटन और पारिस्थितिक असंतुलन पर्वतीय क्षेत्रों को लगातार नुकसान पहुँचा रहे हैं। पर्वत केवल मानव जीवन ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों, दुर्लभ वनस्पतियों और अनेक प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में पर्वत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
International Mountain Day की इतिहास और स्थापना
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2003 से हर वर्ष 11 दिसंबर को International Mountain Day के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य पर्वतीय जीवन, संस्कृति, जलवायु और पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना है।
इस वर्ष की थीम प्रत्येक वर्ष इस दिवस के लिए एक विशेष थीम निर्धारित होती है। आमतौर पर यह थीमें सतत् विकास, जलवायु परिवर्तन और स्थानीय समुदायों की आजीविका जैसे मुद्दों पर केंद्रित होती हैं। इस वर्ष भी वैश्विक स्तर पर पर्वतीय पारिस्थितिकी की सुरक्षा, जल संसाधनों के संरक्षण, पर्वतीय कृषि और पहाड़ी समुदायों की आजीविका को केंद्रीय मुद्दा बनाकर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
पर्वती समुदायों पर संकट
पिछले कुछ वर्षों में पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु संकट तेजी से बढ़ा है।ग्लेशियरों का तेज़ी से पिघलना, अनियमित वर्षा,भूस्खलन और अचानक बाढ़,बागवानी और कृषि का नुकसान,पहाड़ी प्रजातियों का विलुप्त होना। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम न उठाए गए, तो आने वाले दशकों में पर्वतीय संसाधनों की कमी दुनिया के बड़े हिस्से को प्रभावित कर सकती है।
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भारत में पर्वत दिवस का महत्व
भारत के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में पश्चिमी तथा पूर्वी घाट जैसी पर्वत श्रृंखलाएँ देश के पारिस्थितिक संतुलन का मेरुदंड हैं। हिमालय भारत, नेपाल, भूटान समेत एशिया के करोड़ों लोगों को पानी, ऊर्जा तथा आजीविका प्रदान करता है। देश में पर्वत दिवस पर अनेक संस्थाएँ पर्यावरण मंत्रालय, शैक्षणिक संस्थान, और स्थानीय समुदाय जागरूकता कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, तथा पर्वतीय पर्यटन के जिम्मेदार मॉडल को बढ़ावा देने पर जोर देते हैं।
विशेषज्ञों की क्या है राय
पर्यावरण वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्वतीय संरक्षण केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास से भी गहराई से जुड़ा है। उनके अनुसार, “यदि पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहा कटाव, अवैध खनन और ग्लेशियर पिघलने की गति ऐसे ही जारी रही, तो अगले कुछ दशकों में एशिया की बड़ी नदियों का जलस्तर प्रभावित हो सकता है, जिससे करोड़ों लोग जल संकट का सामना करेंगे।”
भारत में प्रकृति के प्रति प्रतिबद्धता
भारत पर्वतीय संसाधनों की दृष्टि से दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में गिना जाता है। हिमालय, पश्चिमी घाट, अरावली, विंध्य और पूर्वी घाट जैसे पर्वतमालाएँ न केवल भूगोल, बल्कि भारत की संस्कृति और जीवनशैली का आधार हैं।भारत सरकार और राज्य सरकारें पर्वतीय संरक्षण के लिए कई महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही हैं। जिसके तहत हिमालयन इकोलॉजी रिसर्च कार्यक्रम,जलवायु अनुकूल कृषि और वन प्रबंधन,बर्फ से ढके क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन प्रणाली,पर्वतीय पर्यटन के लिए “सस्टेनेबल टूरिज्म” नीति,हिम तेंदुआ और अन्य दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण कार्यक्रम शामिल है। इसके साथ ही समुदाय आधारित पहल भी जारी है,जिसमें लद्दाख, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय गांवों ने जल संरक्षण, ऑर्गेनिक खेती, हर्बल मेडिसिन और पारंपरिक ज्ञान को पुनर्जीवित करने की दिशा में उल्लेखनीय कदम उठाए हैं।
दुनिया भर में पर्वत दिवस होती गतिविधियाँ
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस पर विभिन्न पर्यावरण संगठनों, विश्वविद्यालयों, पर्वतारोहण समूहों और समुदायों द्वारा कई गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। जिसमें वृक्षारोपण,पर्वतीय सफाई अभियान,ग्लेशियर संरक्षण पर सेमिनार,युवाओं के लिए जागरूकता कार्यक्रम,स्थानीय कला और सांस्कृतिक प्रदर्शनी,पर्वतारोहण और ट्रेकिंग का आयोजन,पर्वतीय खाद्य और हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया जाता है। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य न केवल पर्वतीय क्षेत्रों की सुंदरता दिखाना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करना भी होता है।
पर्वत बचेंगे तभी बचेगा भविष्य
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस दुनिया को यह संदेश देता है कि पर्वत मानवता की सामूहिक धरोहर हैं। यदि हम उन्हें सुरक्षित नहीं रखेंगे, तो जल, भोजन, हवा और जलवायु सब कुछ संकट में पड़ जाएगा। पर्वतों की रक्षा न सिर्फ पर्यावरण की रक्षा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा है। आज यह आवश्यक है कि दुनिया विकास और पर्यावरण के संतुलन को समझे, पर्वतीय इलाकों में जिम्मेदारी के साथ कदम उठाए और पर्वतों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना विकसित करे।







